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242. पृष्ठ
12 · यूसुफ़
وَمَٓا اُبَرِّئُ نَفْس۪يۚ اِنَّ النَّفْسَ لَاَمَّارَةٌ بِالسُّٓوءِ اِلَّا مَا رَحِمَ رَبّ۪يۜ اِنَّ رَبّ۪ي غَفُورٌ رَح۪يمٌ53
मैं यह नहीं कहता कि मैं बुरी हूँ - जी तो बुराई पर उभारता ही है - यदि मेरा रब ही दया करे तो बात और है। निश्चय ही मेरा रब बहुत क्षमाशील, दयावान है।"
وَقَالَ الْمَلِكُ ائْتُون۪ي بِه۪ٓ اَسْتَخْلِصْهُ لِنَفْس۪يۚ فَلَمَّا كَلَّمَهُ قَالَ اِنَّكَ الْيَوْمَ لَدَيْنَا مَك۪ينٌ اَم۪ينٌ54
सम्राट ने कहा, "उसे मेरे पास ले आओ! मैं उसे अपने लिए ख़ास कर लूँगा।" जब उसने उससे बात-चीक करी तो उसने कहा, "निस्संदेह आज तुम हमारे यहाँ विश्व सनीय अधिकार प्राप्त व्यक्ति हो।"
قَالَ اجْعَلْن۪ي عَلٰى خَزَٓائِنِ الْاَرْضِۚ اِنّ۪ي حَف۪يظٌ عَل۪يمٌ55
उसने कहा, "इस भू-भाग के ख़जानों पर मुझे नियुक्त कर दीजिए। निश्चय ही मैं रक्षक और ज्ञानवान हूँ।"
وَكَذٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْاَرْضِۚ يَتَبَوَّاُ مِنْهَا حَيْثُ يَشَٓاءُۜ نُص۪يبُ بِرَحْمَتِنَا مَنْ نَشَٓاءُ وَلَا نُض۪يعُ اَجْرَ الْمُحْسِن۪ينَ56
इस प्रकार हमने यूसुफ़ को उस भू-भाग में अधिकार प्रदान किया कि वह उसमें जहाँ चाहे अपनी जगह बनाए। हम जिसे चाहते हैं उसे अपनी दया का पात्र बनाते है। उत्तमकारों का बदला हम अकारथ नहीं जाने देते
وَلَاَجْرُ الْاٰخِرَةِ خَيْرٌ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ۟57
और ईमान लानेवालों और डर रखनेवालों के लिए आख़िरत का बदला इससे कहीं उत्तम है
وَجَٓاءَ اِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنْكِرُونَ58
फिर ऐसा हुआ कि यूसुफ़ के भाई आए और उसके सामने उपस्थित हुए, उसने तो उन्हें पहचान लिया, किन्तु वे उससे अपरिचित रहे
وَلَمَّا جَهَّزَهُمْ بِجَهَازِهِمْ قَالَ ائْتُون۪ي بِاَخٍ لَكُمْ مِنْ اَب۪يكُمْۚ اَلَا تَرَوْنَ اَنّ۪ٓي اُو۫فِي الْكَيْلَ وَاَنَا۬ خَيْرُ الْمُنْزِل۪ينَ59
जब उसने उनके लिए उनका सामान तैयार करा दिया तो कहा, "बाप की ओर सो तुम्हारा भाई है, उसे मेरे पास लाना। क्या देखते नहीं कि मैं पूरी माप से देता हूँ और मैं अच्छा आतिशेय भी हूँ?"
فَاِنْ لَمْ تَاْتُون۪ي بِه۪ فَلَا كَيْلَ لَكُمْ عِنْد۪ي وَلَا تَقْرَبُونِ60
किन्तु यदि तुम उसे मेरे पास न लाए तो फिर तुम्हारे लिए मेरे यहाँ कोई माप (ग़ल्ला) नहीं और तुम मेरे पास आना भी मत।"
قَالُوا سَنُرَاوِدُ عَنْهُ اَبَاهُ وَاِنَّا لَفَاعِلُونَ61
वे बोले, "हम उसके लिए उसके बाप को राज़ी करने की कोशिश करेंगे और हम यह काम अवश्य करेंगे।"
وَقَالَ لِفِتْيَانِهِ اجْعَلُوا بِضَاعَتَهُمْ ف۪ي رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَٓا اِذَا انْقَلَبُٓوا اِلٰٓى اَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ62
उसने अपने सेवकों से कहा, "इनका दिया हुआ माल इनके सामान में रख दो कि जब ये अपने घरवालों की ओर लौटें तो इसे पहचान लें, ताकि ये फिर लौटकर आएँ।"
فَلَمَّا رَجَعُٓوا اِلٰٓى اَب۪يهِمْ قَالُوا يَٓا اَبَانَا مُنِعَ مِنَّا الْكَيْلُ فَاَرْسِلْ مَعَنَٓا اَخَانَا نَكْتَلْ وَاِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ63
फिर जब वे अपने बाप के पास लौटकर गए तो कहा, "ऐ मेरे बाप! (अनाज की) माप हमसे रोक दी गई है। अतः हमारे भाई को हमारे साथ भेज दीजिए, ताकि हम माप भर लाएँ; और हम उसकी रक्षा के लिए तो मौजूद ही हैं।"