219. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
قَالَ قَدْ اُج۪يبَتْ دَعْوَتُكُمَا فَاسْتَق۪يمَا وَلَا تَتَّبِعَٓانِّ سَب۪يلَ الَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَ89
कहा, "तुम दोनों की प्रार्थना स्वीकृत हो चुकी। अतः तुम दोनों जमें रहो और उन लोगों के मार्ग पर कदापि न चलना, जो जानते नहीं।"
وَجَاوَزْنَا بِبَن۪ٓي إِسْرَٓاء۪يلَ الْبَحْرَ فَاَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ وَجُنُودُهُ بَغْيًا وَعَدْوًاۜ حَتّٰٓى اِذَٓا اَدْرَكَهُ الْغَرَقُۙ قَالَ اٰمَنْتُ اَنَّهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا الَّذ۪ٓي اٰمَنَتْ بِه۪ بَنُٓوا اِسْرَٓاء۪يلَ وَاَنَا۬ مِنَ الْمُسْلِم۪ينَ90
और हमने इसराईलियों को समुद्र पार करा दिया। फिर फ़िरऔन और उसकी सेनाओं ने सरकशी और ज़्यादती के साथ उनका पीछा किया, यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो पुकार उठा, "मैं ईमान ले आया कि उसके सिव कोई पूज्य-प्रभु नही, जिस पर इसराईल की सन्तान ईमान लाई। अब मैं आज्ञाकारी हूँ।"
آٰلْـٰٔنَ وَقَدْ عَصَيْتَ قَبْلُ وَكُنْتَ مِنَ الْمُفْسِد۪ينَ91
"क्या अब? हालाँकि इससे पहले तुने अवज्ञा की और बिगाड़ पैदा करनेवालों में से था
فَالْيَوْمَ نُنَجّ۪يكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنْ خَلْفَكَ اٰيَةًۜ وَاِنَّ كَث۪يرًا مِنَ النَّاسِ عَنْ اٰيَاتِنَا لَغَافِلُونَ۟92
"अतः आज हम तेरे शरीर को बचा लेगें, ताकि तू अपने बादवालों के लिए एक निशानी हो जाए। निश्चय ही, बहुत-से लोग हमारी निशानियों के प्रति असावधान ही रहते है।"
وَلَقَدْ بَوَّاْنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ مُبَوَّاَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَاهُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِۚ فَمَا اخْتَلَفُوا حَتّٰى جَٓاءَهُمُ الْعِلْمُۜ اِنَّ رَبَّكَ يَقْض۪ي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ93
और हमने इसराईल की सन्तान को अच्छा, सम्मानित ठिकाना दिया औ उन्हें अच्छी आजीविका प्रदान की। फिर उन्होंने उस समय विभेद किया, जबकि ज्ञान उनके पास आ चुका था। निश्चय ही तुम्हारा रब क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ का फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे विभेद करते रहे है
فَاِنْ كُنْتَ ف۪ي شَكٍّ مِمَّٓا اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ فَسْـَٔلِ الَّذ۪ينَ يَقْرَؤُ۫نَ الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكَۚ لَقَدْ جَٓاءَكَ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَر۪ينَۙ94
अतः यदि तुम्हें उस चीज़ के बारे में कोई संदेह हो, जो हमने तुम्हारी ओर अवतरित की है, तो उनसे पूछ लो जो तुमसे पहले से किताब पढ़ रहे है। तुम्हारे पास तो तुम्हारे रब की ओर से सत्य आ चुका। अतः तुम कदापि सन्देह करनेवाले न हो
وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ فَتَكُونَ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ95
और न उन लोगों में सम्मिलित होना जिन्होंन अल्लाह की आयतों को झुठलाया, अन्यथा तुम घाटे में पड़कर रहोगे
اِنَّ الَّذ۪ينَ حَقَّتْ عَلَيْهِمْ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَۙ96
निस्संदेह जिन लोगों के विषय में तुम्हारे रब की बात सच्ची होकर रही वे ईमान नहीं लाएँगे,
وَلَوْ جَٓاءَتْهُمْ كُلُّ اٰيَةٍ حَتّٰى يَرَوُا الْعَذَابَ الْاَل۪يمَ97
जब तक के वे दुखद यातना न देख लें, चाहे प्रत्येक निशानी उनके पास आ जाए