191. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

191. पृष्ठ
9 · अत-तौबा
ثُمَّ يَتُوبُ اللّٰهُ مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَ عَلٰى مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ27
फिर इसके बाद अल्लाह जिसको चाहता है उसे तौबा नसीब करता है। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِنَّمَا الْمُشْرِكُونَ نَجَسٌ فَلَا يَقْرَبُوا الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ بَعْدَ عَامِهِمْ هٰذَاۚ وَاِنْ خِفْتُمْ عَيْلَةً فَسَوْفَ يُغْن۪يكُمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِه۪ٓ اِنْ شَٓاءَۜ اِنَّ اللّٰهَ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ28
ऐ ईमान लानेवालो! मुशरिक तो बस अपवित्र ही है। अतः इस वर्ष के पश्चात वे मस्जिदे हराम के पास न आएँ। और यदि तुम्हें निर्धनता का भय हो तो आगे यदि अल्लाह चाहेगा तो तुम्हें अपने अनुग्रह से समृद्ध कर देगा। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, अत्यन्त तत्वदर्शी है
قَاتِلُوا الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَلَا بِالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَلَا يُحَرِّمُونَ مَا حَرَّمَ اللّٰهُ وَرَسُولُهُ وَلَا يَد۪ينُونَ د۪ينَ الْحَقِّ مِنَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ حَتّٰى يُعْطُوا الْجِزْيَةَ عَنْ يَدٍ وَهُمْ صَاغِرُونَ۟29
वे किताबवाले जो न अल्लाह पर ईमान रखते है और न अन्तिम दिन पर और न अल्लाह और उसके रसूल के हराम ठहराए हुए को हराम ठहराते है और न सत्यधर्म का अनुपालन करते है, उनसे लड़ो, यहाँ तक कि वे सत्ता से विलग होकर और छोटे (अधीनस्थ) बनकर जिज़्या देने लगे
وَقَالَتِ الْيَهُودُ عُزَيْرٌۨ ابْنُ اللّٰهِ وَقَالَتِ النَّصَارَى الْمَس۪يحُ ابْنُ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ قَوْلُهُمْ بِاَفْوَاهِهِمْۚ يُضَاهِؤُ۫نَ قَوْلَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ قَبْلُۜ قَاتَلَهُمُ اللّٰهُۘ اَنّٰى يُؤْفَكُونَ30
यहूदी करते है, "उज़ैर अल्लाह का बेटा है।" और ईसाई कहते है, "मसीह अल्लाह का बेटा है।" ये उनकी अपने मुँह की बातें हैं। ये उन लोगों की-सी बातें कर रहे है जो इससे पहले इनकार कर चुके है। अल्लाह की मार इन पर! ये कहाँ से औधे हुए जा रहे हैं!
اِتَّخَذُٓوا اَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَانَهُمْ اَرْبَابًا مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَالْمَس۪يحَ ابْنَ مَرْيَمَۚ وَمَٓا اُمِرُٓوا اِلَّا لِيَعْبُدُٓوا اِلٰهًا وَاحِدًاۚ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ سُبْحَانَهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ31
उन्होंने अल्लाह से हटकर अपने धर्मज्ञाताओं और संसार-त्यागी संतों और मरयम के बेटे ईसा को अपने रब बना लिए है - हालाँकि उन्हें इसके सिवा और कोई आदेश नहीं दिया गया था कि अकेले इष्टि-पूज्य की वे बन्दगी करें, जिसक सिवा कोई और पूज्य नहीं। उसकी महिमा के प्रतिकूल है वह शिर्क जो ये लोग करते है। -