221. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
10 · यूनुस11 · हूद
وَاِنْ يَمْسَسْكَ اللّٰهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُٓ اِلَّا هُوَۚ وَاِنْ يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَٓادَّ لِفَضْلِه۪ۜ يُص۪يبُ بِه۪ مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ۜ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ107
यदि अल्लाह तुम्हें किसी तकलीफ़ में डाल दे तो उसके सिवा कोई उसे दूर करनेवाला नहीं। और यदि वह तुम्हारे लिए किसी भलाई का इरादा कर ले तो कोई उसके अनुग्रह को फेरनेवाला भी नहीं। वह इसे अपने बन्दों में से जिस तक चाहता है, पहुँचाता है और वह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है।"
قُلْ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَٓاءَكُمُ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكُمْۚ فَمَنِ اهْتَدٰى فَاِنَّمَا يَهْتَد۪ي لِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ ضَلَّ فَاِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَاۚ وَمَٓا اَنَا۬ عَلَيْكُمْ بِوَك۪يلٍۜ108
कह दो, "ऐ लोगों! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से सत्य आ चुका है। अब जो कोई मार्ग पर आएगा, तो वह अपने ही लिए मार्ग पर आएगा, और जो कोई पथभ्रष्ट होगा तो वह अपने ही बुरे के लिए पथभ्रष्टि होगा। मैं तुम्हारे ऊपर कोई हवालेदार तो हूँ नहीं।"
وَاتَّبِعْ مَا يُوحٰٓى اِلَيْكَ وَاصْبِرْ حَتّٰى يَحْكُمَ اللّٰهُۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِم۪ينَ109
जो कुछ तुमपर प्रकाशना की जा रही है, उसका अनुसरण करो और धैर्य से काम लो, यहाँ तक कि अल्लाह फ़ैसला कर दे, और वह सबसे अच्छा फ़ैसला करनेवाला है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓرٰ۠ كِتَابٌ اُحْكِمَتْ اٰيَاتُهُ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِنْ لَدُنْ حَك۪يمٍ خَب۪يرٍۙ1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह एक किताब है जिसकी आयतें पक्की है, फिर सविस्तार बयान हुई हैं; उसकी ओर से जो अत्यन्त तत्वदर्शी, पूरी ख़बर रखनेवाला है
اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّا اللّٰهَۜ اِنَّن۪ي لَكُمْ مِنْهُ نَذ۪يرٌ وَبَش۪يرٌۙ2
कि "तुम अल्लाह के सिवा किसी की बन्दगी न करो। मैं तो उसकी ओर से तुम्हें सचेत करनेवाला और शुभ सूचना देनेवाला हूँ।"
وَاَنِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُٓوا اِلَيْهِ يُمَتِّعْكُمْ مَتَاعًا حَسَنًا اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذ۪ي فَضْلٍ فَضْلَهُۜ وَاِنْ تَوَلَّوْا فَاِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَب۪يرٍ3
और यह कि "अपने रब से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ। वह तुम्हें एक निश्चित अवधि तक सुखोपभोग की उत्तम सामग्री प्रदान करेगा। और बढ़-बढ़कर कर्म करनेवालों पर वह तदधिक अपना अनुग्रह करेगा, किन्तु यदि तुम मुँह फेरते हो तो निश्चय ही मुझे तुम्हारे विषय में एक बड़े दिन की यातना का भय है
اِلَى اللّٰهِ مَرْجِعُكُمْۚ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ4
तुम्हें अल्लाह ही की ओर पलटना है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है।"
اَلَٓا اِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُۜ اَلَا ح۪ينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْۙ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَۚ اِنَّهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ5
देखो! ये अपने सीनों को मोड़ते है, चाहिए कि उससे छिपें। देखों! जब ये अपने कपड़ों से स्वयं को ढाँकते है, वह जानता है जो कुछ वे छिपाते है और जो कुछ वे प्रकट करते है। निस्संदेह वह सीनों तक की बात को जानता है