24. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

24. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
وَلَا تَقُولُوا لِمَنْ يُقْتَلُ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ اَمْوَاتٌۜ بَلْ اَحْيَٓاءٌ وَلٰكِنْ لَا تَشْعُرُونَ154
और जो लोग अल्लाह के मार्ग में मारे जाएँ उन्हें मुर्दा न कहो, बल्कि वे जीवित है, परन्तु तुम्हें एहसास नहीं होता
وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ بِشَيْءٍ مِنَ الْخَوْفِ وَالْجُوعِ وَنَقْصٍ مِنَ الْاَمْوَالِ وَالْاَنْفُسِ وَالثَّمَرَاتِۜ وَبَشِّرِ الصَّابِر۪ينَۙ155
और हम अवश्य ही कुछ भय से, और कुछ भूख से, और कुछ जान-माल और पैदावार की कमी से तुम्हारी परीक्षा लेंगे। और धैर्य से काम लेनेवालों को शुभ-सूचना दे दो
اَلَّذ۪ينَ اِذَٓا اَصَابَتْهُمْ مُص۪يبَةٌۙ قَالُٓوا اِنَّا لِلّٰهِ وَاِنَّٓا اِلَيْهِ رَاجِعُونَۜ156
जो लोग उस समय, जबकि उनपर कोई मुसीबत आती है, कहते है, "निस्संदेह हम अल्लाह ही के है और हम उसी की ओर लौटने वाले है।"
اُو۬لٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَاتٌ مِنْ رَبِّهِمْ وَرَحْمَةٌ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُهْتَدُونَ157
यही लोग है जिनपर उनके रब की विशेष कृपाएँ है और दयालुता भी; और यही लोग है जो सीधे मार्ग पर हैं
اِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَٓائِرِ اللّٰهِۚ فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ اَوِ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ اَنْ يَطَّوَّفَ بِهِمَاۜ وَمَنْ تَطَوَّعَ خَيْرًاۙ فَاِنَّ اللّٰهَ شَاكِرٌ عَل۪يمٌ158
निस्संदेह सफ़ा और मरवा अल्लाह की विशेष निशानियों में से हैं; अतः जो इस घर (काबा) का हज या उमपा करे, उसके लिए इसमें कोई दोष नहीं कि वह इन दोनों (पहाडियों) के बीच फेरा लगाए। और जो कोई स्वेच्छा और रुचि से कोई भलाई का कार्य करे तो अल्लाह भी गुणग्राहक, सर्वज्ञ है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَكْتُمُونَ مَٓا اَنْزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدٰى مِنْ بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِۙ اُو۬لٰٓئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللّٰهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَۙ159
जो लोग हमारी उतारी हुई खुली निशानियों और मार्गदर्शन को छिपाते है, इसके बाद कि हम उन्हें लोगों के लिए किताब में स्पष्ट कर चुके है; वही है जिन्हें अल्लाह धिक्कारता है - और सभी धिक्कारने वाले भी उन्हें धिक्कारते है
اِلَّا الَّذ۪ينَ تَابُوا وَاَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَاُو۬لٰٓئِكَ اَتُوبُ عَلَيْهِمْۚ وَاَنَا التَّوَّابُ الرَّح۪يمُ160
सिवाय उनके जिन्होंने तौबा कर ली और सुधार कर लिया, और साफ़-साफ़ बयान कर दिया, तो उनकी तौबा मैं क़बूल करूँगा; मैं बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला, अत्यन्त दयावान हूँ
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ اُو۬لٰٓئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اللّٰهِ وَالْمَلٰٓئِكَةِ وَالنَّاسِ اَجْمَع۪ينَۙ161
जिन लोगों ने कुफ़्र किया और काफ़िर (इनकार करनेवाले) ही रहकर मरे, वही हैं जिनपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की और सारे मनुष्यों की, सबकी फिटकार है
خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۚ لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنْظَرُونَ162
इसी दशा में वे सदैव रहेंगे, न उनकी यातना हल्की की जाएगी और न उन्हें मुहलत ही मिलेगी
وَاِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ الرَّحْمٰنُ الرَّح۪يمُ۟163
तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है, उस कृपाशील और दयावान के अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं