20. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

20. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
وَاِذْ يَرْفَعُ اِبْرٰه۪يمُ الْقَوَاعِدَ مِنَ الْبَيْتِ وَاِسْمٰع۪يلُۜ رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّاۜ اِنَّكَ اَنْتَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ127
और याद करो जब इबराहीम और इसमाईल इस घर की बुनियादें उठा रहे थे, (तो उन्होंने प्रार्थना की), "ऐ हमारे रब! हमारी ओर से इसे स्वीकार कर ले, निस्संदेह तू सुनता-जानता है
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِنْ ذُرِّيَّتِنَٓا اُمَّةً مُسْلِمَةً لَكَۖ وَاَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَاۚ اِنَّكَ اَنْتَ التَّوَّابُ الرَّح۪يمُ128
ऐ हमारे रब! हम दोनों को अपना आज्ञाकारी बना और हमारी संतान में से अपना एक आज्ञाकारी समुदाय बना; और हमें हमारे इबादत के तरीक़े बता और हमारी तौबा क़बूल कर। निस्संदेह तू तौबा क़बूल करनेवाला, अत्यन्त दयावान है
رَبَّنَا وَابْعَثْ ف۪يهِمْ رَسُولًا مِنْهُمْ يَتْلُوا عَلَيْهِمْ اٰيَاتِكَ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُزَكّ۪يهِمْۜ اِنَّكَ اَنْتَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ۟129
ऐ हमारे रब! उनमें उन्हीं में से एक ऐसा रसूल उठा जो उन्हें तेरी आयतें सुनाए और उनको किताब और तत्वदर्शिता की शिक्षा दे और उन (की आत्मा) को विकसित करे। निस्संदेह तू प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَمَنْ يَرْغَبُ عَنْ مِلَّةِ اِبْرٰه۪يمَ اِلَّا مَنْ سَفِهَ نَفْسَهُۜ وَلَقَدِ اصْطَفَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَاۚ وَاِنَّهُ فِي الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِح۪ينَ130
कौन है जो इबराहीम के पंथ से मुँह मोड़े सिवाय उसके जिसने स्वयं को पतित कर लिया? और उसे तो हमने दुनिया में चुन लिया था और निस्संदेह आख़िरत में उसकी गणना योग्य लोगों में होगी
اِذْ قَالَ لَهُ رَبُّهُٓ اَسْلِمْۙ قَالَ اَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعَالَم۪ينَ131
क्योंकि जब उससे रब ने कहा, "मुस्लिम (आज्ञाकारी) हो जा।" उसने कहा, "मैं सारे संसार के रब का मुस्लिम हो गया।"
وَوَصّٰى بِهَٓا اِبْرٰه۪يمُ بَن۪يهِ وَيَعْقُوبُۜ يَا بَنِيَّ اِنَّ اللّٰهَ اصْطَفٰى لَكُمُ الدّ۪ينَ فَلَا تَمُوتُنَّ اِلَّا وَاَنْتُمْ مُسْلِمُونَۜ132
और इसी की वसीयत इबराहीम ने अपने बेटों को की और याक़ूब ने भी (अपनी सन्तानों को की) कि, "ऐ मेरे बेटों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए यही दीन (धर्म) चुना है, तो इस्लाम (ईश-आज्ञापालन) को अतिरिक्त किसी और दशा में तुम्हारी मृत्यु न हो।"
اَمْ كُنْتُمْ شُهَدَٓاءَ اِذْ حَضَرَ يَعْقُوبَ الْمَوْتُۙ اِذْ قَالَ لِبَن۪يهِ مَا تَعْبُدُونَ مِنْ بَعْد۪يۜ قَالُوا نَعْبُدُ اِلٰهَكَ وَاِلٰهَ اٰبَٓائِكَ اِبْرٰه۪يمَ وَاِسْمٰع۪يلَ وَاِسْحٰقَ اِلٰهًا وَاحِدًاۚ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ133
(क्या तुम इबराहीम के वसीयत करते समय मौजूद थे? या तुम मौजूद थे जब याक़ूब की मृत्यु का समय आया? जब उसने बेटों से कहा, "तुम मेरे पश्चात किसकी इबादत करोगे?" उन्होंने कहा, "हम आपके इष्ट-पूज्य और आपके पूर्वज इबराहीम और इसमाईल और इसहाक़ के इष्ट-पूज्य की बन्दगी करेंगे - जो अकेला इष्ट-पूज्य है, और हम उसी के आज्ञाकारी (मुस्लिम) हैं।"
تِلْكَ اُمَّةٌ قَدْ خَلَتْۚ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُمْ مَا كَسَبْتُمْۚ وَلَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ134
वह एक गिरोह था जो गुज़र चुका, जो कुछ उसने कमाया वह उसका है, और जो कुछ तुमने कमाया वह तुम्हारा है। और जो कुछ वे करते रहे उसके विषय में तुमसे कोई पूछताछ न की जाएगी