215. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
وَلَوْ اَنَّ لِكُلِّ نَفْسٍ ظَلَمَتْ مَا فِي الْاَرْضِ لَافْتَدَتْ بِه۪ۜ وَاَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَاَوُا الْعَذَابَۚ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْقِسْطِ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ54
यदि प्रत्येक अत्याचारी व्यक्ति के पास वह सब कुछ हो जो धरती में है, तो वह अर्थदंड के रूप में उसे दे डाले। जब वे यातना को देखेंगे तो मन ही मन में पछताएँगे। उनके बीच न्यायपूर्वक फ़ैसला कर दिया जाएगा और उनपर कोई अत्याचार न होगा
اَلَٓا اِنَّ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ اَلَٓا اِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ55
सुन लो, जो कुछ आकाशों और धरती में है, अल्लाह ही का है। जान लो, निस्संदेह अल्लाह का वादा सच्चा है, किन्तु उनमें अधिकतर लोग जानते नहीं
هُوَ يُحْي۪ وَيُم۪يتُ وَاِلَيْهِ تُرْجَعُونَ56
वही जिलाता है और मारता है और उसी की ओर तुम लौटाए जा रहे हो
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَٓاءَتْكُمْ مَوْعِظَةٌ مِنْ رَبِّكُمْ وَشِفَٓاءٌ لِمَا فِي الصُّدُورِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِلْمُؤْمِن۪ينَ57
ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से उपदेश औऱ जो कुछ सीनों में (रोग) है, उसके लिए रोगमुक्ति और मोमिनों के लिए मार्गदर्शन और दयालुता आ चुकी है
قُلْ بِفَضْلِ اللّٰهِ وَبِرَحْمَتِه۪ فَبِذٰلِكَ فَلْيَفْرَحُواۜ هُوَ خَيْرٌ مِمَّا يَجْمَعُونَ58
कह दो, "यह अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया से है, अतः इस पर प्रसन्न होना चाहिए। यह उन सब चीज़ों से उत्तम है, जिनको वे इकट्ठा करने में लगे हुए है।"
قُلْ اَرَاَيْتُمْ مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ لَكُمْ مِنْ رِزْقٍ فَجَعَلْتُمْ مِنْهُ حَرَامًا وَحَلَالًاۜ قُلْ آٰللّٰهُ اَذِنَ لَكُمْ اَمْ عَلَى اللّٰهِ تَفْتَرُونَ59
कह दो, "क्या तुम लोगों ने यह भी देखा कि जो रोज़ी अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारी है उसमें से तुमने स्वयं ही कुछ को हराम और हलाल ठहरा लिया?" कहो, "क्या अल्लाह ने तुम्हें इसकी अनुमति दी है या तुम अल्लाह पर झूठ घड़कर थोप रहे हो?"
وَمَا ظَنُّ الَّذ۪ينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اِنَّ اللّٰهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ۟60
जो लोग झूठ घड़कर उसे अल्लाह पर थोंपते है, उन्होंने क़ियामत के दिन के विषय में क्या समझ रखा है? अल्लाह तो लोगों के लिए बड़ा अनुग्रहवाला है, किन्तु उनमें अधिकतर कृतज्ञता नहीं दिखलाते
وَمَا تَكُونُ ف۪ي شَاْنٍ وَمَا تَتْلُوا مِنْهُ مِنْ قُرْاٰنٍ وَلَا تَعْمَلُونَ مِنْ عَمَلٍ اِلَّا كُنَّا عَلَيْكُمْ شُهُودًا اِذْ تُف۪يضُونَ ف۪يهِۜ وَمَا يَعْزُبُ عَنْ رَبِّكَ مِنْ مِثْقَالِ ذَرَّةٍ فِي الْاَرْضِ وَلَا فِي السَّمَٓاءِ وَلَٓا اَصْغَرَ مِنْ ذٰلِكَ وَلَٓا اَكْبَرَ اِلَّا ف۪ي كِتَابٍ مُب۪ينٍ61
तुम जिस दशा में भी होते हो और क़ुरआन से जो कुछ भी पढ़ते हो और तुम लोग जो काम भी करते हो हम तुम्हें देख रहे होते है, जब तुम उसमें लगे होते हो। और तुम्हारे रब से कण भर भी कोई चीज़ छिपी नहीं है, न धरती में न आकाश में और न उससे छोटी और न बड़ी कोई त चीज़ ऐसी है जो एक स्पष्ट किताब में मौजूद न हो