232. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
11 · हूद
وَيَا قَوْمِ لَا يَجْرِمَنَّكُمْ شِقَاق۪ٓي اَنْ يُص۪يبَكُمْ مِثْلُ مَٓا اَصَابَ قَوْمَ نُوحٍ اَوْ قَوْمَ هُودٍ اَوْ قَوْمَ صَالِحٍۜ وَمَا قَوْمُ لُوطٍ مِنْكُمْ بِبَع۪يدٍ89
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरे प्रति तुम्हारा विरोध कहीं तुम्हें उस अपराध पर न उभारे कि तुमपर वही बीते जो नूह की क़ौम या हूद की क़ौम या सालेह की क़ौम पर बीत चुका है, और लूत की क़ौम तो तुमसे कुछ दूर भी नहीं।
وَاسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُٓوا اِلَيْهِۜ اِنَّ رَبّ۪ي رَح۪يمٌ وَدُودٌ90
अपने रब से क्षमा माँगो और फिर उसकी ओर पलट आओ। मेरा रब तो बड़ा दयावन्त, बहुत प्रेम करनेवाला हैं।"
قَالُوا يَا شُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ۬ كَث۪يرًا مِمَّا تَقُولُ وَاِنَّا لَنَرٰيكَ ف۪ينَا ضَع۪يفًاۚ وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَاكَۘ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْنَا بِعَز۪يزٍ91
उन्होंने कहा, "ऐ शुऐब! तेरी बहुत-सी बातों को समझने में तो हम असमर्थ है। और हम तो तुझे देखते है कि तू हमारे मध्य अत्यन्त निर्बल है। यदि तेरे भाई-बन्धु न होते तो हम पत्थर मार-मारकर कभी का तुझे समाप्त कर चुके होते। तू इतने बल-बूतेवाला तो नहीं कि हमपर भारी हो।"
قَالَ يَا قَوْمِ اَرَهْط۪ٓي اَعَزُّ عَلَيْكُمْ مِنَ اللّٰهِۜ وَاتَّخَذْتُمُوهُ وَرَٓاءَكُمْ ظِهْرِيًّاۜ اِنَّ رَبّ۪ي بِمَا تَعْمَلُونَ مُح۪يطٌ92
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! क्या मेरे भाई-बन्धु तुमपर अल्लाह से भी ज़्यादा भारी है कि तुमने उसे अपने पीछे डाल दिया? तुम जो कुछ भी करते हो निश्चय ही मेरे रब ने उसे अपने घेरे में ले रखा है
وَيَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۜ سَوْفَ تَعْلَمُونَۙ مَنْ يَاْت۪يهِ عَذَابٌ يُخْز۪يهِ وَمَنْ هُوَ كَاذِبٌۜ وَارْتَقِبُٓوا اِنّ۪ي مَعَكُمْ رَق۪يبٌ93
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह कर्म करते रहो, मैं भी कर रहा हूँ। शीघ्र ही तुमको ज्ञात हो जाएगा कि किसपर वह यातना आती है, जो उसे अपमानित करके रहेगी, और कौन है जो झूठा है! प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा कर रहा हूँ।"
وَلَمَّا جَٓاءَ اَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِنَّا وَاَخَذَتِ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَاَصْبَحُوا ف۪ي دِيَارِهِمْ جَاثِم۪ينَۙ94
अन्ततः जब हमारा आदेश आ पहुँचा तो हमने अपनी दयालुता से शुऐब और उसके साथ के ईमान लानेवालों को बचा लिया। और अत्याचार करनेवालों को एक प्रचंड चिंघार ने आ लिया और वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए,
كَاَنْ لَمْ يَغْنَوْا ف۪يهَاۜ اَلَا بُعْدًا لِمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ۟95
मानो वे वहाँ कभी बसे ही न थे। "सुन लो! फिटकार है मदयनवालों पर, जैसे समूद पर फिटकार हुई!"
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مُوسٰى بِاٰيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُب۪ينٍۙ96
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और स्पष्ट प्रमाण के साथ
اِلٰى فِرْعَوْنَ وَمَلَا۬ئِه۪ فَاتَّبَعُٓوا اَمْرَ فِرْعَوْنَۚ وَمَٓا اَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَش۪يدٍ97
फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा, किन्तु वे फ़िरऔन ही के कहने पर चले, हालाँकि फ़िरऔन की बात कोई ठीक बात न थी।