202. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
9 · अत-तौबा
يَعْتَذِرُونَ اِلَيْكُمْ اِذَا رَجَعْتُمْ اِلَيْهِمْۜ قُلْ لَا تَعْتَذِرُوا لَنْ نُؤْمِنَ لَكُمْ قَدْ نَبَّاَنَا اللّٰهُ مِنْ اَخْبَارِكُمْۜ وَسَيَرَى اللّٰهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ ثُمَّ تُرَدُّونَ اِلٰى عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ94
जब तुम पलटकर उनके पास पहुँचोगे तो वे तुम्हारे सामने बहाने करेंगे। तुम कह देना, "बहाने न बनाओ। हम तु्म्हारी बात कदापि नहीं मानेंगे। हमें अल्लाह ने तुम्हारे वृत्तांत बता दिए है। अभी अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारे काम को देखेगा, फिर तुम उसकी ओर लौटोगे, जो छिपे और खुले का ज्ञान रखता है। फिर जो कुछ तुम करते रहे हो वह तुम्हे बता देगा।"
سَيَحْلِفُونَ بِاللّٰهِ لَكُمْ اِذَا انْقَلَبْتُمْ اِلَيْهِمْ لِتُعْرِضُوا عَنْهُمْۜ فَاَعْرِضُوا عَنْهُمْۜ اِنَّهُمْ رِجْسٌۘ وَمَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُۚ جَزَٓاءً بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ95
जब तुम पलटकर उनके पास जाओगे तो वे तुम्हारे सामने अल्लाह की क़समें खाएँगे, ताकि तुम उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दो। तो तुम उन्हें छोड़ ही दो। निश्चय ही वे गन्दगी है और उनका ठिकाना जहन्नम है। जो कुछ वे कमाते रहे है, यह उसी का बदला है
يَحْلِفُونَ لَكُمْ لِتَرْضَوْا عَنْهُمْۚ فَاِنْ تَرْضَوْا عَنْهُمْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يَرْضٰى عَنِ الْقَوْمِ الْفَاسِق۪ينَ96
वे तुम्हारे सामने क़समें खाएँगे ताकि तुम उनसे राज़ी हो जाओ, किन्तु यदि तुम उनसे राज़ी भी हो गए तो अल्लाह ऐसे लोगो से कदापि राज़ी न होगा, जो अवज्ञाकारी है
اَلْاَعْرَابُ اَشَدُّ كُفْرًا وَنِفَاقًا وَاَجْدَرُ اَلَّا يَعْلَمُوا حُدُودَ مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ عَلٰى رَسُولِه۪ۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ97
वे बद्दूग इनकार और कपटाचार में बहुत-ही बढ़े हुए है। और इसी के ज़्यादा योग्य है कि उनकी सीमाओं से अनभिज्ञ रहें, जिसे अल्लाह ने अपने रसूल पर अवतरित किया है। अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है
وَمِنَ الْاَعْرَابِ مَنْ يَتَّخِذُ مَا يُنْفِقُ مَغْرَمًا وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ الدَّوَٓائِرَۜ عَلَيْهِمْ دَٓائِرَةُ السَّوْءِۜ وَاللّٰهُ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ98
और कुछ बद्दूज ऐसे है कि वे जो कुछ ख़र्च करते है, उसे तावान समझते है और तुम्हारे हक़ मं बुरी गर्दिशों (बुरे दिन) की प्रतीक्षा में हैं, बुरी गर्दिश में तो वही है। अल्लाह सब कुछ सुनता, जानता है
وَمِنَ الْاَعْرَابِ مَنْ يُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَيَتَّخِذُ مَا يُنْفِقُ قُرُبَاتٍ عِنْدَ اللّٰهِ وَصَلَوَاتِ الرَّسُولِۜ اَلَٓا اِنَّهَا قُرْبَةٌ لَهُمْۜ سَيُدْخِلُهُمُ اللّٰهُ ف۪ي رَحْمَتِه۪ۜ اِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ۟99
और बद्दु,ओं में ऐसे भी लोग है जो अल्लाह और अन्तिम दिन को मानते है और जो कुछ ख़र्च करते है, उसे अल्लाह के यहाँ निकटताओं का और रसूल की दुआओं को प्राप्त करने का साधन बनाते है। हाँ! निस्संदेह वह उनके हक़ में निकटता ही है। अल्लाह उन्हें शीघ्र ही अपनी दयालुता में दाख़िल करेगा। निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है