204. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
9 · अत-तौबा
وَالَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مَسْجِدًا ضِرَارًا وَكُفْرًا وَتَفْر۪يقًا بَيْنَ الْمُؤْمِن۪ينَ وَاِرْصَادًا لِمَنْ حَارَبَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ مِنْ قَبْلُۜ وَلَيَحْلِفُنَّ اِنْ اَرَدْنَٓا اِلَّا الْحُسْنٰىۜ وَاللّٰهُ يَشْهَدُ اِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ107
और कुछ ऐसे लोग भी हैं , जिन्होंने मस्जिद बनाई इसलिए कि नुक़सान पहुँचाएँ और कुफ़्र करें और इसलिए कि ईमानवालों के बीच फूट डाले और उस व्यक्ति के घात लगाने का ठिकाना बनाएँ, जो इससे पहले अल्लाह और उसके रसूल से लड़ चुका है। वे निश्चय ही क़समें खाएँगे कि "हमने तो बस अच्छा ही चाहा था।" किन्तु अल्लाह गवाही देता है कि वे बिलकुल झूठे है
لَا تَقُمْ ف۪يهِ اَبَدًاۜ لَمَسْجِدٌ اُسِّسَ عَلَى التَّقْوٰى مِنْ اَوَّلِ يَوْمٍ اَحَقُّ اَنْ تَقُومَ ف۪يهِۜ ف۪يهِ رِجَالٌ يُحِبُّونَ اَنْ يَتَطَهَّرُواۜ وَاللّٰهُ يُحِبُّ الْمُطَّهِّر۪ينَ108
तुम कभी भी उसमें खड़े न होना। वह मस्जिद जिसकी आधारशिला पहले दिन ही से ईशपरायणता पर रखी गई है, वह इसकी ज़्यादा हक़दार है कि तुम उसमें खड़े हो। उसमें ऐसे लोग पाए जाते हैं, जो अच्छी तरह स्वच्छ रहना पसन्द करते है, और अल्लाह भी पाक-साफ़ रहनेवालों को पसन्द करता है
اَفَمَنْ اَسَّسَ بُنْيَانَهُ عَلٰى تَقْوٰى مِنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانٍ خَيْرٌ اَمْ مَنْ اَسَّسَ بُنْيَانَهُ عَلٰى شَفَا جُرُفٍ هَارٍ فَانْهَارَ بِه۪ ف۪ي نَارِ جَهَنَّمَۜ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَ109
फिर क्या वह अच्छा है जिसने अपने भवन की आधारशिला अल्लाह के भय और उसकी ख़ुशी पर रखी है या वह, जिसने अपने भवन की आधारशिला किसी खाई के खोखले कगार पर रखी, जो गिरने को है। फिर वह उसे लेकर जहन्नम की आग में जा गिरा? अल्लाह तो अत्याचारी लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता
لَا يَزَالُ بُنْيَانُهُمُ الَّذ۪ي بَنَوْا ر۪يبَةً ف۪ي قُلُوبِهِمْ اِلَّٓا اَنْ تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمْۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ۟110
उनका यह भवन जो उन्होंने बनाया है, सदैव उनके दिलों में खटक बनकर रहेगा। हाँ, यदि उनके दिल ही टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ तो दूसरी बात है। अल्लाह तो सब कुछ जाननेवाला, अत्यन्त तत्वदर्शी है
اِنَّ اللّٰهَ اشْتَرٰى مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ اَنْفُسَهُمْ وَاَمْوَالَهُمْ بِاَنَّ لَهُمُ الْجَنَّةَۜ يُقَاتِلُونَ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ فَيَقْتُلُونَ وَيُقْتَلُونَ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا فِي التَّوْرٰيةِ وَالْاِنْج۪يلِ وَالْقُرْاٰنِۜ وَمَنْ اَوْفٰى بِعَهْدِه۪ مِنَ اللّٰهِ فَاسْتَبْشِرُوا بِبَيْعِكُمُ الَّذ۪ي بَايَعْتُمْ بِه۪ۜ وَذٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ111
निस्संदेह अल्लाह ने ईमानवालों से उनके प्राण और उनके माल इसके बदले में खरीद लिए है कि उनके लिए जन्नत है। वे अल्लाह के मार्ग में लड़ते है, तो वे मारते भी है और मारे भी जाते है। यह उनके ज़िम्मे तौरात, इनजील और क़ुरआन में (किया गया) एक पक्का वादा है। और अल्लाह से बढ़कर अपने वादे को पूरा करनेवाला हो भी कौन सकता है? अतः अपने उस सौदे पर खु़शियाँ मनाओ, जो सौदा तुमने उससे किया है। और यही सबसे बड़ी सफलता है