217. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَاَ نُوحٍۢ اِذْ قَالَ لِقَوْمِه۪ يَا قَوْمِ اِنْ كَانَ كَبُرَ عَلَيْكُمْ مَقَام۪ي وَتَذْك۪ير۪ي بِاٰيَاتِ اللّٰهِ فَعَلَى اللّٰهِ تَوَكَّلْتُ فَاَجْمِعُٓوا اَمْرَكُمْ وَشُرَكَٓاءَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُنْ اَمْرُكُمْ عَلَيْكُمْ غُمَّةً ثُمَّ اقْضُٓوا اِلَيَّ وَلَا تُنْظِرُونِ71
उन्हें नूह का वृत्तान्त सुनाओ। जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि मेरा खड़ा होना और अल्लाह की आयतों के द्वारा नसीहत करना तुम्हें भारी हो गया है तो मेरा भरोसा अल्लाह पर है। तु अपना मामला ठहरा लो और अपने ठहराए हुए साझीदारों को भी साथ ले लो, फिर तुम्हारा मामला तुम पर कुछ संदिग्ध न रहे; फिर मेरे साथ जो कुछ करना है, कर डालों और मुझे मुहलत न दो।"
فَاِنْ تَوَلَّيْتُمْ فَمَا سَاَلْتُكُمْ مِنْ اَجْرٍۜ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلَى اللّٰهِۙ وَاُمِرْتُ اَنْ اَكُونَ مِنَ الْمُسْلِم۪ينَ72
फिर यदि तुम मुँह फेरोगे तो मैंने तुमसे कोई बदला नहीं माँगा। मेरा बदला (पारिश्रामिक) बस अल्लाह के ज़िम्मे है, और आदेश मुझे मुस्लिम (आज्ञाकारी) होने का हुआ है
فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ وَجَعَلْنَاهُمْ خَلَٓائِفَ وَاَغْرَقْنَا الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَاۚ فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنْذَر۪ينَ73
किन्तु उन्होंने झूठला दिया, तो हमने उसे और उन लोगों को, जो उनके साथ नौका में थे, बचा लिया और उन्हें उतराधिकारी बनाया, और उन लोगो को डूबो दिया, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया था। अतः देख लो, जिन्हें सचेत किया गया था उनका क्या परिणाम हुआ!
ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِه۪ رُسُلًا اِلٰى قَوْمِهِمْ فَجَٓاؤُ۫هُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا بِه۪ مِنْ قَبْلُۜ كَذٰلِكَ نَطْبَعُ عَلٰى قُلُوبِ الْمُعْتَد۪ينَ74
फिर उसके बाद कितने ही रसूल हमने उनकी क़ौम की ओर भेजे और वे उनके पास स्पष्ट निशानियां लेकर आए, किन्तु वे ऐसे न थे कि जिसको पहले झुठला चुके हॊं, उसे मानते। इसी तरह अतिक्रमणकारियों कॆ दिलों पर हम मुहर लगा देते हैं
ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ مُوسٰى وَهٰرُونَ اِلٰى فِرْعَوْنَ وَمَلَا۬ئِه۪ بِاٰيَاتِنَا فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُجْرِم۪ينَ75
फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपनी आयतों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा। किन्तु उन्होंने घमंड किया, वे थे ही अपराधी लोग
فَلَمَّا جَٓاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِنْدِنَا قَالُٓوا اِنَّ هٰذَا لَسِحْرٌ مُب۪ينٌ76
अतः जब हमारी ओर से सत्य उनके सामने आया तो वे कहने लगे, "यह तो खुला जादू है।"
قَالَ مُوسٰٓى اَتَقُولُونَ لِلْحَقِّ لَمَّا جَٓاءَكُمْۜ اَسِحْرٌ هٰذَاۜ وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُونَ77
मूसा ने कहा, "क्या तुम सत्य के विषय में ऐसा कहते हो, जबकि यह तुम्हारे सामने आ गया है? क्या यह कोई जादू है? जादूगर तो सफल नहीं हुआ करते।"
قَالُٓوا اَجِئْتَنَا لِتَلْفِتَنَا عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ اٰبَٓاءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا الْكِبْرِيَٓاءُ فِي الْاَرْضِۜ وَمَا نَحْنُ لَكُمَا بِمُؤْمِن۪ينَ78
उन्होंने कहा, "क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें उस चीज़ से फेर दे जिसपर हमने अपना बाप-दादा का पाया है और धरती में तुम दोनों की बड़ाई स्थापित हो जाए? हम तो तुम्हें माननेवाले नहीं।"