210. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

210. पृष्ठ
10 · यूनुस
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍۙ قَالَ الَّذ۪ينَ لَا يَرْجُونَ لِقَٓاءَنَا ائْتِ بِقُرْاٰنٍ غَيْرِ هٰذَٓا اَوْ بَدِّلْهُۜ قُلْ مَا يَكُونُ ل۪ٓي اَنْ اُبَدِّلَهُ مِنْ تِلْقَٓائِ۬ نَفْس۪يۚ اِنْ اَتَّبِعُ اِلَّا مَا يُوحٰٓى اِلَيَّۚ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اِنْ عَصَيْتُ رَبّ۪ي عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ15
और जब उनके सामने हमारी खुली हुई आयतें पढ़ी जाती है तो वे लोग, जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, कहते है, "इसके सिवा कोई और क़ुरआन ले आओ या इसमें कुछ परिवर्तन करो।" कह दो, "मुझसे यह नहीं हो सकता कि मैं अपनी ओर से इसमें कोई परिवर्तन करूँ। मैं तो बस उसका अनुपालन करता हूँ, जो प्रकाशना मेरी ओर अवतरित की जाती है। यदि मैं अपने प्रभु की अवज्ञा करँस तो इसमें मुझे एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
قُلْ لَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَا تَلَوْتُهُ عَلَيْكُمْ وَلَٓا اَدْرٰيكُمْ بِه۪ۘ فَقَدْ لَبِثْتُ ف۪يكُمْ عُمُرًا مِنْ قَبْلِه۪ۜ اَفَلَا تَعْقِلُونَ16
कह दो, "यदि अल्लाह चाहता तो मैं तुम्हें यह पढ़कर न सुनाता और न वह तुम्हें इससे अवगत कराता। आख़िर इससे पहले मैं तुम्हारे बीच जीवन की पूरी अवधि व्यतीत कर चुका हूँ। फिर क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?"
فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا اَوْ كَذَّبَ بِاٰيَاتِه۪ۜ اِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْمُجْرِمُونَ17
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जो अल्लाह पर थोपकर झूठ घड़े या उसकी आयतों को झुठलाए? निस्संदेह अपराधी कभी सफल नहीं होते
وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنْفَعُهُمْ وَيَقُولُونَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ شُفَعَٓاؤُ۬نَا عِنْدَ اللّٰهِۜ قُلْ اَتُنَبِّؤُ۫نَ اللّٰهَ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِي السَّمٰوَاتِ وَلَا فِي الْاَرْضِۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ18
वे लोग अल्लाह से हटकर उनको पूजते हैं, जो न उनका कुछ बिगाड़ सकें और न उनका कुछ भला कर सकें। और वे कहते है, "ये अल्लाह के यहाँ हमारे सिफ़ारिशी है।" कह दो, "क्या तुम अल्लाह को उसकी ख़बर देनेवाले? हो, जिसका अस्तित्व न उसे आकाशों में ज्ञात है न धरती में" महिमावान है वह और उसकी उच्चता के प्रतिकूल है वह शिर्क, जो वे कर रहे है
وَمَا كَانَ النَّاسُ اِلَّٓا اُمَّةً وَاحِدَةً فَاخْتَلَفُواۜ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ف۪يمَا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ19
सारे मनुष्य एक ही समुदाय थे। वे तो स्वयं अलग-अलग हो रहे। और यदि तेरे रब की ओर से पहले ही एक बात निश्चित न हो गई होती, तो उनके बीच का फ़ैसला कर दिया जाता जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं
وَيَقُولُونَ لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْهِ اٰيَةٌ مِنْ رَبِّه۪ۚ فَقُلْ اِنَّمَا الْغَيْبُ لِلّٰهِ فَانْتَظِرُواۚ اِنّ۪ي مَعَكُمْ مِنَ الْمُنْتَظِر۪ينَ۟20
वे कहते है, "उस पर उनके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी?" तो कह दो, "परोक्ष तो अल्लाह ही से सम्बन्ध रखता है। अच्छा, प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।"