193. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
9 · अत-तौबा
اِنَّمَا النَّس۪ٓيءُ زِيَادَةٌ فِي الْكُفْرِ يُضَلُّ بِهِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا يُحِلُّونَهُ عَامًا وَيُحَرِّمُونَهُ عَامًا لِيُوَاطِؤُ۫ا عِدَّةَ مَا حَرَّمَ اللّٰهُ فَيُحِلُّوا مَا حَرَّمَ اللّٰهُۜ زُيِّنَ لَهُمْ سُٓوءُ اَعْمَالِهِمْۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ۟37
(आदर के महीनों का) हटाना तो बस कुफ़्र में एक बृद्धि है, जिससे इनकार करनेवाले गुमराही में पड़ते है। किसी वर्ष वे उसे हलाल (वैध) ठहरा लेते है और किसी वर्ष उसको हराम ठहरा लेते है, ताकि अल्लाह के आदृत (महीनों) की संख्या पूरी कर लें, और इस प्रकार अल्लाह के हराम किए हुए को वैध ठहरा ले। उनके अपने बुरे कर्म उनके लिए सुहाने हो गए है और अल्लाह इनकार करनेवाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَا لَكُمْ اِذَا ق۪يلَ لَكُمُ انْفِرُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ اثَّاقَلْتُمْ اِلَى الْاَرْضِۜ اَرَض۪يتُمْ بِالْحَيٰوةِ الدُّنْيَا مِنَ الْاٰخِرَةِۚ فَمَا مَتَاعُ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا فِي الْاٰخِرَةِ اِلَّا قَل۪يلٌ38
ऐ ईमान लानेवालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है, "अल्लाह के मार्ग में निकलो" तो तुम धरती पर ढहे जाते हो? क्या तुम आख़िरत की अपेक्षा सांसारिक जीवन पर राज़ी हो गए? सांसारिक जीवन की सुख-सामग्री तो आख़िरत के हिसाब में है कुछ थोड़ी ही!
اِلَّا تَنْفِرُوا يُعَذِّبْكُمْ عَذَابًا اَل۪يمًا وَيَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّوهُ شَيْـًٔاۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ39
यदि तुम निकालोगे तो वह तुम्हें दुखद यातना देगा और वह तुम्हारी जगह दूसरे गिरोह को ले आएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ सकोगे। और अल्लाह हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है
اِلَّا تَنْصُرُوهُ فَقَدْ نَصَرَهُ اللّٰهُ اِذْ اَخْرَجَهُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا ثَانِيَ اثْنَيْنِ اِذْ هُمَا فِي الْغَارِ اِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِه۪ لَا تَحْزَنْ اِنَّ اللّٰهَ مَعَنَاۚ فَاَنْزَلَ اللّٰهُ سَك۪ينَتَهُ عَلَيْهِ وَاَيَّدَهُ بِجُنُودٍ لَمْ تَرَوْهَا وَجَعَلَ كَلِمَةَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا السُّفْلٰىۜ وَكَلِمَةُ اللّٰهِ هِيَ الْعُلْيَاۜ وَاللّٰهُ عَز۪يزٌ حَك۪يمٌ40
यदि तुम उसकी सहायता न भी करो तो अल्लाह उसकी सहायता उस समय कर चुका है जब इनकार करनेवालों ने उसे इस स्थिति में निकाला कि वह केवल दो में का दूसरा था, जब वे दोनों गुफ़ा में थे। जबकि वह अपने साथी से कह रहा था, "शोकाकुल न हो। अवश्यमेव अल्लाह हमारे साथ है।" फिर अल्लाह ने उसपर अपनी ओर से सकीनत (प्रशान्ति) उतारी और उसकी सहायता ऐसी सेनाओं से की जिन्हें तुम देख न सके और इनकार करनेवालों का बोल नीचा कर दिया, बोल तो अल्लाह ही का ऊँचा रहता है। अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशील, तत्वदर्शी है