23. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
اَلَّذ۪ينَ اٰتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ اَبْنَٓاءَهُمْۜ وَاِنَّ فَر۪يقًا مِنْهُمْ لَيَكْتُمُونَ الْحَقَّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ146
जिन लोगों को हमने किताब दी है वे उसे पहचानते है, जैसे अपने बेटों को पहचानते है और उनमें से कुछ सत्य को जान-बूझकर छिपा रहे हैं
اَلْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَر۪ينَ۟147
सत्य तुम्हारे रब की ओर से है। अतः तुम सन्देह करनेवालों में से कदापि न होगा
وَلِكُلٍّ وِجْهَةٌ هُوَ مُوَلّ۪يهَا فَاسْتَبِقُوا الْخَيْرَاتِۜ اَيْنَ مَا تَكُونُوا يَاْتِ بِكُمُ اللّٰهُ جَم۪يعًاۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ148
प्रत्येक की एक ही दिशा है, वह उसी की ओर मुख किेए हुए है, तो तुम भलाईयों में अग्रसरता दिखाओ। जहाँ कहीं भी तुम होगे अल्लाह तुम सबको एकत्र करेगा। निस्संदेह अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِۜ وَاِنَّهُ لَلْحَقُّ مِنْ رَبِّكَۜ وَمَا اللّٰهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ149
और जहाँ से भी तुम निकलों, 'मस्जिदे हराम' (काबा) की ओर अपना मुँह फेर लिया करो। निस्संदेह यही तुम्हारे रब की ओर से हक़ है। जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उससे बेख़बर नहीं है
وَمِنْ حَيْثُ خَرَجْتَ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِۜ وَحَيْثُ مَا كُنْتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُۙ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَيْكُمْ حُجَّةٌۗ اِلَّا الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْن۪ي وَلِاُتِمَّ نِعْمَت۪ي عَلَيْكُمْ وَلَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۙ150
जहाँ से भी तुम निकलो, 'मस्जिदे हराम' की ओर अपना मुँह फेर लिया करो, और जहाँ कहीं भी तुम हो उसी की ओर मुँह कर लिया करो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई हुज्जत बाक़ी न रहे - सिवाय उन लोगों के जो उनमें ज़ालिम हैं, तुम उनसे न डरो, मुझसे ही डरो - और ताकि मैं तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दूँ, और ताकि तुम सीधी राह चलो
كَمَٓا اَرْسَلْنَا ف۪يكُمْ رَسُولًا مِنْكُمْ يَتْلُوا عَلَيْكُمْ اٰيَاتِنَا وَيُزَكّ۪يكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُمْ مَا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَۜ151
जैसाकि हमने तुम्हारे बीच एक रसूल तुम्हीं में से भेजा जो तुम्हें हमारी आयतें सुनाता है, तुम्हें निखारता है, और तुम्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है और तुम्हें वह कुछ सिखाता है, जो तुम जानते न थे
فَاذْكُرُون۪ٓي اَذْكُرْكُمْ وَاشْكُرُوا ل۪ي وَلَا تَكْفُرُونِ۟152
अतः तुम मुझे याद रखो, मैं भी तुम्हें याद रखूँगा। और मेरा आभार स्वीकार करते रहना, मेरे प्रति अकृतज्ञता न दिखलाना
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اسْتَع۪ينُوا بِالصَّبْرِ وَالصَّلٰوةِۜ اِنَّ اللّٰهَ مَعَ الصَّابِر۪ينَ153
ऐ ईमान लानेवालो! धैर्य और नमाज़ से मदद प्राप्त। करो। निस्संदेह अल्लाह उन लोगों के साथ है जो धैर्य और दृढ़ता से काम लेते है