237. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
12 · यूसुफ़
فَلَمَّا ذَهَبُوا بِه۪ وَاَجْمَعُٓوا اَنْ يَجْعَلُوهُ ف۪ي غَيَابَتِ الْجُبِّۚ وَاَوْحَيْنَٓا اِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُمْ بِاَمْرِهِمْ هٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ15
फिर जब वे उसे ले गए और सभी इस बात पर सहमत हो गए कि उसे एक कुएँ की गहराई में डाल दें (तो उन्होंने वह किया जो करना चाहते थे), और हमने उसकी ओर प्रकाशना का, "तू उन्हें उनके इस कर्म से अवगत कराएगा और वे जानते न होंगे।"
وَجَٓاؤُٓ۫ اَبَاهُمْ عِشَٓاءً يَبْكُونَۜ16
कुछ रात बीते वे रोते हुए अपने बाप के पास आए
قَالُوا يَٓا اَبَانَٓا اِنَّا ذَهَبْنَا نَسْتَبِقُ وَتَرَكْنَا يُوسُفَ عِنْدَ مَتَاعِنَا فَاَكَلَهُ الذِّئْبُۚ وَمَٓا اَنْتَ بِمُؤْمِنٍ لَنَا وَلَوْ كُنَّا صَادِق۪ينَ17
कहने लगे, "ऐ मेरे बाप! हम परस्पर दौड़ में मुक़ाबला करते हुए दूर चले गए और यूसफ़ को हमने अपने सामान के साथ छोड़ दिया था कि इतने में भेड़िया उसे खा गया। आप तो हमपर विश्वास करेंगे नहीं, यद्यपि हम सच्चे है।"
وَجَٓاؤُ۫ عَلٰى قَم۪يصِه۪ بِدَمٍ كَذِبٍۜ قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ اَنْفُسُكُمْ اَمْرًاۜ فَصَبْرٌ جَم۪يلٌۜ وَاللّٰهُ الْمُسْتَعَانُ عَلٰى مَا تَصِفُونَ18
वे उसके कुर्ते पर झूठमूठ का ख़ून लगा लाए थे। उसने कहा, "नहीं, बल्कि तुम्हारे जी ने बहकाकर तुम्हारे लिए एक बात बना दी है। अब धैर्य से काम लेना ही उत्तम है! जो बात तुम बता रहे हो उसमें अल्लाह ही सहायक हो सकता है।"
وَجَٓاءَتْ سَيَّارَةٌ فَاَرْسَلُوا وَارِدَهُمْ فَاَدْلٰى دَلْوَهُۜ قَالَ يَا بُشْرٰى هٰذَا غُلَامٌۜ وَاَسَرُّوهُ بِضَاعَةًۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِمَا يَعْمَلُونَ19
एक क़ाफ़िला आया। फिर उसने पनिहारा को भेजा। उसने अपना डोल ज्यों ही डाला तो पुकार उठा, "अरे! कितनी ख़ुशी की बात है। यह तो एक लड़का है।" उन्होंने उसे व्यापार का माल समझकर छुपा लिया। किन्तु जो कुछ वे कर रहे थे, अल्लाह तो उसे जानता ही था
وَشَرَوْهُ بِثَمَنٍ بَخْسٍ دَرَاهِمَ مَعْدُودَةٍۚ وَكَانُوا ف۪يهِ مِنَ الزَّاهِد۪ينَ۟20
उन्होंने उसे सस्ते दाम, गिनती के कुछ दिरहमों में बेच दिया, क्योंकि वे उसके मामलें में बेपरवाह थे
وَقَالَ الَّذِي اشْتَرٰيهُ مِنْ مِصْرَ لِامْرَاَتِه۪ٓ اَكْرِم۪ي مَثْوٰيهُ عَسٰٓى اَنْ يَنْفَعَنَٓا اَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًاۜ وَكَذٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْاَرْضِۘ وَلِنُعَلِّمَهُ مِنْ تَاْو۪يلِ الْاَحَاد۪يثِۜ وَاللّٰهُ غَالِبٌ عَلٰٓى اَمْرِه۪ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ21
मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे ख़रीदा, उसने अपनी स्त्री से कहा, "इसको अच्छी तरह रखना। बहुत सम्भव है कि यह हमारे काम आए या हम इसे बेटा बना लें।" इस प्रकार हमने उस भूभाग में यूसुफ़ के क़दम जमाने की राह निकाली (ताकि उसे प्रतिष्ठा प्रदान करें) और ताकि मामलों और बातों के परिणाम से हम उसे अवगत कराएँ। अल्लाह तो अपना काम करके रहता है, किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं
وَلَمَّا بَلَغَ اَشُدَّهُٓ اٰتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًاۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِن۪ينَ22
और जब वह अपनी जवानी को पहुँचा तो हमने उसे निर्णय-शक्ति और ज्ञान प्रदान किया। उत्तमकार लोगों को हम इसी प्रकार बदला देते है