25. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
اِنَّ ف۪ي خَلْقِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَاخْتِلَافِ الَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَالْفُلْكِ الَّت۪ي تَجْر۪ي فِي الْبَحْرِ بِمَا يَنْفَعُ النَّاسَ وَمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ مِنَ السَّمَٓاءِ مِنْ مَٓاءٍ فَاَحْيَا بِهِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَبَثَّ ف۪يهَا مِنْ كُلِّ دَٓابَّةٍۖ وَتَصْر۪يفِ الرِّيَاحِ وَالسَّحَابِ الْمُسَخَّرِ بَيْنَ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ164
निस्संदेह आकाशों और धरती की संरचना में, और रात और दिन की अदला-बदली में, और उन नौकाओं में जो लोगों की लाभप्रद चीज़े लेकर समुद्र (और नदी) में चलती है, और उस पानी में जिसे अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर जिसके द्वारा धरती को उसके निर्जीव हो जाने के पश्चात जीवित किया और उसमें हर एक (प्रकार के) जीवधारी को फैलाया और हवाओं को गर्दिश देने में और उन बादलों में जो आकाश और धरती के बीच (काम पर) नियुक्त होते है, उन लोगों के लिए कितनी ही निशानियाँ है जो बुद्धि से काम लें
وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَتَّخِذُ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَنْدَادًا يُحِبُّونَهُمْ كَحُبِّ اللّٰهِۜ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَشَدُّ حُبًّا لِلّٰهِۜ وَلَوْ يَرَى الَّذ۪ينَ ظَلَمُٓوا اِذْ يَرَوْنَ الْعَذَابَۙ اَنَّ الْقُوَّةَ لِلّٰهِ جَم۪يعًاۙ وَاَنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعَذَابِ165
कुछ लोग ऐसे भी है जो अल्लाह से हटकर दूसरों को उसके समकक्ष ठहराते है, उनसे ऐसा प्रेम करते है जैसा अल्लाह से प्रेम करना चाहिए। और कुछ ईमानवाले है उन्हें सबसे बढ़कर अल्लाह से प्रेम होता है। और ये अत्याचारी (बहुदेववादी) जबकि यातना देखते है, यदि इस तथ्य को जान लेते कि शक्ति सारी की सारी अल्लाह ही को प्राप्त हो और यह कि अल्लाह अत्यन्त कठोर यातना देनेवाला है (तो इनकी नीति कुछ और होती)
اِذْ تَبَرَّاَ الَّذ۪ينَ اتُّبِعُوا مِنَ الَّذ۪ينَ اتَّبَعُوا وَرَاَوُا الْعَذَابَ وَتَقَطَّعَتْ بِهِمُ الْاَسْبَابُ166
जब वे लोग जिनके पीछे वे चलते थे, यातना को देखकर अपने अनुयायियों से विरक्त हो जाएँगे और उनके सम्बन्ध और सम्पर्क टूट जाएँगे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اتَّبَعُوا لَوْ اَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَتَبَرَّاَ مِنْهُمْ كَمَا تَبَرَّؤُ۫ا مِنَّاۜ كَذٰلِكَ يُر۪يهِمُ اللّٰهُ اَعْمَالَهُمْ حَسَرَاتٍ عَلَيْهِمْۜ وَمَا هُمْ بِخَارِج۪ينَ مِنَ النَّارِ۟167
वे लोग जो उनके पीछे चले थे कहेंगे, "काश! हमें एक बार (फिर संसार में लौटना होता तो जिस तरह आज ये हमसे विरक्त हो रहे हैं, हम भी इनसे विरक्त हो जाते।" इस प्रकार अल्लाह उनके लिए संताप बनाकर उन्हें कर्म दिखाएगा और वे आग (जहन्नम) से निकल न सकेंगे
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ كُلُوا مِمَّا فِي الْاَرْضِ حَلَالًا طَيِّبًاۘ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِۜ اِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُب۪ينٌ168
ऐ लोगों! धरती में जो हलाल और अच्छी-सुथरी चीज़ें हैं उन्हें खाओ और शैतान के पदचिन्हों पर न चलो। निस्संदेह वह तुम्हारा खुला शत्रु है
اِنَّمَا يَاْمُرُكُمْ بِالسُّٓوءِ وَالْفَحْشَٓاءِ وَاَنْ تَقُولُوا عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ169
वह तो बस तुम्हें बुराई और अश्लीलता पर उकसाता है और इसपर कि तुम अल्लाह पर थोपकर वे बातें कहो जो तुम नहीं जानते