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214. पृष्ठ
10 · यूनुस
وَمِنْهُمْ مَنْ يَنْظُرُ اِلَيْكَۜ اَفَاَنْتَ تَهْدِي الْعُمْيَ وَلَوْ كَانُوا لَا يُبْصِرُونَ43
और कुछ उनमें ऐसे हैं, जो तेरी ओर ताकते हैं, किन्तु क्या तू अंधों का मार्ग दिखाएगा, चाहे उन्हें कुछ सूझता न हो?
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَظْلِمُ النَّاسَ شَيْـًٔا وَلٰكِنَّ النَّاسَ اَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ44
अल्लाह तो लोगों पर तनिक भी अत्याचार नहीं करता, किन्तु लोग स्वयं ही अपने ऊपर अत्याचार करते है
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ كَاَنْ لَمْ يَلْبَثُٓوا اِلَّا سَاعَةً مِنَ النَّهَارِ يَتَعَارَفُونَ بَيْنَهُمْۜ قَدْ خَسِرَ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِلِقَٓاءِ اللّٰهِ وَمَا كَانُوا مُهْتَد۪ينَ45
जिस दिन वह उनको इकट्ठा करेगा तो ऐसा जान पड़ेगा जैसे वे दिन की एक घड़ी भर ठहरे थे। वे परस्पर एक-दूसरे को पहचानेंगे। वे लोग घाटे में पड़ गए, जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठलाया और वे मार्ग न पा सके
وَاِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذ۪ي نَعِدُهُمْ اَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَاِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ اللّٰهُ شَه۪يدٌ عَلٰى مَا يَفْعَلُونَ46
जिस चीज़ का हम उनसे वादा करते है उसमें से कुछ चाहे तुझे दिखा दें या हम तुझे (इससे पहले) उठा लें, उन्हें तो हमारी ओर लौटकर आना ही है। फिर जो कुछ वे कर रहे है उसपर अल्लाह गवाह है
وَلِكُلِّ اُمَّةٍ رَسُولٌۚ فَاِذَا جَٓاءَ رَسُولُهُمْ قُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْقِسْطِ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ47
प्रत्येक समुदाय के लिए एक रसूल है। फिर जब उनके पास उनका रसूल आ जाता है तो उनके बीच न्यायपूर्वक फ़ैसला कर दिया जाता है। उनपर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाता
وَيَقُولُونَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ48
वे कहते है, "यदि तुम सच्चे हो तो यह वादा कब पूरा होगा?"
قُلْ لَٓا اَمْلِكُ لِنَفْس۪ي ضَرًّا وَلَا نَفْعًا اِلَّا مَا شَٓاءَ اللّٰهُۜ لِكُلِّ اُمَّةٍ اَجَلٌۜ اِذَا جَٓاءَ اَجَلُهُمْ فَلَا يَسْتَاْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ49
कहो, "मुझे अपने लिए न तो किसी हानि का अधिकार प्राप्त है और न लाभ का, बल्कि अल्लाह जो चाहता है वही होता है। हर समुदाय के लिए एक नियत समय है, जब उनका नियत समय आ जाता है तो वे न घड़ी भर पीछे हट सकते है और न आगे बढ़ सकते है।"
قُلْ اَرَاَيْتُمْ اِنْ اَتٰيكُمْ عَذَابُهُ بَيَاتًا اَوْ نَهَارًا مَاذَا يَسْتَعْجِلُ مِنْهُ الْمُجْرِمُونَ50
कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि तुमपर उसकी यातना रातों रात या दिन को आ जाए तो (क्या तुम उसे टाल सकोगे?) वह आख़िर कौन-सी चीज़ होगी जिसके लिए अपराधियों को जल्दी पड़ी हुई है?
اَثُمَّ اِذَا مَا وَقَعَ اٰمَنْتُمْ بِه۪ۜ آٰلْـٰٔنَ وَقَدْ كُنْتُمْ بِه۪ تَسْتَعْجِلُونَ51
क्या फिर जब वह घटित हो जाएगी तब तुम उसे मानोगे? - क्या अब! इसी के लिए तो तुम जल्दी मचा रहे थे!"
ثُمَّ ق۪يلَ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ الْخُلْدِۚ هَلْ تُجْزَوْنَ اِلَّا بِمَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ52
"फिर अत्याचारी लोगों से कहा जाएगा, "स्थायी यातना का मज़ा चख़ो! जो कुछ तुम कमाते रहे हो, उसके सिवा तुम्हें और क्या बदला दिया जा सकता है?"
وَيَسْتَنْبِؤُ۫نَكَ اَحَقٌّ هُوَۜ قُلْ ا۪ي وَرَبّ۪ٓي اِنَّهُ لَحَقٌّ وَمَٓا اَنْتُمْ بِمُعْجِز۪ينَ۟53
वे तुम से चाहते है कि उन्हें ख़बर दो कि "क्या वह वास्तव में सत्य है?" कह दो, "हाँ, मेरे रब की क़सम! वह बिल्कुल सत्य है और तुम क़ाबू से बाहर निकल जानेवाले नहीं हो।"