228. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

228. पृष्ठ
11 · हूद
اِنْ نَقُولُ اِلَّا اعْتَرٰيكَ بَعْضُ اٰلِهَتِنَا بِسُٓوءٍۜ قَالَ اِنّ۪ٓي اُشْهِدُ اللّٰهَ وَاشْهَدُٓوا اَنّ۪ي بَر۪ٓيءٌ مِمَّا تُشْرِكُونَۙ54
हम तो केवल यही कहते है कि हमारे इष्ट-पूज्यों में से किसी की तुझपर मार पड़ गई है।" उसने कहा, "मैं तो अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि उनसे मेरा कोई सम्बन्ध नहीं,
مِنْ دُونِه۪ فَك۪يدُون۪ي جَم۪يعًا ثُمَّ لَا تُنْظِرُونِ55
जिनको तुम साझी ठहराकर उसके सिवा पूज्य मानते हो। अतः तुम सब मिलकर मेरे साथ दाँव-घात लगाकर देखो और मुझे मुहलत न दो
اِنّ۪ي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللّٰهِ رَبّ۪ي وَرَبِّكُمْۜ مَا مِنْ دَٓابَّةٍ اِلَّا هُوَ اٰخِذٌ بِنَاصِيَتِهَاۜ اِنَّ رَبّ۪ي عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ56
मेरा भरोसा तो अल्लाह, अपने रब और तुम्हारे रब, पर है। चलने-फिरनेवाला जो प्राणी भी है, उसकी चोटी तो उसी के हाथ में है। निस्संदेह मेरा रब सीधे मार्ग पर है
فَاِنْ تَوَلَّوْا فَقَدْ اَبْلَغْتُكُمْ مَٓا اُرْسِلْتُ بِه۪ٓ اِلَيْكُمْۜ وَيَسْتَخْلِفُ رَبّ۪ي قَوْمًا غَيْرَكُمْۚ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْـًٔاۜ اِنَّ رَبّ۪ي عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ حَف۪يظٌ57
किन्तु यदि तुम मुँह मोड़ते हो तो जो कुछ देकर मुझे तुम्हारी ओर भेजा गया था, वह तो मैं तुम्हें पहुँचा ही चुका। मेरा रब तुम्हारे स्थान पर दूसरी किसी क़ौम को लाएगा और तुम उसका कुछ न बिगाड़ सकोगे। निस्संदेह मेरा रब हर चीज़ की देख-भाल कर रहा है।"
وَلَمَّا جَٓاءَ اَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِنَّاۚ وَنَجَّيْنَاهُمْ مِنْ عَذَابٍ غَل۪يظٍ58
और जब हमारा आदेश आ पहुँचा तो हमने हूद और उसके साथ के ईमान लानेवालों को अपनी दयालुता से बचा लिया। और एक कठोर यातना से हमने उन्हें छुटकारा दिया
وَتِلْكَ عَادٌ جَحَدُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا رُسُلَهُ وَاتَّبَعُٓوا اَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَن۪يدٍ59
ये आद है, जिन्होंने अपने रब की आयतों का इनकार किया; उसके रसूलों की अवज्ञा की और हर सरकश विरोधी के पीछे चलते रहे
وَاُتْبِعُوا ف۪ي هٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اَلَٓا اِنَّ عَادًا كَفَرُوا رَبَّهُمْۜ اَلَا بُعْدًا لِعَادٍ قَوْمِ هُودٍ۟60
इस संसार में भी लानत ने उनका पीछा किया और क़ियामत के दिन भी, "सुन लो! निस्संदेह आद ने अपने रब के साथ कुफ़्र किया। सुनो! विनष्ट हो आद, हूद की क़ौम।"
وَاِلٰى ثَمُودَ اَخَاهُمْ صَالِحًاۢ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ هُوَ اَنْشَاَكُمْ مِنَ الْاَرْضِ وَاسْتَعْمَرَكُمْ ف۪يهَا فَاسْتَغْفِرُوهُ ثُمَّ تُوبُٓوا اِلَيْهِۜ اِنَّ رَبّ۪ي قَر۪يبٌ مُج۪يبٌ61
समूद को और उसके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़़ौम के लोगों! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई अन्य पूज्य-प्रभु नहीं। उसी ने तुम्हें धरती से पैदा किया और उसमें तुम्हें बसायाय़ अतः उससे क्षमा माँगो; फिर उसकी ओर पलट आओ। निस्संदेह मेरा रब निकट है, प्रार्थनाओं को स्वीकार करनेवाला भी।"
قَالُوا يَا صَالِحُ قَدْ كُنْتَ ف۪ينَا مَرْجُوًّا قَبْلَ هٰذَٓا اَتَنْهٰينَٓا اَنْ نَعْبُدَ مَا يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬نَا وَاِنَّنَا لَف۪ي شَكٍّ مِمَّا تَدْعُونَٓا اِلَيْهِ مُر۪يبٍ62
उन्होंने कहा, "ऐ सालेह! इससे पहले तू हमारे बीच ऐसा व्यक्ति था जिससे बड़ी आशाएँ थीं। क्या तू हमें उनको पूजने से रोकता है जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते रहे है? जिनकी ओर तू हमें बुला रहा है उसके विषय में तो हमें संदेह है जो हमें दुविधा में डाले हुए है।"