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244. पृष्ठ
12 · यूसुफ़
فَلَمَّا جَهَّزَهُمْ بِجَهَازِهِمْ جَعَلَ السِّقَايَةَ ف۪ي رَحْلِ اَخ۪يهِ ثُمَّ اَذَّنَ مُؤَذِّنٌ اَيَّتُهَا الْع۪يرُ اِنَّكُمْ لَسَارِقُونَ70
फिर जब उनका सामान तैयार कर दिया तो अपने भाई के सामान में पानी पीने का प्याला रख दिया। फिर एक पुकारनेवाले ने पुकारकर कहा, "ऐ क़ाफ़िलेवालो! निश्चय ही तुम चोर हो।"
قَالُٓوا وَاَقْبَلُوا عَلَيْهِمْ مَاذَا تَفْقِدُونَ71
वे उनकी ओर रुख़ करते हुए बोले, "तुम्हारी क्या चीज़ खो गई है?"
قَالُوا نَفْقِدُ صُوَاعَ الْمَلِكِ وَلِمَنْ جَٓاءَ بِه۪ حِمْلُ بَع۪يرٍ وَاَنَا۬ بِه۪ زَع۪يمٌ72
उन्होंने कहा, "शाही पैमाना हमें नहीं मिल रहा है। जो व्यक्ति उसे ला दे उसको एक ऊँट का बोझभर ग़ल्ला इनाम मिलेगा। मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ।"
قَالُوا تَاللّٰهِ لَقَدْ عَلِمْتُمْ مَا جِئْنَا لِنُفْسِدَ فِي الْاَرْضِ وَمَا كُنَّا سَارِق۪ينَ73
वे कहने लगे, "अल्लाह की क़सम! तुम लोग जानते ही हो कि हम इस भू-भाग में बिगाड़ पैदा करने नहीं आए है और न हम चोर है।"
قَالُوا فَمَا جَزَٓاؤُ۬هُٓ اِنْ كُنْتُمْ كَاذِب۪ينَ74
उन्होंने कहा, "यदि तुम झूठे सिद्ध हुए तो फिर उसका दंड क्या है?"
قَالُوا جَزَٓاؤُ۬هُ مَنْ وُجِدَ ف۪ي رَحْلِه۪ فَهُوَ جَزَٓاؤُ۬هُۜ كَذٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِم۪ينَ75
वे बोले, "उसका दंड यह है कि जिसके सामान में वह मिले वही उसका बदला ठहराया जाए। हम अत्याचारियों को ऐसा ही दंड देते है।"
فَبَدَاَ بِاَوْعِيَتِهِمْ قَبْلَ وِعَٓاءِ اَخ۪يهِ ثُمَّ اسْتَخْرَجَهَا مِنْ وِعَٓاءِ اَخ۪يهِۜ كَذٰلِكَ كِدْنَا لِيُوسُفَۜ مَا كَانَ لِيَاْخُذَ اَخَاهُ ف۪ي د۪ينِ الْمَلِكِ اِلَّٓا اَنْ يَشَٓاءَ اللّٰهُۜ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَنْ نَشَٓاءُۜ وَفَوْقَ كُلِّ ذ۪ي عِلْمٍ عَل۪يمٌ76
फिर उसके भाई की खुरजी से पहले उनकी ख़ुरजियाँ देखनी शुरू की; फिर उसके भाई की ख़ुरजी से उसे बरामद कर लिया। इस प्रकार हमने यूसुफ़ का उपाय किया। वह शाही क़ानून के अनुसार अपने भाई को प्राप्त नहीं कर सकता था। बल्कि अल्लाह ही की इच्छा लागू है। हम जिसको चाहे उसके दर्जे ऊँचे कर दें। और प्रत्येक ज्ञानवान से ऊपर एक ज्ञानवान मौजूद है
قَالُٓوا اِنْ يَسْرِقْ فَقَدْ سَرَقَ اَخٌ لَهُ مِنْ قَبْلُۚ فَاَسَرَّهَا يُوسُفُ ف۪ي نَفْسِه۪ وَلَمْ يُبْدِهَا لَهُمْ قَالَ اَنْتُمْ شَرٌّ مَكَانًاۚ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا تَصِفُونَ77
उन्होंने कहा, "यदि यह चोरी करता है तो चोरी तो इससे पहले इसका एक भाई भी कर चुका है।" किन्तु यूसुफ़ ने इसे अपने जी ही में रखा और उनपर प्रकट नहीं किया। उसने कहा, "मक़ाम की दृष्टि से तुम अत्यन्त बुरे हो। जो कुछ तुम बताते हो, अल्लाह को उसका पूरा ज्ञान है।"
قَالُوا يَٓا اَيُّهَا الْعَز۪يزُ اِنَّ لَهُٓ اَبًا شَيْخًا كَب۪يرًا فَخُذْ اَحَدَنَا مَكَانَهُۚ اِنَّا نَرٰيكَ مِنَ الْمُحْسِن۪ينَ78
उन्होंने कहा, "ऐ अज़ीज़! इसका बाप बहुत ही बूढ़ा है। इसलिए इसके स्थान पर हममें से किसी को रख लीजिए। हमारी स्पष्ट में तो आप बड़े ही सुकर्मी है।"