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201. पृष्ठ
9 · अत-तौबा
رَضُوا بِاَنْ يَكُونُوا مَعَ الْخَوَالِفِ وَطُبِعَ عَلٰى قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَ87
वे इसी पर राज़ी हुए कि पीछे रह जानेवाली स्त्रियों के साथ रह जाएँ और उनके दिलों पर तो मुहर लग गई है, अतः वे समझते नहीं
لٰكِنِ الرَّسُولُ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُ جَاهَدُوا بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْۜ وَاُو۬لٰٓئِكَ لَهُمُ الْخَيْرَاتُۘ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ88
किन्तु, रसूल और उसके ईमानवाले साथियों ने अपने मालों और अपनी जानों के साथ जिहाद किया, और वही लोग है जिनके लिए भलाइयाँ है और वही लोग है जो सफल है
اَعَدَّ اللّٰهُ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ ذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ۟89
अल्लाह ने उनके लिए ऐसे बाग़ तैयार कर रखे हैं, जिनके नीचे नहरें बह रह हैं, वे उनमें सदैव रहेंगे। यही बड़ी सफलता है
وَجَٓاءَ الْمُعَذِّرُونَ مِنَ الْاَعْرَابِ لِيُؤْذَنَ لَهُمْ وَقَعَدَ الَّذ۪ينَ كَذَبُوا اللّٰهَ وَرَسُولَهُۜ سَيُص۪يبُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ90
बहाने करनेवाले बद्दूल भी आए कि उन्हें (बैठे रहने की) छुट्टी मिल जाए। और जो अल्लाह और उसके रसूल से झूठ बोले वे भी बैठे रहे। उनमें से जिन्होंने इनकार किया उन्हें शीघ्र ही एक दुखद यातना पहुँचकर रहेगी
لَيْسَ عَلَى الضُّعَفَٓاءِ وَلَا عَلَى الْمَرْضٰى وَلَا عَلَى الَّذ۪ينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنْفِقُونَ حَرَجٌ اِذَا نَصَحُوا لِلّٰهِ وَرَسُولِه۪ۜ مَا عَلَى الْمُحْسِن۪ينَ مِنْ سَب۪يلٍۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌۙ91
न तो कमज़ोरों के लिए कोई दोष की बात है और न बीमारों के लिए और न उन लोगों के लिए जिन्हें ख़र्च करने के लिए कुछ प्राप्त नहीं, जबकि वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों। उत्तमकारों पर इलज़ाम की कोई गुंजाइश नहीं है। अल्लाह तो बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَلَا عَلَى الَّذ۪ينَ اِذَا مَٓا اَتَوْكَ لِتَحْمِلَهُمْ قُلْتَ لَٓا اَجِدُ مَٓا اَحْمِلُكُمْ عَلَيْهِۖ تَوَلَّوْا وَاَعْيُنُهُمْ تَف۪يضُ مِنَ الدَّمْعِ حَزَنًا اَلَّا يَجِدُوا مَا يُنْفِقُونَۜ92
और न उन लोगों पर आक्षेप करने की कोई गुंजाइश है जिनका हाल यह है कि जब वे तुम्हारे पास आते है, कि तुम उनके लिए सवारी का प्रबन्ध कर दो, तुम कहते हो, "मुझे ऐसा कुछ प्राप्त नहीं जिसपर तुम्हें सवार करूँ।" वे इस दशा में लौटते है कि इस ग़म में उनकी आँखे आँसू बहा रही होती है कि वे अपने पास ख़र्च करने को कुछ नहीं पाते
اِنَّمَا السَّب۪يلُ عَلَى الَّذ۪ينَ يَسْتَاْذِنُونَكَ وَهُمْ اَغْنِيَٓاءُۚ رَضُوا بِاَنْ يَكُونُوا مَعَ الْخَوَالِفِۙ وَطَبَعَ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ93
इल्ज़ाम तो बस उनपर है जो धनवान होते हुए तुमसे छुट्टी माँगते है। वे इसपर राज़ी हुए कि पीछे डाले गए लोगों के साथ रह जाएँ। अल्लाह ने तो उनके दिलों पर मुहर लगा दी है, इसलिए वे जानते नहीं