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190. पृष्ठ
9 · अत-तौबा
يُبَشِّرُهُمْ رَبُّهُمْ بِرَحْمَةٍ مِنْهُ وَرِضْوَانٍ وَجَنَّاتٍ لَهُمْ ف۪يهَا نَع۪يمٌ مُق۪يمٌۙ21
उन्हें उनका रब अपना दयालुता और प्रसन्नता और ऐसे बाग़ों की शुभ-सूचना देता है, जिनमें उनके लिए स्थायी सुख-सामग्री है
خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ اِنَّ اللّٰهَ عِنْدَهُٓ اَجْرٌ عَظ۪يمٌ22
उनमें वे सदैव रहेंगे। निस्संदेह अल्लाह के पास बड़ा बदला है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَتَّخِذُٓوا اٰبَٓاءَكُمْ وَاِخْوَانَكُمْ اَوْلِيَٓاءَ اِنِ اسْتَحَبُّوا الْكُفْرَ عَلَى الْا۪يمَانِۜ وَمَنْ يَتَوَلَّهُمْ مِنْكُمْ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ23
ऐ ईमान लानेवालो! अपने बाप और अपने भाइयों को अपने मित्र न बनाओ यदि ईमान के मुक़ाबले में कुफ़्र उन्हें प्रिय हो। तुममें से जो कोई उन्हें अपना मित्र बनाएगा, तो ऐसे ही लोग अत्याचारी होंगे
قُلْ اِنْ كَانَ اٰبَٓاؤُ۬كُمْ وَاَبْنَٓاؤُ۬كُمْ وَاِخْوَانُكُمْ وَاَزْوَاجُكُمْ وَعَش۪يرَتُكُمْ وَاَمْوَالٌۨ اقْتَرَفْتُمُوهَا وَتِجَارَةٌ تَخْشَوْنَ كَسَادَهَا وَمَسَاكِنُ تَرْضَوْنَهَٓا اَحَبَّ اِلَيْكُمْ مِنَ اللّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَجِهَادٍ ف۪ي سَب۪يلِه۪ فَتَرَبَّصُوا حَتّٰى يَاْتِيَ اللّٰهُ بِاَمْرِه۪ۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْفَاسِق۪ينَ۟24
कह दो, "यदि तुम्हारे बाप, तुम्हारे बेटे, तुम्हारे भाई, तुम्हारी पत्नि यों और तुम्हारे रिश्ते-नातेवाले और माल, जो तुमने कमाए है और कारोबार जिसके मन्दा पड़ जाने का तुम्हें भय है और घर जिन्हें तुम पसन्द करते हो, तुम्हे अल्लाह और उसके रसूल और उसके मार्ग में जिहाद करने से अधिक प्रिय है तो प्रतीक्षा करो, यहाँ तक कि अल्लाह अपना फ़ैसला ले आए। औऱ अल्लाह अवज्ञाकारियों को मार्ग नहीं दिखाता।"
لَقَدْ نَصَرَكُمُ اللّٰهُ ف۪ي مَوَاطِنَ كَث۪يرَةٍۙ وَيَوْمَ حُنَيْنٍۙ اِذْ اَعْجَبَتْكُمْ كَثْرَتُكُمْ فَلَمْ تُغْنِ عَنْكُمْ شَيْـًٔا وَضَاقَتْ عَلَيْكُمُ الْاَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ ثُمَّ وَلَّيْتُمْ مُدْبِر۪ينَۚ25
अल्लाह बहुत-से अवसरों पर तुम्हारी सहायता कर चुका है और हुनैन (की लड़ाई) के दिन भी, जब तुम अपनी अधिकता पर फूल गए, तो वह तुम्हारे कुछ काम न आई और धरती अपनी विशालता के बावजूद तुम पर तंग हो गई। फिर तुम पीठ फेरकर भाग खड़े हुए
ثُمَّ اَنْزَلَ اللّٰهُ سَك۪ينَتَهُ عَلٰى رَسُولِه۪ وَعَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ وَاَنْزَلَ جُنُودًا لَمْ تَرَوْهَا وَعَذَّبَ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ وَذٰلِكَ جَزَٓاءُ الْكَافِر۪ينَ26
अन्ततः अल्लाह ने अपने रसूल पर और मोमिनों पर अपनी सकीनत (प्रशान्ति) उतारी और ऐसी सेनाएँ उतारी जिनको तुमने नहीं देखा। और इनकार करनेवालों को यातना दी, और यही इनकार करनेवालों का बदला है