209. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يَرْجُونَ لِقَٓاءَنَا وَرَضُوا بِالْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَاطْمَاَنُّوا بِهَا وَالَّذ۪ينَ هُمْ عَنْ اٰيَاتِنَا غَافِلُونَۙ7
रहे वे लोग जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते और सांसारिक जीवन ही पर निहाल हो गए है और उसी पर संतुष्ट हो बैठे, और जो हमारी निशानियों की ओर से असावधान है;
اُو۬لٰٓئِكَ مَاْوٰيهُمُ النَّارُ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ8
ऐसे लोगों का ठिकाना आग है, उसके बदले में जो वे कमाते रहे
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ يَهْد۪يهِمْ رَبُّهُمْ بِا۪يمَانِهِمْۚ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهِمُ الْاَنْهَارُ ف۪ي جَنَّاتِ النَّع۪يمِ9
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनका रब उनके ईमान के कारण उनका मार्गदर्शन करेगा। उनके नेमत भरी जन्नतों में नहरें बह रही होगी
دَعْوٰيهُمْ ف۪يهَا سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَتَحِيَّتُهُمْ ف۪يهَا سَلَامٌۚ وَاٰخِرُ دَعْوٰيهُمْ اَنِ الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ۟10
वहाँ उनकी पुकार यह होगी कि "महिमा है तेरी, ऐ अल्लाह!" और उनका पारस्परिक अभिवादन "सलाम" होगा। और उनकी पुकार का अन्त इसपर होगा कि "प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो सारे संसार का रब है।"
وَلَوْ يُعَجِّلُ اللّٰهُ لِلنَّاسِ الشَّرَّ اسْتِعْجَالَهُمْ بِالْخَيْرِ لَقُضِيَ اِلَيْهِمْ اَجَلُهُمْۜ فَنَذَرُ الَّذ۪ينَ لَا يَرْجُونَ لِقَٓاءَنَا ف۪ي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ11
यदि अल्लाह लोगों के लिए उनके जल्दी मचाने के कारण भलाई की जगह बुराई को शीघ्र घटित कर दे तो उनकी ओर उनकी अवधि पूरी कर दी जाए, किन्तु हम उन लोगों को जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते उनकी अपनी सरकशी में भटकने के लिए छोड़ देते है
وَاِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ الضُّرُّ دَعَانَا لِجَنْبِه۪ٓ اَوْ قَاعِدًا اَوْ قَٓائِمًاۚ فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُ ضُرَّهُ مَرَّ كَاَنْ لَمْ يَدْعُنَٓا اِلٰى ضُرٍّ مَسَّهُۜ كَذٰلِكَ زُيِّنَ لِلْمُسْرِف۪ينَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ12
मनुष्य को जब कोई तकलीफ़ पहुँचती है, वह लेटे या बैठे या खड़े हमको पुकारने लग जाता है। किन्तु जब हम उसकी तकलीफ़ उससे दूर कर देते है तो वह इस तरह चल देता है मानो कभी कोई तकलीफ़ पहुँचने पर उसने हमें पुकारा ही न था। इसी प्रकार मर्यादाहीन लोगों के लिए जो कुछ वे कर रहे है सुहावना बना दिया गया है
وَلَقَدْ اَهْلَكْنَا الْقُرُونَ مِنْ قَبْلِكُمْ لَمَّا ظَلَمُواۙ وَجَٓاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ وَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُواۜ كَذٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِم۪ينَ13
तुमसे पहले कितनी ही नस्लों को, जब उन्होंने अत्याचार किया, हम विनष्ट कर चुके है, हालाँकि उनके रसूल उनके पास खुली निशानियाँ लेकर आए थे। किन्तु वे ऐसे न थे कि उन्हें मानते। अपराधी लोगों को हम इसी प्रकार बदला दिया करते है
ثُمَّ جَعَلْنَاكُمْ خَلَٓائِفَ فِي الْاَرْضِ مِنْ بَعْدِهِمْ لِنَنْظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَ14
फिर उनके पश्चात हमने धरती में उनकी जगह तुम्हें रखा, ताकि हम देखें कि तुम कैसे कर्म करते हो