223. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

223. पृष्ठ
11 · हूद
اَمْ يَقُولُونَ افْتَرٰيهُۜ قُلْ فَاْتُوا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِثْلِه۪ مُفْتَرَيَاتٍ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ13
(उन्हें कोई शंका है) या वे कहते है कि "उसने इसे स्वयं घड़ लिया है?" कह दो, "अच्छा, यदि तुम सच्चे हो तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें ले आओ और अल्लाह से हटकर जिस किसी को बुला सकते हो बुला लो।"
فَاِلَّمْ يَسْتَج۪يبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُٓوا اَنَّمَٓا اُنْزِلَ بِعِلْمِ اللّٰهِ وَاَنْ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ فَهَلْ اَنْتُمْ مُسْلِمُونَ14
फिर यदि वे तुम्हारी बातें न मानें तो जान लो, यह अल्लाह के ज्ञान ही के साथ अवतरित हुआ है। और यह कि उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। तो अब क्या तुम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते हो?
مَنْ كَانَ يُر۪يدُ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا وَز۪ينَتَهَا نُوَفِّ اِلَيْهِمْ اَعْمَالَهُمْ ف۪يهَا وَهُمْ ف۪يهَا لَا يُبْخَسُونَ15
जो व्यक्ति सांसारिक जीवन और उसकी शोभा का इच्छुक हो तो ऐसे लोगों को उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला हम यहीं दे देते है और इसमें उनका कोई हक़ नहीं मारा जाता
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ اِلَّا النَّارُۘ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا ف۪يهَا وَبَاطِلٌ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ16
यही वे लोग है जिनके लिए आख़िरत में आग के सिवा और कुछ भी नहीं। उन्होंने जो कुछ बनाया, वह सब वहाँ उनकी जान को लागू हुआ और उनका सारा किया-धरा मिथ्या होकर रहा
اَفَمَنْ كَانَ عَلٰى بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّه۪ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِنْهُ وَمِنْ قَبْلِه۪ كِتَابُ مُوسٰٓى اِمَامًا وَرَحْمَةًۜ اُو۬لٰٓئِكَ يُؤْمِنُونَ بِه۪ۜ وَمَنْ يَكْفُرْ بِه۪ مِنَ الْاَحْزَابِ فَالنَّارُ مَوْعِدُهُۚ فَلَا تَكُ ف۪ي مِرْيَةٍ مِنْهُ اِنَّهُ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ17
फिर क्या वह व्यक्ति जो अपने रब के एक स्पष्ट प्रमाण पर है और स्वयं उसके रूप में भी एक गवाह उसके साथ-साथ रहता है - और इससे पहले मूसा की किताब भी एक मार्गदर्शक और दयालुता के रूप में उपस्थित रही है- (और वह जो प्रकाश एवं मार्गदर्शन से वंचित है, दोनों बराबर हो सकते है) ऐसे ही लोग उसपर ईमान लाते है, किन्तु इन गिरोहों में से जो उसका इनकार करेगा तो उसके लिए जिस जगह का वादा है, वह तो आग है। अतः तुम्हें इसके विषय में कोई सन्देह न हो। यह तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, किन्तु अधिकतर लोग मानते नहीं
وَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًاۜ اُو۬لٰٓئِكَ يُعْرَضُونَ عَلٰى رَبِّهِمْ وَيَقُولُ الْاَشْهَادُ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ الَّذ۪ينَ كَذَبُوا عَلٰى رَبِّهِمْۚ اَلَا لَعْنَةُ اللّٰهِ عَلَى الظَّالِم۪ينَۙ18
उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जो अल्लाह पर थोपकर झूठ घड़े। ऐसे लोग अपने रब के सामने पेश होंगे और गवाही देनेवाले कहेंगे, "यही लोग है जिन्होंने अपने रब पर झूठ घड़ा।" सुन लो! ऐसे अत्याचारियों पर अल्लाह की लानत है
اَلَّذ۪ينَ يَصُدُّونَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًاۜ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ19
जो अल्लाह के मार्ग से रोकते है और उसमें टेढ़ पैदा करना चाहते है; और वही आख़िरत का इनकार करते है