197. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

197. पृष्ठ
9 · अत-तौबा
يَحْلِفُونَ بِاللّٰهِ لَكُمْ لِيُرْضُوكُمْۚ وَاللّٰهُ وَرَسُولُهُٓ اَحَقُّ اَنْ يُرْضُوهُ اِنْ كَانُوا مُؤْمِن۪ينَ62
वे तुम लोगों के सामने अल्लाह की क़समें खाते है, ताकि तुम्हें राज़ी कर लें, हालाँकि यदि वे मोमिन है तो अल्लाह और उसका रसूल इसके ज़्यादा हक़दार है कि उनको राज़ी करें
اَلَمْ يَعْلَمُٓوا اَنَّهُ مَنْ يُحَادِدِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ فَاَنَّ لَهُ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدًا ف۪يهَاۜ ذٰلِكَ الْخِزْيُ الْعَظ۪يمُ63
क्या उन्हें मालूम नहीं कि जो अल्लाह औऱ उसके रसूल का विरोध करता है, उसके लिए जहन्नम की आग है जिसमें वह सदैव रहेगा। यह बहुत बड़ी रुसवाई है
يَحْذَرُ الْمُنَافِقُونَ اَنْ تُنَزَّلَ عَلَيْهِمْ سُورَةٌ تُنَبِّئُهُمْ بِمَا ف۪ي قُلُوبِهِمْۜ قُلِ اسْتَهْزِؤُ۫اۚ اِنَّ اللّٰهَ مُخْرِجٌ مَا تَحْذَرُونَ64
मुनाफ़िक़ (कपटाचारी) डर रहे है कि कहीं उनके बारे में कोई ऐसी सूरा न अवतरित हो जाए जो वह सब कुछ उनपर खोल दे, जो उनके दिलों में है। कह दो, "मज़ाक़ उड़ा लो, अल्लाह तो उसे प्रकट करके रहेगा, जिसका तुम्हें डर है।"
وَلَئِنْ سَاَلْتَهُمْ لَيَقُولُنَّ اِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلْعَبُۜ قُلْ اَبِاللّٰهِ وَاٰيَاتِه۪ وَرَسُولِه۪ كُنْتُمْ تَسْتَهْزِؤُ۫نَ65
और यदि उनसे पूछो तो कह देंगे, "हम तो केवल बातें और हँसी-खेल कर रहे थे।" कहो, "क्या अल्लाह, उसकी आयतों और उसके रसूल के साथ हँसी-मज़ाक़ करते थे?
لَا تَعْتَذِرُوا قَدْ كَفَرْتُمْ بَعْدَ ا۪يمَانِكُمْۜ اِنْ نَعْفُ عَنْ طَٓائِفَةٍ مِنْكُمْ نُعَذِّبْ طَٓائِفَةً بِاَنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِم۪ينَ۟66
"बहाने न बनाओ, तुमने अपने ईमान के पश्चात इनकार किया। यदि हम तुम्हारे कुछ लोगों को क्षमा भी कर दें तो भी कुछ लोगों को यातना देकर ही रहेंगे, क्योंकि वे अपराधी हैं।"
اَلْمُنَافِقُونَ وَالْمُنَافِقَاتُ بَعْضُهُمْ مِنْ بَعْضٍۢ يَاْمُرُونَ بِالْمُنْكَرِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمَعْرُوفِ وَيَقْبِضُونَ اَيْدِيَهُمْۜ نَسُوا اللّٰهَ فَنَسِيَهُمْۜ اِنَّ الْمُنَافِق۪ينَ هُمُ الْفَاسِقُونَ67
मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। वे बुराई का हुक्म देते है और भलाई से रोकते है और हाथों को बन्द किए रहते है। वे अल्लाह को भूल बैठे तो उसने भी उन्हें भुला दिया। निश्चय ही मुनाफ़िक़ अवज्ञाकारी हैं
وَعَدَ اللّٰهُ الْمُنَافِق۪ينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ هِيَ حَسْبُهُمْۚ وَلَعَنَهُمُ اللّٰهُۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُق۪يمٌۙ68
अल्लाह ने मुनाफ़िक़ पुरुषों और मुनाफ़िक़ स्त्रियों और इनकार करनेवालों से जहन्नम की आग का वादा किया है, जिसमें वे सदैव ही रहेंगे। वही उनके लिए काफ़ी है और अल्लाह ने उनपर लानत की, और उनके लिए स्थाई यातना है