216. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
اَلَٓا اِنَّ اَوْلِيَٓاءَ اللّٰهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۚ62
सुन लो, अल्लाह के मित्रों को न तो कोई डर है और न वे शोकाकुल ही होंगे
اَلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَۜ63
ये वे लोग है जो ईमान लाए और डर कर रहे
لَهُمُ الْبُشْرٰى فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَفِي الْاٰخِرَةِۜ لَا تَبْد۪يلَ لِكَلِمَاتِ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُۜ64
उनके लिए सांसारिक जीवन में भी शुभ-सूचना है और आख़िरत में भी - अल्लाह के शब्द बदलते नहीं - यही बड़ी सफलता है
وَلَا يَحْزُنْكَ قَوْلُهُمْۢ اِنَّ الْعِزَّةَ لِلّٰهِ جَم۪يعًاۜ هُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ65
उनकी बात तुम्हें दुखी न करे, सारा प्रभुत्व अल्लाह ही के लिए है, वह सुनता, जानता है
اَلَٓا اِنَّ لِلّٰهِ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَمَنْ فِي الْاَرْضِۜ وَمَا يَتَّبِعُ الَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ شُرَكَٓاءَۜ اِنْ يَتَّبِعُونَ اِلَّا الظَّنَّ وَاِنْ هُمْ اِلَّا يَخْرُصُونَ66
जान रखो! जो कोई भी आकाशों में है और जो कोई धरती में है, अल्लाह ही का है। जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरे साझीदारों को पुकारते है, वे आखिर किसका अनुसरण करते है? वे तो केवल अटकल पर चलते है और वे निरे अटकले दौड़ाते है
هُوَ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الَّيْلَ لِتَسْكُنُوا ف۪يهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَسْمَعُونَ67
वही है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ताकि तुम उसमें चैन पाओ और दिन को प्रकाशमान बनाया (ताकि तुम उसमें दौड़-धूप कर सको); निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है, जो सुनते है
قَالُوا اتَّخَذَ اللّٰهُ وَلَدًا سُبْحَانَهُۜ هُوَ الْغَنِيُّۜ لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ اِنْ عِنْدَكُمْ مِنْ سُلْطَانٍ بِهٰذَاۜ اَتَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ68
वे कहते है, "अल्लाह औलाद रखता है।" महान और उच्च है वह! वह निरपेक्ष है, आकाशों और धरती में जो कुछ है उसी का है। तुम्हारे पास इसका कोई प्रमाण नहीं। क्या तुम अल्लाह से जोड़कर वह बाते कहते हो, जिसका तुम्हे ज्ञान नही?
قُلْ اِنَّ الَّذ۪ينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَۜ69
कह दो, "जो लोग अल्लाह पर थोपकर झूठ घड़ते है, वे सफल नहीं होते।"
مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا ثُمَّ اِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذ۪يقُهُمُ الْعَذَابَ الشَّد۪يدَ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ۟70
यह तो सांसारिक सुख है। फिर हमारी ओर ही उन्हें लौटना है, फिर जो इनकार वे करते रहे होगे उसके बदले में हम उन्हें कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे