218. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
وَقَالَ فِرْعَوْنُ ائْتُون۪ي بِكُلِّ سَاحِرٍ عَل۪يمٍ79
फ़िरऔन ने कहा, "हर कुशल जादूगर को मेरे पास लाओ।"
فَلَمَّا جَٓاءَ السَّحَرَةُ قَالَ لَهُمْ مُوسٰٓى اَلْقُوا مَٓا اَنْتُمْ مُلْقُونَ80
फिर जब जादूगर आ गए तो मूसा ने उनसे कहा, "जो कुछ तुम डालते हो, डालो।"
فَلَمَّٓا اَلْقَوْا قَالَ مُوسٰى مَا جِئْتُمْ بِهِ السِّحْرُۜ اِنَّ اللّٰهَ سَيُبْطِلُهُۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُصْلِحُ عَمَلَ الْمُفْسِد۪ينَ81
फिर जब उन्होंने डाला तो मूसा ने कहा, "तुम जो कुछ लाए हो, जादू है। अल्लाह अभी उसे मटियामेट किए देता है। निस्संदेह अल्लाह बिगाड़ पैदा करनेवालों के कर्म को फलीभूत नहीं होने देता
وَيُحِقُّ اللّٰهُ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِه۪ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ۟82
"अल्लाह अपने शब्दों से सत्य को सत्य कर दिखाता है, चाहे अपराधी नापसन्द ही करें।"
فَمَٓا اٰمَنَ لِمُوسٰٓى اِلَّا ذُرِّيَّةٌ مِنْ قَوْمِه۪ عَلٰى خَوْفٍ مِنْ فِرْعَوْنَ وَمَلَا۬ئِهِمْ اَنْ يَفْتِنَهُمْۜ وَاِنَّ فِرْعَوْنَ لَعَالٍ فِي الْاَرْضِۚ وَاِنَّهُ لَمِنَ الْمُسْرِف۪ينَ83
फिर मूसा की बात उसकी क़ौम की संतति में से बस कुछ ही लोगों ने मानी; फ़िरऔन और उनके सरदारों के भय से कि कहीं उन्हें किसी फ़ितने में न डाल दें। फ़िरऔन था भी धरती में बहुत सिर उठाए हुए, औऱ निश्चय ही वह हद से आगे बढ़ गया था
وَقَالَ مُوسٰى يَا قَوْمِ اِنْ كُنْتُمْ اٰمَنْتُمْ بِاللّٰهِ فَعَلَيْهِ تَوَكَّلُٓوا اِنْ كُنْتُمْ مُسْلِم۪ينَ84
मूसा ने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो तो उसपर भरोसा करो, यदि तुम आज्ञाकारी हो।"
فَقَالُوا عَلَى اللّٰهِ تَوَكَّلْنَاۚ رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِلْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَۙ85
इसपर वे बोले, "हमने अल्लाह पर भरोसा किया। ऐ हमारे रब! तू हमें अत्याचारी लोगों के हाथों आज़माइश में न डाल
وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِر۪ينَ86
"और अपनी दयालुता से हमें इनकार करनेवालों से छुटकारा दिया।"
وَاَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰى وَاَخ۪يهِ اَنْ تَبَوَّاٰ لِقَوْمِكُمَا بِمِصْرَ بُيُوتًا وَاجْعَلُوا بُيُوتَكُمْ قِبْلَةً وَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَۜ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِن۪ينَ87
हमने मूसा और उसके भाई की ओर प्रकाशना की कि "तुम दोनों अपने लोगों के लिए मिस्र में कुछ घर निश्चित कर लो औऱ अपने घरों को क़िबला बना लो। और नमाज़ क़ायम करो और ईमानवालों को शुभसूचना दे दो।"
وَقَالَ مُوسٰى رَبَّنَٓا اِنَّكَ اٰتَيْتَ فِرْعَوْنَ وَمَلَاَهُ ز۪ينَةً وَاَمْوَالًا فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۙ رَبَّنَا لِيُضِلُّوا عَنْ سَب۪يلِكَۚ رَبَّنَا اطْمِسْ عَلٰٓى اَمْوَالِهِمْ وَاشْدُدْ عَلٰى قُلُوبِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُوا حَتّٰى يَرَوُا الْعَذَابَ الْاَل۪يمَ88
मूसा ने कहा, "हमारे रब! तूने फ़िरऔन और उसके सरदारों को सांसारिक जीवन में शोभा-सामग्री और धन दिए है, हमारे रब, इसलिए कि वे तेरे मार्ग से भटकाएँ! हमारे रब, उनके धन नष्ट कर दे और उनके हृदय कठोर कर दे कि वे ईमान न लाएँ, ताकि वे दुखद यातना देख लें।"