222. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
11 · हूद
وَمَا مِنْ دَٓابَّةٍ فِي الْاَرْضِ اِلَّا عَلَى اللّٰهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَاۜ كُلٌّ ف۪ي كِتَابٍ مُب۪ينٍ6
धरती में चलने-फिरनेवाला जो प्राणी भी है उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है। वह जानता है जहाँ उसे ठहरना है और जहाँ उसे सौपा जाना है। सब कुछ एक स्पष्ट किताब में मौजूद है
وَهُوَ الَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ ف۪ي سِتَّةِ اَيَّامٍ وَكَانَ عَرْشُهُ عَلَى الْمَٓاءِ لِيَبْلُوَكُمْ اَيُّكُمْ اَحْسَنُ عَمَلًاۜ وَلَئِنْ قُلْتَ اِنَّكُمْ مَبْعُوثُونَ مِنْ بَعْدِ الْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِنْ هٰذَٓا اِلَّا سِحْرٌ مُب۪ينٌ7
वही है जिसने आकाशों और धरती को छः दिनों में पैदा किया - उसका सिंहासन पानी पर था - ताकि वह तुम्हारी परीक्षा ले कि तुममें कर्म की स्पष्ट से कौन सबसे अच्छा है। और यदि तुम कहो कि "मरने के पश्चात तुम अवश्य उठोगे।" तो जिन्हें इनकार है, वे कहने लगेंगे, "यह तो खुला जादू है।"
وَلَئِنْ اَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ اِلٰٓى اُمَّةٍ مَعْدُودَةٍ لَيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُۜ اَلَا يَوْمَ يَاْت۪يهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ۟8
यदि हम एक निश्चित अवधि तक के लिए उनसे यातना को टाले रखें, तो वे कहने लगेंगे, "आख़िर किस चीज़ ने उसे रोक रखा है?" सुन लो! जिन दिन वह उनपर आ जाएगी तो फिर वह उनपर से टाली नहीं जाएगी। और वही चीज़ उन्हें घेर लेगी जिसका वे उपहास करते है
وَلَئِنْ اَذَقْنَا الْاِنْسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُۚ اِنَّهُ لَيَؤُ۫سٌ كَفُورٌ9
यदि हम मनुष्य को अपनी दयालुता का रसास्वादन कराकर फिर उसको छीन लॆं, तॊ (वह दयालुता कॆ लिए याचना नहीं करता) निश्चय ही वह निराशावादी, कृतघ्न है
وَلَئِنْ اَذَقْنَاهُ نَعْمَٓاءَ بَعْدَ ضَرَّٓاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّـَٔاتُ عَنّ۪يۜ اِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌۙ10
और यदि हम इसके पश्चात कि उसे तकलीफ़ पहुँची हो, उसे नेमत का रसास्वादन कराते है तो वह कहने लगता है, "मेरे तो सारे दुख दूर हो गए।" वह तो फूला नहीं समाता, डींगे मारने लगता है
اِلَّا الَّذ۪ينَ صَبَرُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَاَجْرٌ كَب۪يرٌ11
उनकी बात दूसरी है जिन्होंने धैर्य से काम लिया और सत्कर्म किए। वही है जिनके लिए क्षमा और बड़ा प्रतिदान है
فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ بَعْضَ مَا يُوحٰٓى اِلَيْكَ وَضَٓائِقٌ بِه۪ صَدْرُكَ اَنْ يَقُولُوا لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْهِ كَنْزٌ اَوْ جَٓاءَ مَعَهُ مَلَكٌۜ اِنَّمَٓا اَنْتَ نَذ۪يرٌۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ وَك۪يلٌۜ12
तो शायद तुम उसमें से कुछ छोड़ बैठोगे, जो तुम्हारी ओर प्रकाशना रूप में भेजी जा रही है। और तुम इस बात पर तंगदिल हो रहे हो कि वे कहते है, "उसपर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतरा या उसके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं आया?" तुम तो केवल सचेत करनेवाले हो। हर चीज़ अल्लाह ही के हवाले है