199. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
9 · अत-तौबा
يَٓا اَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِق۪ينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْۜ وَمَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ73
ऐ नबी! इनकार करनेवालों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करो और उनके साथ सख़्ती से पेश आओ। अन्ततः उनका ठिकाना जहन्नम है और वह जा पहुँचने की बहुत बुरी जगह है!
يَحْلِفُونَ بِاللّٰهِ مَا قَالُواۜ وَلَقَدْ قَالُوا كَلِمَةَ الْكُفْرِ وَكَفَرُوا بَعْدَ اِسْلَامِهِمْ وَهَمُّوا بِمَا لَمْ يَنَالُواۚ وَمَا نَقَمُٓوا اِلَّٓا اَنْ اَغْنٰيهُمُ اللّٰهُ وَرَسُولُهُ مِنْ فَضْلِه۪ۚ فَاِنْ يَتُوبُوا يَكُ خَيْرًا لَهُمْۚ وَاِنْ يَتَوَلَّوْا يُعَذِّبْهُمُ اللّٰهُ عَذَابًا اَل۪يمًا فِي الدُّنْيَا وَالْاٰخِرَةِۚ وَمَا لَهُمْ فِي الْاَرْضِ مِنْ وَلِيٍّ وَلَا نَص۪يرٍ74
वे अल्लाह की क़समें खाते है कि उन्होंने नहीं कहा, हालाँकि उन्होंने अवश्य ही कुफ़्र की बात कही है और अपने इस्लाम स्वीकार करने के पश्चात इनकार किया, और वह चाहा जो वे न पा सके। उनके प्रतिशोध का कारण तो यह है कि अल्लाह और उसके रसूल ने अपने अनुग्रह से उन्हें समृद्ध कर दिया। अब यदि वे तौबा कर लें तो उन्हीं के लिए अच्छा है और यदि उन्होंने मुँह मोड़ा तो अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में दुखद यातना देगा और धरती में उनका न कोई मित्र होगा और न सहायक
وَمِنْهُمْ مَنْ عَاهَدَ اللّٰهَ لَئِنْ اٰتٰينَا مِنْ فَضْلِه۪ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ الصَّالِح۪ينَ75
और उनमें से कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होने अल्लाह को वचन दिया था कि "यदि उसने हमें अपने अनुग्रह से दिया तो हम अवश्य दान करेंगे और नेक होकर रहेंगे।"
فَلَمَّٓا اٰتٰيهُمْ مِنْ فَضْلِه۪ بَخِلُوا بِه۪ وَتَوَلَّوْا وَهُمْ مُعْرِضُونَ76
किन्तु जब अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह से दिया तो वे उसमें कंजूसी करने लगे और पहलू बचाकर फिर गए
فَاَعْقَبَهُمْ نِفَاقًا ف۪ي قُلُوبِهِمْ اِلٰى يَوْمِ يَلْقَوْنَهُ بِمَٓا اَخْلَفُوا اللّٰهَ مَا وَعَدُوهُ وَبِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ77
फिर परिणाम यह हुआ कि उसने उनके दिलों में उस दिन तक के लिए कपटाचार डाल दिया, जब वे उससे मिलेंगे, इसलिए कि उन्होंने अल्लाह से जो प्रतिज्ञा की थी उसे भंग कर दिया और इसलिए भी कि वे झूठ बोलते रहे
اَلَمْ يَعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ سِرَّهُمْ وَنَجْوٰيهُمْ وَاَنَّ اللّٰهَ عَلَّامُ الْغُيُوبِۚ78
क्या उन्हें खबर नहीं कि अल्लाह उनका भेद और उनकी कानाफुसियों को अच्छी तरह जानता है और यह कि अल्लाह परोक्ष की सारी बातों को भली-भाँति जानता है
اَلَّذ۪ينَ يَلْمِزُونَ الْمُطَّوِّع۪ينَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ فِي الصَّدَقَاتِ وَالَّذ۪ينَ لَا يَجِدُونَ اِلَّا جُهْدَهُمْ فَيَسْخَرُونَ مِنْهُمْۜ سَخِرَ اللّٰهُ مِنْهُمْۘ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ79
जो लोग स्वेच्छापूर्वक देनेवाले मोमिनों पर उनके सदक़ो (दान) के विषय में चोटें करते है और उन लोगों का उपहास करते है, जिनके पास इसके सिवा कुछ नहीं जो वे मशक़्क़त उठाकर देते है, उन (उपहास करनेवालों) का उपहास अल्लाह ने किया और उनके लिए दुखद यातना है