240. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
12 · यूसुफ़
وَاتَّبَعْتُ مِلَّةَ اٰبَٓاء۪ٓي اِبْرٰه۪يمَ وَاِسْحٰقَ وَيَعْقُوبَۜ مَا كَانَ لَنَٓا اَنْ نُشْرِكَ بِاللّٰهِ مِنْ شَيْءٍۜ ذٰلِكَ مِنْ فَضْلِ اللّٰهِ عَلَيْنَا وَعَلَى النَّاسِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ38
अपने पूर्वज इबराहीम, इसहाक़ और याक़ूब का तरीक़ा अपनाया है। इमसे यह नहीं हो सकता कि हम अल्लाह के साथ किसी चीज़ को साझी ठहराएँ। यह हमपर और लोगों पर अल्लाह का अनुग्रह है। किन्तु अधिकतर लोग आभार नहीं प्रकट करते
يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ ءَاَرْبَابٌ مُتَفَرِّقُونَ خَيْرٌ اَمِ اللّٰهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُۜ39
ऐ कारागर के मेरे साथियों! क्या अलग-अलग बहुत-से रह अच्छे है या अकेला अल्लाह जिसका प्रभुत्व सबपर है?
مَا تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِه۪ٓ اِلَّٓا اَسْمَٓاءً سَمَّيْتُمُوهَٓا اَنْتُمْ وَاٰبَٓاؤُ۬كُمْ مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ بِهَا مِنْ سُلْطَانٍۜ اِنِ الْحُكْمُ اِلَّا لِلّٰهِۜ اَمَرَ اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّٓا اِيَّاهُۜ ذٰلِكَ الدّ۪ينُ الْقَيِّمُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ40
तुम उसके सिवा जिनकी भी बन्दगी करते हो वे तो बस निरे नाम हैं जो तुमने रख छोड़े है और तुम्हारे बाप-दादा ने। उनके लिए अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा। सत्ता और अधिकार तो बस अल्लाह का है। उसने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो। यही सीधा, सच्चा दीन (धर्म) हैं, किन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते
يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ اَمَّٓا اَحَدُكُمَا فَيَسْق۪ي رَبَّهُ خَمْرًاۚ وَاَمَّا الْاٰخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَاْكُلُ الطَّيْرُ مِنْ رَاْسِه۪ۜ قُضِيَ الْاَمْرُ الَّذ۪ي ف۪يهِ تَسْتَفْتِيَانِۜ41
ऐ कारागार के मेरे दोनों साथियों! तुममें से एक तो अपने स्वामी को मद्यपान कराएगा; रहा दूसरा तो उसे सूली पर चढ़ाया जाएगा और पक्षी उसका सिर खाएँगे। फ़ैसला हो चुका उस बात का जिसके विषय में तुम मुझसे पूछ रहे हो।"
وَقَالَ لِلَّذ۪ي ظَنَّ اَنَّهُ نَاجٍ مِنْهُمَا اذْكُرْن۪ي عِنْدَ رَبِّكَۘ فَاَنْسٰيهُ الشَّيْطَانُ ذِكْرَ رَبِّه۪ فَلَبِثَ فِي السِّجْنِ بِضْعَ سِن۪ينَۜ۟42
उन दोनों में से जिसके विषय में उसने समझा था कि वह रिहा हो जाएगा, उससे कहा, "अपने स्वामी से मेरी चर्चा करना।" किन्तु शैतान ने अपने स्वामी से उसकी चर्चा करना भुलवा दिया। अतः वह (यूसुफ़) कई वर्ष तक कारागार ही में रहा
وَقَالَ الْمَلِكُ اِنّ۪ٓي اَرٰى سَبْعَ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَاْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنْبُلَاتٍ خُضْرٍ وَاُخَرَ يَابِسَاتٍۜ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَاُ اَفْتُون۪ي ف۪ي رُءْيَايَ اِنْ كُنْتُمْ لِلرُّءْيَا تَعْبُرُونَ43
फिर ऐसा हुआ कि सम्राट ने कहा, "मैं एक स्वप्न देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गायें खा रही है और सात बालें हरी है और दूसरी (सात सूखी) । ऐ सरदारों! यदि तुम स्वप्न का अर्थ बताते हो, तो मुझे मेरे इस स्वप्न के सम्बन्ध में बताओ।"