194. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
9 · अत-तौबा
اِنْفِرُوا خِفَافًا وَثِقَالًا وَجَاهِدُوا بِاَمْوَالِكُمْ وَاَنْفُسِكُمْ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۜ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ41
हलके और बोझिल निकल पड़ो और अल्लाह के मार्ग में अपने मालों और अपनी जानों के साथ जिहाद करो! यही तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानो
لَوْ كَانَ عَرَضًا قَر۪يبًا وَسَفَرًا قَاصِدًا لَاتَّبَعُوكَ وَلٰكِنْ بَعُدَتْ عَلَيْهِمُ الشُّقَّةُۜ وَسَيَحْلِفُونَ بِاللّٰهِ لَوِ اسْتَطَعْنَا لَخَرَجْنَا مَعَكُمْۚ يُهْلِكُونَ اَنْفُسَهُمْۚ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ اِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ۟42
यदि निकट (भविष्य में) ही कुछ मिलनेवाला होता और सफ़र भी हलका होता तो वे अवश्य तुम्हारे पीछे चल पड़ते, किन्तु मार्ग की दूरी उन्हें कठिन और बहुत दीर्घ प्रतीत हुई। अब वे अल्लाह की क़समें खाएँगे कि, "यदि हममें इसकी सामर्थ्य होती तो हम अवश्य तुम्हारे साथ निकलते।" वे अपने आपको तबाही में डाल रहे है और अल्लाह भली-भाँति जानता है कि निश्चय ही वे झूठे है
عَفَا اللّٰهُ عَنْكَۚ لِمَ اَذِنْتَ لَهُمْ حَتّٰى يَتَبَيَّنَ لَكَ الَّذ۪ينَ صَدَقُوا وَتَعْلَمَ الْكَاذِب۪ينَ43
अल्लाह ने तुम्हे क्षमा कर दिया! तुमने उन्हें क्यों अनुमति दे दी, यहाँ तक कि जो लोग सच्चे है वे तुम्हारे सामने प्रकट हो जाते और झूठों को भी तुम जान लेते?
لَا يَسْتَاْذِنُكَ الَّذ۪ينَ يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ اَنْ يُجَاهِدُوا بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِالْمُتَّق۪ينَ44
जो लोग अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान रखते है, वे तुमसे कभी यह नहीं चाहेंगे कि उन्हें अपने मालों और अपनी जानों के साथ जिहाद करने से माफ़ रखा जाए। और अल्लाह डर रखनेवालों को भली-भाँति जानता है
اِنَّمَا يَسْتَاْذِنُكَ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَارْتَابَتْ قُلُوبُهُمْ فَهُمْ ف۪ي رَيْبِهِمْ يَتَرَدَّدُونَ45
तुमसे छुट्टी तो बस वही लोग माँगते है जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान नहीं रखते, और जिनके दिल सन्देह में पड़े है, तो वे अपने सन्देह ही में डाँवाडोल हो रहे है
وَلَوْ اَرَادُوا الْخُرُوجَ لَاَعَدُّوا لَهُ عُدَّةً وَلٰكِنْ كَرِهَ اللّٰهُ انْبِعَاثَهُمْ فَثَبَّطَهُمْ وَق۪يلَ اقْعُدُوا مَعَ الْقَاعِد۪ينَ46
यदि वे निकलने का इरादा करते तो इसके लिए कुछ सामग्री जुटाते, किन्तु अल्लाह ने उनके उठने को नापसन्द किया तो उसने उन्हें रोक दिया। उनके कह दिया गया, "बैठनेवालों के साथ बैठ रहो।"
لَوْ خَرَجُوا ف۪يكُمْ مَا زَادُوكُمْ اِلَّا خَبَالًا وَلَا۬اَوْضَعُوا خِلَالَكُمْ يَبْغُونَكُمُ الْفِتْنَةَۚ وَف۪يكُمْ سَمَّاعُونَ لَهُمْۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِالظَّالِم۪ينَ47
यदि वे तुम्हारे साथ निकलते भी तो तुम्हारे अन्दर ख़राबी के सिवा किसी और चीज़ की अभिवृद्धि नहीं करते। और वे तुम्हारे बीच उपद्रव मचाने के लिए दौड़-धूप करते और तुममें उनकी सुननेवाले है। और अल्लाह अत्याचारियों को भली-भाँति जानता है