246. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
12 · यूसुफ़
يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِنْ يُوسُفَ وَاَخ۪يهِ وَلَا تَا۬يْـَٔسُوا مِنْ رَوْحِ اللّٰهِۜ اِنَّهُ لَا يَا۬يْـَٔسُ مِنْ رَوْحِ اللّٰهِ اِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ87
ऐ मेरे बेटों! जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई की टोह लगाओ और अल्लाह की सदयता से निराश न हो। अल्लाह की सदयता से तो केवल कुफ़्र करनेवाले ही निराश होते है।"
فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَيْهِ قَالُوا يَٓا اَيُّهَا الْعَز۪يزُ مَسَّنَا وَاَهْلَنَا الضُّرُّ وَجِئْنَا بِبِضَاعَةٍ مُزْجٰيةٍ فَاَوْفِ لَنَا الْكَيْلَ وَتَصَدَّقْ عَلَيْنَاۜ اِنَّ اللّٰهَ يَجْزِي الْمُتَصَدِّق۪ينَ88
फिर जब वे उसके पास उपस्थित हुए तो कहा, "ऐ अज़ीज़! हमें और हमारे घरवालों को बहुत तकलीफ़ पहुँची हैं और हम कुछ तुच्छ-सी पूँजी लेकर आए है, किन्तु आप हमें पूरी-पूरी माप प्रदान करें। और हमें दान दें। निश्चय ही दान करनेवालों को बदला अल्लाह देता है।"
قَالَ هَلْ عَلِمْتُمْ مَا فَعَلْتُمْ بِيُوسُفَ وَاَخ۪يهِ اِذْ اَنْتُمْ جَاهِلُونَ89
उसने कहा, "क्या तुम्हें यह भी मालूम है कि जब तुम आवेग के वशीभूत थे तो यूसुफ़ और उसके भाई के साथ तुमने क्या किया था?"
قَالُٓوا ءَاِنَّكَ لَاَنْتَ يُوسُفُۜ قَالَ اَنَا۬ يُوسُفُ وَهٰذَٓا اَخ۪يۘ قَدْ مَنَّ اللّٰهُ عَلَيْنَاۜ اِنَّهُ مَنْ يَتَّقِ وَيَصْبِرْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يُض۪يعُ اَجْرَ الْمُحْسِن۪ينَ90
वे बोल पड़े, "क्या यूसुफ़ आप ही है?" उसने कहा, "मैं ही यूसुफ़ हूँ और यह मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर उपकार किया है। सच तो यह है कि जो कोई डर रखे और धैर्य से काम ले तो अल्लाह भी उत्तमकारों का बदला अकारथ नहीं करता।"
قَالُوا تَاللّٰهِ لَقَدْ اٰثَرَكَ اللّٰهُ عَلَيْنَا وَاِنْ كُنَّا لَخَاطِـ۪ٔينَ91
उन्होंने कहा, "अल्लाह की क़सम! आपको अल्लाह ने हमारे मुक़ाबले में पसन्द किया और निश्चय ही चूक तो हमसे हुई।"
قَالَ لَا تَثْر۪يبَ عَلَيْكُمُ الْيَوْمَۜ يَغْفِرُ اللّٰهُ لَكُمْۘ وَهُوَ اَرْحَمُ الرَّاحِم۪ينَ92
उसने कहा, "आज तुमपर कोई आरोप नहीं। अल्लाह तुम्हें क्षमा करे। वह सबसे बढ़कर दयावान है।
اِذْهَبُوا بِقَم۪يص۪ي هٰذَا فَاَلْقُوهُ عَلٰى وَجْهِ اَب۪ي يَاْتِ بَص۪يرًاۚ وَاْتُون۪ي بِاَهْلِكُمْ اَجْمَع۪ينَ۟93
मेरा यह कुर्ता ले जाओ और इसे मेरे बाप के मुख पर डाल दो। उनकी नेत्र-ज्योति लौट आएगी, फिर अपने सब घरवालों को मेरे यहाँ ले आओ।"
وَلَمَّا فَصَلَتِ الْع۪يرُ قَالَ اَبُوهُمْ اِنّ۪ي لَاَجِدُ ر۪يحَ يُوسُفَ لَوْلَٓا اَنْ تُفَنِّدُونِ94
इधर जब क़ाफ़िला चला तो उनके बाप ने कहा, "यदि तुम मुझे बहकी बातें करनेवाला न समझो तो मुझे तो यूसुफ़ की महक आ रही है।"
قَالُوا تَاللّٰهِ اِنَّكَ لَف۪ي ضَلَالِكَ الْقَد۪يمِ95
वे बोले, "अल्लाह की क़सम! आप तो अभी तक अपनी उसी पुरानी भ्रांति में पड़े हुए है।"