234. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
11 · हूद
فَلَا تَكُ ف۪ي مِرْيَةٍ مِمَّا يَعْبُدُ هٰٓؤُ۬لَٓاءِۜ مَا يَعْبُدُونَ اِلَّا كَمَا يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬هُمْ مِنْ قَبْلُۜ وَاِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَص۪يبَهُمْ غَيْرَ مَنْقُوصٍ۟109
अतः जिनको ये पूज रहे है, उनके विषय में तुझे कोई संदेह न हो। ये तो बस उसी तरह पूजा किए जा रहे है, जिस तरह इससे पहले इनके बाप-दादा पूजा करते रहे हैं। हम तो इन्हें इनका हिस्सा बिना किसी कमी के पूरा-पूरा देनेवाले हैं
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ ف۪يهِۜ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْۜ وَاِنَّهُمْ لَف۪ي شَكٍّ مِنْهُ مُر۪يبٍ110
हम मूसा को भी किताब दे चुके है। फिर उसमें भी विभेद किया गया था। यदि तुम्हारे रब की ओर से एक बात पहले ही निश्चित न कर दी गई होती तो उनके बीच कभी का फ़ैसला कर दिया गया होता। ये उसकी ओर से असमंजस में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए है
وَاِنَّ كُلًّا لَمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ اَعْمَالَهُمْۜ اِنَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ خَب۪يرٌ111
निश्चय ही समय आने पर एक-एक को, जितने भी है उनको तुम्हारा रब उनका किया पूरा-पूरा देकर रहेगा। वे जो कुछ कर रहे हैं, निस्संदेह उसे उसकी पूरी ख़बर है
فَاسْتَقِمْ كَمَٓا اُمِرْتَ وَمَنْ تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْاۜ اِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ112
अतः जैसा तुम्हें आदेश हुआ है, जमें रहो और तुम्हारे साथ के तौबा करनेवाले भी जमें रहें, और सीमोल्लंघन न करना। जो कुछ भी तुम करते हो, निश्चय ही वह उसे देख रहा है
وَلَا تَرْكَنُٓوا اِلَى الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا فَتَمَسَّكُمُ النَّارُۙ وَمَا لَكُمْ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مِنْ اَوْلِيَٓاءَ ثُمَّ لَا تُنْصَرُونَ113
उन लोगों की ओर तनिक भी न झुकना, जिन्होंने अत्याचार की नीति अपनाई हैं, अन्यथा आग तुम्हें आ लिपटेगी - और अल्लाह से हटकर तुम्हारा कोई संरक्षक मित्र नहीं - फिर तुम्हें कोई सहायता भी न मिलेगी
وَاَقِمِ الصَّلٰوةَ طَرَفَيِ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِنَ الَّيْلِۜ اِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّـَٔاتِۜ ذٰلِكَ ذِكْرٰى لِلذَّاكِر۪ينَۚ114
और नमाज़ क़ायम करो दिन के दोनों सिरों पर और रात के कुछ हिस्से में। निस्संदेह नेकियाँ बुराइयों को दूर कर देती है। यह याद रखनेवालों के लिए एक अनुस्मरण है
وَاصْبِرْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يُض۪يعُ اَجْرَ الْمُحْسِن۪ينَ115
और धैर्य से काम लो, इसलिए कि अल्लाह सुकर्मियों को बदला अकारथ नहीं करता;
فَلَوْلَا كَانَ مِنَ الْقُرُونِ مِنْ قَبْلِكُمْ اُو۬لُوا بَقِيَّةٍ يَنْهَوْنَ عَنِ الْفَسَادِ فِي الْاَرْضِ اِلَّا قَل۪يلًا مِمَّنْ اَنْجَيْنَا مِنْهُمْۚ وَاتَّبَعَ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مَٓا اُتْرِفُوا ف۪يهِ وَكَانُوا مُجْرِم۪ينَ116
फिर तुमसे पहले जो नस्लें गुज़र चुकी है उनमें ऐसे भले-समझदार क्यों न हुए जो धरती में बिगाड़ से रोकते, उन थोड़े-से लोगों के सिवा जिनको उनमें से हमने बचा लिया। अत्याचारी लोग तो उसी सुख-सामग्री के पीछे पड़े रहे, जिसमें वे रखे गए थे। वे तो थे ही अपराधी
وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهْلِكَ الْقُرٰى بِظُلْمٍ وَاَهْلُهَا مُصْلِحُونَ117
तुम्हारा रब तो ऐसा नहीं है कि बस्तियों को अकारण विनष्ट कर दे, जबकि वहाँ के निवासी बनाव और सुधार में लगे हों