224. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
11 · हूद
اُو۬لٰٓئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِز۪ينَ فِي الْاَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مِنْ اَوْلِيَٓاءَۢ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُۜ مَا كَانُوا يَسْتَط۪يعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ20
वे धरती में क़ाबू से बाहर नहीं जा सकते और न अल्लाह से हटकर उनका कोई समर्थक ही है। उन्हें दोहरी यातना दी जाएगी। वे न सुन ही सकते थे और न देख ही सकते थे
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَفْتَرُونَ21
ये वही लोग है जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला और जो कुछ वे घड़ा करते थे, वह सब उनमें गुम होकर रह गया
لَا جَرَمَ اَنَّهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ هُمُ الْاَخْسَرُونَ22
निश्चय ही वही आख़िरत में सबसे बढ़कर घाटे में रहेंगे
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَاَخْبَتُٓوا اِلٰى رَبِّهِمْۙ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ23
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अपने रब की ओर झूक पड़े वही जन्नतवाले है, उसमें वे सदैव रहेंगे
مَثَلُ الْفَر۪يقَيْنِ كَالْاَعْمٰى وَالْاَصَمِّ وَالْبَص۪يرِ وَالسَّم۪يعِۜ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًاۜ اَفَلَا تَذَكَّرُونَ۟24
दोनों पक्षों की उपमा ऐसी है जैसे एक अन्धा और बहरा हो और एक देखने और सुननेवाला। क्या इन दोनों की दशा समान हो सकती है? तो क्या तुम होश से काम नहीं लेते?
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا نُوحًا اِلٰى قَوْمِه۪ۘ اِنّ۪ي لَكُمْ نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌۙ25
हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा। (उसने कहा,) "मैं तुम्हें साफ़-साफ़ चेतावनी देता हूँ
اَنْ لَا تَعْبُدُٓوا اِلَّا اللّٰهَۜ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ اَل۪يمٍ26
यह कि तुम अल्लाह के सिवा किसी की बन्दगी न करो। मुझे तुम्हारे विषय में एक दुखद दिन की यातना का भय है।"
فَقَالَ الْمَلَاُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ قَوْمِه۪ مَا نَرٰيكَ اِلَّا بَشَرًا مِثْلَنَا وَمَا نَرٰيكَ اتَّبَعَكَ اِلَّا الَّذ۪ينَ هُمْ اَرَاذِلُنَا بَادِيَ الرَّاْيِۚ وَمَا نَرٰى لَكُمْ عَلَيْنَا مِنْ فَضْلٍ بَلْ نَظُنُّكُمْ كَاذِب۪ينَ27
इसपर उसकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया था, कहने लगे, "हमारी दृष्टि में तो तुम हमारे ही जैसे आदमी हो और हम देखते है कि बस कुछ ऐसे लोग ही तुम्हारे अनुयायी है जो पहली स्पष्ट में हमारे यहाँ के नीच है। हम अपने मुक़ाबले में तुममें कोई बड़ाई नहीं देखते, बल्कि हम तो तुम्हें झूठा समझते है।"
قَالَ يَا قَوْمِ اَرَاَيْتُمْ اِنْ كُنْتُ عَلٰى بَيِّنَةٍ مِنْ رَبّ۪ي وَاٰتٰين۪ي رَحْمَةً مِنْ عِنْدِه۪ فَعُمِّيَتْ عَلَيْكُمْۜ اَنُلْزِمُكُمُوهَا وَاَنْتُمْ لَهَا كَارِهُونَ28
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम्हारा क्या विचार है? यदि मैं अपने रब के एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपने पास से दयालुता भी प्रदान की है, फिर वह तुम्हें न सूझे तो क्या हम हठात उसे तुमपर चिपका दें, जबकि वह तुम्हें अप्रिय है?