212. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

212. पृष्ठ
10 · यूनुस
لِلَّذ۪ينَ اَحْسَنُوا الْحُسْنٰى وَزِيَادَةٌۜ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌۜ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ26
अच्छे से अच्छा कर्म करनेवालों के लिए अच्छा बदला है और इसके अतिरिक्त और भी। और उनके चहरों पर न तो कलौस छाएगी और न ज़िल्लत। वही जन्नतवाले है; वे उसमें सदैव रहेंगे
وَالَّذ۪ينَ كَسَبُوا السَّيِّـَٔاتِ جَزَٓاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَاۙ وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌۜ مَا لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ مِنْ عَاصِمٍۚ كَاَنَّمَٓا اُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِنَ الَّيْلِ مُظْلِمًاۜ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ27
रहे वे लोग जिन्होंने बुराइयाँ कमाई, तो एक बुराई का बदला भी उसी जैसा होगा; और ज़िल्लत उनपर छा रही होगी। उन्हें अल्लाह से बचानेवाला कोई न होगा। उनके चहरों पर मानो अँधेरी रात के टुकड़े ओढ़ा दिए गए हों। वही आगवाले हैं, उन्हें उसमें सदैव रहना है
وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَم۪يعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ اَنْتُمْ وَشُرَكَٓاؤُ۬كُمْۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ وَقَالَ شُرَكَٓاؤُ۬هُمْ مَا كُنْتُمْ اِيَّانَا تَعْبُدُونَ28
और जिस दिन हम उन सबको इकट्ठा करेंगे, फिर उन लोगों से, जिन्होंने शिर्क किया होगा, कहेंगे, "अपनी जगह ठहरे रहो तुम भी और तुम्हारे साझीदार भी।" फिर हम उनके बीच अलगाव पैदा कर देंगे, और उनके ठहराए हुए साझीदार कहेंगे, "तुम हमारी तो हमारी बन्दगी नहीं करते थे
فَكَفٰى بِاللّٰهِ شَه۪يدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ اِنْ كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِل۪ينَ29
"हमारे और तुम्हारे बीच अल्लाह ही एक गवाह काफ़ी है। हमें तो तुम्हारी बन्दगी की ख़बर तक न थी।"
هُنَالِكَ تَبْلُوا كُلُّ نَفْسٍ مَٓا اَسْلَفَتْ وَرُدُّٓوا اِلَى اللّٰهِ مَوْلٰيهُمُ الْحَقِّ وَضَلَّ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَفْتَرُونَ۟30
वहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपने पहले के किए हुए कर्मों को स्वयं जाँच लेगा और वह अल्लाह, अपने वास्तविक स्वामी की ओर फिरेंगे और जो कुछ झूठ वे घड़ते रहे थे, वह सब उनसे गुम होकर रह जाएगा
قُلْ مَنْ يَرْزُقُكُمْ مِنَ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِ اَمَّنْ يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْاَبْصَارَ وَمَنْ يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَنْ يُدَبِّرُ الْاَمْرَۜ فَسَيَقُولُونَ اللّٰهُۚ فَقُلْ اَفَلَا تَتَّقُونَ31
कहो, "तुम्हें आकाश और धरती से रोज़ी कौन देता है, या ये कान और आँखें किसके अधिकार में है और कौन जीवन्त को निर्जीव से निकालता है और निर्जीव को जीवन्त से निकालता है और कौन यह सारा इन्तिज़ाम चला रहा है?" इसपर वे बोल पड़ेगे, "अल्लाह!" तो कहो, "फिर आख़िर तुम क्यों नहीं डर रखते?"
فَذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمُ الْحَقُّۚ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ اِلَّا الضَّلَالُۚ فَاَنّٰى تُصْرَفُونَ32
फिर यही अल्लाह तो है तुम्हारा वास्तविक रब। फिर आख़िर सत्य के पश्चात पथभ्रष्टता के अतिरिक्त और क्या रह जाता है? फिर तुम कहाँ से फिरे जाते हो?
كَذٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذ۪ينَ فَسَقُٓوا اَنَّهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ33
इसी तरह अवज्ञाकारी लोगों के प्रति तुम्हारे रब की बात सच्ची होकर रही कि वे मानेंगे नहीं