220. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस
فَلَوْلَا كَانَتْ قَرْيَةٌ اٰمَنَتْ فَنَفَعَهَٓا ا۪يمَانُهَٓا اِلَّا قَوْمَ يُونُسَۜ لَمَّٓا اٰمَنُوا كَشَفْنَا عَنْهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَمَتَّعْنَاهُمْ اِلٰى ح۪ينٍ98
फिर ऐसी कोई बस्ती क्यों न हुई कि वह ईमान लाती और उसका ईमान उसके लिए लाभप्रद सिद्ध होता? हाँ, यूनुस की क़ौम के लोग इसके लिए अपवाद है। जब वे ईमान लाए तो हमने सांसारिक जीवन में अपमानजनक यातना को उनपर से टाल दिया और उन्हें एक अवधि तक सुखोपभोग का अवसर प्रदान किया
وَلَوْ شَٓاءَ رَبُّكَ لَاٰمَنَ مَنْ فِي الْاَرْضِ كُلُّهُمْ جَم۪يعًاۜ اَفَاَنْتَ تُكْرِهُ النَّاسَ حَتّٰى يَكُونُوا مُؤْمِن۪ينَ99
यदि तुम्हारा रब चाहता तो धरती में जितने लोग है वे सब के सब ईमान ले आते, फिर क्या तुम लोगों को विवश करोगे कि वे मोमिन हो जाएँ?
وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ اَنْ تُؤْمِنَ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِۜ وَيَجْعَلُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذ۪ينَ لَا يَعْقِلُونَ100
हालाँकि किसी व्यक्ति के लिए यह सम्भव नहीं कि अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई क्यक्ति ईमान लाए। वह तो उन लोगों पर गन्दगी डाल देता है, जो बुद्धि से काम नहीं लेते
قُلِ انْظُرُوا مَاذَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَمَا تُغْنِي الْاٰيَاتُ وَالنُّذُرُ عَنْ قَوْمٍ لَا يُؤْمِنُونَ101
कहो, "देख लो, आकाशों और धरती में क्या कुछ है!" किन्तु निशानियाँ और चेतावनियाँ उन लोगों के कुछ काम नहीं आती, जो ईमान न लाना चाहें
فَهَلْ يَنْتَظِرُونَ اِلَّا مِثْلَ اَيَّامِ الَّذ۪ينَ خَلَوْا مِنْ قَبْلِهِمْۜ قُلْ فَانْتَظِرُٓوا اِنّ۪ي مَعَكُمْ مِنَ الْمُنْتَظِر۪ينَ102
अतः वे तो उस तरह के दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिस तरह के दिन वे लोग देख चुके है जो उनसे पहले गुज़रे है। कह दो, "अच्छा, प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।"
ثُمَّ نُنَجّ۪ي رُسُلَنَا وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا كَذٰلِكَۚ حَقًّا عَلَيْنَا نُنْجِ الْمُؤْمِن۪ينَ۟103
फिर हम अपने रसूलों और उन लोगों को बचा लेते रहे हैं, जो ईमान ले आए। ऐसी ही हमारी रीति है, हमपर यह हक़ है कि ईमानवालों को बचा लें
قُلْ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اِنْ كُنْتُمْ ف۪ي شَكٍّ مِنْ د۪ين۪ي فَلَٓا اَعْبُدُ الَّذ۪ينَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَلٰكِنْ اَعْبُدُ اللّٰهَ الَّذ۪ي يَتَوَفّٰيكُمْۚ وَاُمِرْتُ اَنْ اَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَۙ104
कह दो, "ऐ लोगों! यदि तुम मेरे धर्म के विषय में किसी सन्देह में हो तो मैं तो उनकी बन्दगी नहीं करता जिनकी तुम अल्लाह से हटकर बन्दगी करते हो, बल्कि मैं उस अल्लाह की बन्दगी करता हूँ जो तुम्हें मृत्यु देता है। और मुझे आदेश है कि मैं ईमानवालों में से होऊँ
وَاَنْ اَقِمْ وَجْهَكَ لِلدّ۪ينِ حَن۪يفًاۚ وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ105
और यह कि हर ओर से एकाग्र होकर अपना रुख़ इस धर्म की ओर कर लो और मुशरिक़ों में कदापि सम्मिलित न हो,
وَلَا تَدْعُ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَنْفَعُكَ وَلَا يَضُرُّكَۚ فَاِنْ فَعَلْتَ فَاِنَّكَ اِذًا مِنَ الظَّالِم۪ينَ106
और अल्लाह से हटकर उसे न पुकारो जो न तुम्हें लाभ पहुँचाए और न तुम्हें हानि पहुँचा सके और न तुम्हारा बुरा कर सके, क्योंकि यदि तुमने ऐसा किया तो उस समय तुम अत्याचारी होगे