226. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

226. पृष्ठ
11 · हूद
وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَاٌ مِنْ قَوْمِه۪ سَخِرُوا مِنْهُۜ قَالَ اِنْ تَسْخَرُوا مِنَّا فَاِنَّا نَسْخَرُ مِنْكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَۜ38
जब नाव बनाने लगता है। उसकी क़ौम के सरदार जब भी उसके पास से गुज़रते तो उसका उपहास करते। उसने कहा, "यदि तुम हमारा उपहास करते हो तो हम भी तुम्हारा उपहास करेंगे, जैसे तुम हमारा उपहास करते हो
فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ مَنْ يَاْت۪يهِ عَذَابٌ يُخْز۪يهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُق۪يمٌ39
अब शीघ्र ही तुम जान लोगे कि कौन है जिसपर ऐसी यातना आती है, जो उसे अपमानित कर देगी और जिसपर ऐसी स्थाई यातना टूट पड़ती है
حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَ اَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُۙ قُلْنَا احْمِلْ ف۪يهَا مِنْ كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَاَهْلَكَ اِلَّا مَنْ سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ وَمَنْ اٰمَنَۜ وَمَٓا اٰمَنَ مَعَهُٓ اِلَّا قَل۪يلٌ40
यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आ गया और तंदूर उबल पड़ा तो हमने कहा, "हर जाति में से दो-दो के जोड़े चढ़ा लो और अपने घरवालों को भी - सिवाय ऐसे व्यक्ति के जिसके बारे में बात तय पा चुकी है - और जो ईमान लाया हो उसे भी।" किन्तु उसके साथ जो ईमान लाए थे वे थोड़े ही थे
وَقَالَ ارْكَبُوا ف۪يهَا بِسْمِ اللّٰهِ مَجْرٰۭۙيهَا وَمُرْسٰيهَاۜ اِنَّ رَبّ۪ي لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ41
उसने कहा, "उसमें सवार हो जाओ। अल्लाह के नाम से इसका चलना भी है और इसका ठहरना भी। निस्संदेह मेरा रब अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है।"
وَهِيَ تَجْر۪ي بِهِمْ ف۪ي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادٰى نُوحٌۨ ابْنَهُ وَكَانَ ف۪ي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَبْۭۗ مَعَنَا وَلَا تَكُنْ مَعَ الْكَافِر۪ينَ42
और वह (नाव) उन्हें लिए हुए पहाड़ों जैसी ऊँची लहर के बीच चल रही थी। नूह ने अपने बेटे को, जो उससे अलग था, पुकारा, "ऐ मेरे बेटे! हमारे साथ सवार हो जा। तू इनकार करनेवालों के साथ न रह।"
قَالَ سَاٰو۪ٓي اِلٰى جَبَلٍ يَعْصِمُن۪ي مِنَ الْمَٓاءِۜ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ اَمْرِ اللّٰهِ اِلَّا مَنْ رَحِمَۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَق۪ينَ43
उसने कहा, "मैं किसी पहाड़ से जा लगूँगा, जो मुझे पानी से बचा लेगा।" कहा, "आज अल्लाह के आदेश (फ़ैसले) से कोई बचानेवाला नहीं है सिवाय उसके जिसपर वह दया करे।" इतने में दोनों के बीच लहर आ पड़ी और डूबनेवालों के साथ वह भी डूब गया
وَق۪يلَ يَٓا اَرْضُ ابْلَع۪ي مَٓاءَكِ وَيَا سَمَٓاءُ اَقْلِع۪ي وَغ۪يضَ الْمَٓاءُ وَقُضِيَ الْاَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ وَق۪يلَ بُعْدًا لِلْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ44
और कहा गया, "ऐ धरती! अपना पानी निगल जा और ऐ आकाश! तू थम जा।" अतएव पानी तह में बैठ गया और फ़ैसला चुका दिया गया और वह (नाव) जूदी पर्वत पर टिक गई औऱ कह दिया गया, "फिटकार हो अत्याचारी लोगों पर!"
وَنَادٰى نُوحٌ رَبَّهُ فَقَالَ رَبِّ اِنَّ ابْن۪ي مِنْ اَهْل۪ي وَاِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَاَنْتَ اَحْكَمُ الْحَاكِم۪ينَ45
नूह ने अपने रब को पुकारा और कहा, "मेरे रब! मेरा बेटा मेरे घरवालों में से है और निस्संदेह तेरा वादा सच्चा है और तू सबसे बड़ा हाकिम भी है।"