231. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
11 · हूद
فَلَمَّا جَٓاءَ اَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِنْ سِجّ۪يلٍۙ مَنْضُودٍۙ82
फिर जब हमारा आदेश आ पहुँचा तो हमने उसको तलपट कर दिया और उसपर ककरीले पत्थर ताबड़-तोड़ बरसाए,
مُسَوَّمَةً عِنْدَ رَبِّكَۜ وَمَا هِيَ مِنَ الظَّالِم۪ينَ بِبَع۪يدٍ۟83
जो तुम्हारे रब के यहाँ चिन्हित थे। और वे अत्याचारियों से कुछ दूर भी नहीं
وَاِلٰى مَدْيَنَ اَخَاهُمْ شُعَيْبًاۜ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ وَلَا تَنْقُصُوا الْمِكْيَالَ وَالْم۪يزَانَ اِنّ۪ٓي اَرٰيكُمْ بِخَيْرٍ وَاِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُح۪يطٍ84
मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दही करो, उनके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। और नाप और तौल में कमी न करो। मैं तो तुम्हें अच्छी दशा में देख रहा हूँ, किन्तु मुझे तुम्हारे विषय में एक घेर लेनेवाले दिन की यातना का भय है
وَيَا قَوْمِ اَوْفُوا الْمِكْيَالَ وَالْم۪يزَانَ بِالْقِسْطِ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ اَشْيَٓاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْاَرْضِ مُفْسِد۪ينَ85
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! इनसाफ़ के साथ नाप और तौल को पूरा रखो। और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ पैदा करनेवाले बनकर अपने मुँह को कुलषित न करो
بَقِيَّتُ اللّٰهِ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَۚ وَمَٓا اَنَا۬ عَلَيْكُمْ بِحَف۪يظٍ86
यदि तुम मोमिन हो तो जो अल्लाह के पास शेष रहता है वही तुम्हारे लिए उत्तम है। मैं तुम्हारे ऊपर कोई नियुक्त रखवाला नहीं हूँ।"
قَالُوا يَا شُعَيْبُ اَصَلٰوتُكَ تَاْمُرُكَ اَنْ نَتْرُكَ مَا يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬نَٓا اَوْ اَنْ نَفْعَلَ ف۪ٓي اَمْوَالِنَا مَا نَشٰٓؤُ۬اۜ اِنَّكَ لَاَنْتَ الْحَل۪يمُ الرَّش۪يدُ87
वे बोले, "ऐ शुऐब! क्या तेरी नमाज़ तुझे यही सिखाती है कि उन्हें हम छोड़ दें जिन्हें हमारे बाप-दादा पूजते आए है या यह कि हम अपने माल का उपभोग अपनी इच्छानुसार न करें? बस एक तू ही तो बड़ा सहनशील, समझदार रह गया है!"
قَالَ يَا قَوْمِ اَرَاَيْتُمْ اِنْ كُنْتُ عَلٰى بَيِّنَةٍ مِنْ رَبّ۪ي وَرَزَقَن۪ي مِنْهُ رِزْقًا حَسَنًاۜ وَمَٓا اُر۪يدُ اَنْ اُخَالِفَكُمْ اِلٰى مَٓا اَنْهٰيكُمْ عَنْهُۜ اِنْ اُر۪يدُ اِلَّا الْاِصْلَاحَ مَا اسْتَطَعْتُۜ وَمَا تَوْف۪يق۪ٓي اِلَّا بِاللّٰهِۜ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَاِلَيْهِ اُن۪يبُ88
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम्हारा क्या विचार है? यदि मैं अपने रब के एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी ओर से अच्छी आजीविका भी प्रदान की (तो झुठलाना मेरे लिए कितना हानिकारक होगा!) और मैं नहीं चाहता कि जिन बातों से मैं तुम्हें रोकता हूँ स्वयं स्वयं तुम्हारे विपरीत उनको करने लगूँ। मैं तो अपने बस भर केवल सुधार चाहता हूँ। मेरा काम बनना तो अल्लाह ही की सहायता से सम्भव है। उसी पर मेरा भरोसा है और उसी की ओर मैं रुजू करता हूँ