236. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
12 · यूसुफ़
قَالَ يَا بُنَيَّ لَا تَقْصُصْ رُءْيَاكَ عَلٰٓى اِخْوَتِكَ فَيَك۪يدُوا لَكَ كَيْدًاۜ اِنَّ الشَّيْطَانَ لِلْاِنْسَانِ عَدُوٌّ مُب۪ينٌ5
उसने कहा, "ऐ मेरे बेटे! अपना स्वप्न अपने भाइयों को मत बताना, अन्यथा वे तेरे विरुद्ध कोई चाल चलेंगे। शैतान तो मनुष्य का खुला हुआ शत्रु है
وَكَذٰلِكَ يَجْتَب۪يكَ رَبُّكَ وَيُعَلِّمُكَ مِنْ تَاْو۪يلِ الْاَحَاد۪يثِ وَيُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَعَلٰٓى اٰلِ يَعْقُوبَ كَمَٓا اَتَمَّهَا عَلٰٓى اَبَوَيْكَ مِنْ قَبْلُ اِبْرٰه۪يمَ وَاِسْحٰقَۜ اِنَّ رَبَّكَ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ۟6
और ऐसा ही होगा, तेरा रब तुझे चुन लेगा और तुझे बातों की तथ्य तक पहुँचना सिखाएगा और अपना अनुग्रह तुझपर और याकूब के घरवालों पर उसी प्रकार पूरा करेगा, जिस प्रकार इससे पहले वह तेरे पूर्वज इबराहीम और इसहाक़ पर पूरा कर चुका है। निस्संदेह तेरा रब सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है।"
لَقَدْ كَانَ ف۪ي يُوسُفَ وَاِخْوَتِه۪ٓ اٰيَاتٌ لِلسَّٓائِل۪ينَ7
निश्चय ही यूसुफ़ और उनके भाइयों में सवाल करनेवालों के लिए निशानियाँ है
اِذْ قَالُوا لَيُوسُفُ وَاَخُوهُ اَحَبُّ اِلٰٓى اَب۪ينَا مِنَّا وَنَحْنُ عُصْبَةٌۜ اِنَّ اَبَانَا لَف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍۚ8
जबकि उन्होंने कहा, "यूसुफ़ और उसका भाई हमारे बाप को हमसे अधिक प्रिय है, हालाँकि हम एक पूरा जत्था है। वासत्व में हमारे बाप स्पष्ट तः बहक गए है
اُقْتُلُوا يُوسُفَ اَوِ اطْرَحُوهُ اَرْضًا يَخْلُ لَكُمْ وَجْهُ اَب۪يكُمْ وَتَكُونُوا مِنْ بَعْدِه۪ قَوْمًا صَالِح۪ينَ9
यूसुफ़ को मार डालो या उसे किसी भूभाग में फेंक आओ, ताकि तुम्हारे बाप का ध्यान केवल तुम्हारी ही ओर हो जाए। इसके पश्चात तुम फिर नेक बन जाना।"
قَالَ قَٓائِلٌ مِنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا يُوسُفَ وَاَلْقُوهُ ف۪ي غَيَابَتِ الْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ السَّيَّارَةِ اِنْ كُنْتُمْ فَاعِل۪ينَ10
उनमें से एक बोलनेवाला बोल पड़ा, "यूसुफ़ की हत्या न करो, यदि तुम्हें कुछ करना ही है तो उसे किसी कुएँ की तह में डाल दो। कोई राहगीर उसे उठा लेगा।"
قَالُوا يَٓا اَبَانَا مَا لَكَ لَا تَاْمَنَّۭۖا عَلٰى يُوسُفَ وَاِنَّا لَهُ لَنَاصِحُونَ11
उन्होंने कहा, "ऐ हमारे बाप! आपको क्या हो गया है कि यूसुफ़ के मामले में आप हमपर भरोसा नहीं करते, हालाँकि हम तो उसके हितैषी है?
اَرْسِلْهُ مَعَنَا غَدًا يَرْتَعْ وَيَلْعَبْ وَاِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ12
हमारे साथ कल उसे भेज दीजिए कि वह कुछ चर-चुग और खेल ले। उसकी रक्षा के लिए तो हम हैं ही।"
قَالَ اِنّ۪ي لَيَحْزُنُن۪ٓي اَنْ تَذْهَبُوا بِه۪ وَاَخَافُ اَنْ يَاْكُلَهُ الذِّئْبُ وَاَنْتُمْ عَنْهُ غَافِلُونَ13
उसने कहा, यह बात कि तुम उसे ले जाओ, मुझे दुखी कर देती है। कहीं ऐसा न हो कि तुम उसका ध्यान न रख सको और भेड़िया उसे खा जाए।"
قَالُوا لَئِنْ اَكَلَهُ الذِّئْبُ وَنَحْنُ عُصْبَةٌ اِنَّٓا اِذًا لَخَاسِرُونَ14
वे बोले, "हमारे एक जत्थे के होते हुए भी यदि उसे भेड़िए ने खा लिया, तब तो निश्चय ही हम सब कुछ गँवा बैठे।"