245. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
12 · यूसुफ़
قَالَ مَعَاذَ اللّٰهِ اَنْ نَاْخُذَ اِلَّا مَنْ وَجَدْنَا مَتَاعَنَا عِنْدَهُٓۙ اِنَّٓا اِذًا لَظَالِمُونَ۟79
उसने कहा, "इस बात से अल्लाह पनाह में रखे कि जिसके पास हमने अपना माल पाया है, उसे छोड़कर हम किसी दूसरे को रखें। फिर तो हम अत्याचारी ठहगेंगे।"
فَلَمَّا اسْتَيْـَٔسُوا مِنْهُ خَلَصُوا نَجِيًّاۜ قَالَ كَب۪يرُهُمْ اَلَمْ تَعْلَمُٓوا اَنَّ اَبَاكُمْ قَدْ اَخَذَ عَلَيْكُمْ مَوْثِقًا مِنَ اللّٰهِ وَمِنْ قَبْلُ مَا فَرَّطْتُمْ ف۪ي يُوسُفَۚ فَلَنْ اَبْرَحَ الْاَرْضَ حَتّٰى يَاْذَنَ ل۪ٓي اَب۪ٓي اَوْ يَحْكُمَ اللّٰهُ ل۪يۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِم۪ينَ80
तो जब से वे उससे निराश हो गए तो परामर्श करने के लिए अलग जा बैठे। उनमें जो बड़ा था, वह कहने लगा, "क्या तुम जानते नहीं कि तुम्हारा बाप अल्लाह के नाम पर तुमसे वचन ले चुका है और उसको जो इससे पहले यूसुफ़ के मामले में तुमसे क़सूर हो चुका है? मैं तो इस भू-भाग से कदापि टलने का नहीं जब तक कि मेरे बाप मुझे अनुमति न दें या अल्लाह ही मेरे हक़ में कोई फ़ैसला कर दे। और वही सबसे अच्छा फ़ैसला करनेवाला है
اِرْجِعُٓوا اِلٰٓى اَب۪يكُمْ فَقُولُوا يَٓا اَبَانَٓا اِنَّ ابْنَكَ سَرَقَۚ وَمَا شَهِدْنَٓا اِلَّا بِمَا عَلِمْنَا وَمَا كُنَّا لِلْغَيْبِ حَافِظ۪ينَ81
तुम अपने बाप के पास लौटकर जाओ और कहो, "ऐ हमारे बाप! आपके बेटे ने चोरी की है। हमने तो वही कहा जो हमें मालूम हो सका, परोक्ष तो हमारी दृष्टि में था नहीं
وَسْـَٔلِ الْقَرْيَةَ الَّت۪ي كُنَّا ف۪يهَا وَالْع۪يرَ الَّت۪ٓي اَقْبَلْنَا ف۪يهَاۜ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ82
आप उस बस्ती से पूछ लीजिए जहाँ हम थे और उस क़ाफ़िलें से भी जिसके साथ होकर हम आए। निस्संदेह हम बिलकुल सच्चे है।"
قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ اَنْفُسُكُمْ اَمْرًاۜ فَصَبْرٌ جَم۪يلٌۜ عَسَى اللّٰهُ اَنْ يَاْتِيَن۪ي بِهِمْ جَم۪يعًاۜ اِنَّهُ هُوَ الْعَل۪يمُ الْحَك۪يمُ83
उसने कहा, "नहीं, बल्कि तुम्हारे जी ही ने तुम्हे पट्टी पढ़ाकर एक बात बना दी है। अब धैर्य से काम लेना ही उत्तम है! बहुत सम्भव है कि अल्लाह उन सबको मेरे पास ले आए। वह तो सर्वज्ञ, अत्यन्त तत्वदर्शी है।"
وَتَوَلّٰى عَنْهُمْ وَقَالَ يَٓا اَسَفٰى عَلٰى يُوسُفَ وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظ۪يمٌ84
उसने उनकी ओर से मुख फेर लिया और कहने लगा, "हाय अफ़सोस, यूसुफ़ की जुदाई पर!" और ग़म के मारे उसकी आँखें सफ़ेद पड़ गई और वह घुटा जा रहा था
قَالُوا تَاللّٰهِ تَفْتَؤُ۬ا تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتّٰى تَكُونَ حَرَضًا اَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِك۪ينَ85
उन्होंने कहा, "अल्लाह की क़सम! आप तो यूसुफ़ ही की याद में लगे रहेंगे, यहाँ तक कि घुलकर रहेंगे या प्राण ही त्याग देंगे।"
قَالَ اِنَّمَٓا اَشْكُوا بَثّ۪ي وَحُزْن۪ٓي اِلَى اللّٰهِ وَاَعْلَمُ مِنَ اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ86
उसने कहा, "मैं तो अपनी परेशानी और अपने ग़म की शिकायत अल्लाह ही से करता हूँ और अल्लाह की ओर से जो मैं जानता हूँ, तुम नही जानते