211. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
وَاِذَٓا اَذَقْنَا النَّاسَ رَحْمَةً مِنْ بَعْدِ ضَرَّٓاءَ مَسَّتْهُمْ اِذَا لَهُمْ مَكْرٌ ف۪ٓي اٰيَاتِنَاۜ قُلِ اللّٰهُ اَسْرَعُ مَكْرًاۜ اِنَّ رُسُلَنَا يَكْتُبُونَ مَا تَمْكُرُونَ21
जब हम लोगों को उनके किसी तकलीफ़ में पड़ने के पश्चात दयालुता का रसास्वादन कराते है तो वे हमारी आयतों के विषय में चालबाज़ियाँ करने लग जाते है। कह दो, "अल्लाह की चाल ज़्यादा तेज़ है।" निस्संदेह, जो चालबाजियाँ तुम कर रहे हो, हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) उनको लिखते जा रहे है
هُوَ الَّذ۪ي يُسَيِّرُكُمْ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِۜ حَتّٰٓى اِذَا كُنْتُمْ فِي الْفُلْكِۚ وَجَرَيْنَ بِهِمْ بِر۪يحٍ طَيِّبَةٍ وَفَرِحُوا بِهَا جَٓاءَتْهَا ر۪يحٌ عَاصِفٌ وَجَٓاءَهُمُ الْمَوْجُ مِنْ كُلِّ مَكَانٍ وَظَنُّٓوا اَنَّهُمْ اُح۪يطَ بِهِمْۙ دَعَوُا اللّٰهَ مُخْلِص۪ينَ لَهُ الدّ۪ينَۚ لَئِنْ اَنْجَيْتَنَا مِنْ هٰذِه۪ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ22
वही है जो तुम्हें थल और जल में चलाता है, यहाँ तक कि जब तुम नौका में होते हो और वह लोगो को लिए हुए अच्छी अनुकूल वायु के सहारे चलती है और वे उससे हर्षित होते है कि अकस्मात उनपर प्रचंड वायु का झोंका आता है, हर ओर से लहरें उनपर चली आती है और वे समझ लेते है कि बस अब वे घिर गए, उस समय वे अल्लाह ही को, निरी उसी पर आस्था रखकर पुकारने लगते है, "यदि तूने हमें इससे बचा लिया तो हम अवश्य आभारी होंगे।"
فَلَمَّٓا اَنْجٰيهُمْ اِذَا هُمْ يَبْغُونَ فِي الْاَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّۜ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اِنَّمَا بَغْيُكُمْ عَلٰٓى اَنْفُسِكُمْۙ مَتَاعَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا ثُمَّ اِلَيْنَا مَرْجِعُكُمْ فَنُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ23
फिर जब वह उनको बचा लेता है, तो क्या देखते है कि वे नाहक़ धरती में सरकशी करने लग जाते है। ऐ लोगों! तुम्हारी सरकशी तुम्हारे अपने ही विरुद्ध है। सांसारिक जीवन का सुख ले लो। फिर तुम्हें हमारी ही ओर लौटकर आना है। फिर हम तुम्हें बता देंगे जो कुछ तुम करते रहे होगे
اِنَّمَا مَثَلُ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا كَمَٓاءٍ اَنْزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَٓاءِ فَاخْتَلَطَ بِه۪ نَبَاتُ الْاَرْضِ مِمَّا يَاْكُلُ النَّاسُ وَالْاَنْعَامُۜ حَتّٰٓى اِذَٓا اَخَذَتِ الْاَرْضُ زُخْرُفَهَا وَازَّيَّنَتْ وَظَنَّ اَهْلُهَٓا اَنَّهُمْ قَادِرُونَ عَلَيْهَٓاۙ اَتٰيهَٓا اَمْرُنَا لَيْلًا اَوْ نَهَارًا فَجَعَلْنَاهَا حَص۪يدًا كَاَنْ لَمْ تَغْنَ بِالْاَمْسِۜ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ24
सांसारिक जीवन की उपमा तो बस ऐसी है जैसे हमने आकाश से पानी बरसाया, तो उसके कारण धरती से उगनेवाली चीज़े, जिनको मनुष्य और चौपाये सभी खाते है, घनी हो गई, यहाँ तक कि धरती ने अपना शृंगार कर लिया और सँवर गई और उसके मालिक समझने लगे कि उन्हें उसपर पूरा अधिकार प्राप्त है कि रात या दिन में हमारा आदेश आ पहुँचा। फिर हमने उसे कटी फ़सल की तरह कर दिया, मानो कल वहाँ कोई आबादी ही न थी। इसी तरह हम उन लोगों के लिए खोल-खोलकर निशानियाँ बयान करते है, जो सोच-विचार से काम लेना चाहें
وَاللّٰهُ يَدْعُٓوا اِلٰى دَارِ السَّلَامِۜ وَيَهْد۪ي مَنْ يَشَٓاءُ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ25
और अल्लाह तुम्हें सलामती के घर की ओर बुलाता है, और जिसे चाहता है सीधी राह चलाता है;