250. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
13 · अर-रअद
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِمُ الْمَثُلَاتُۜ وَاِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ لِلنَّاسِ عَلٰى ظُلْمِهِمْۚ وَاِنَّ رَبَّكَ لَشَد۪يدُ الْعِقَابِ6
वे भलाई से पहले बुराई के लिए तुमसे जल्दी मचा रहे हैं, हालाँकि उनसे पहले कितनी ही शिक्षाप्रद मिसालें गुज़र चुकी है। किन्तु तुम्हारा रब लोगों को उनके अत्याचार के बावजूद क्षमा कर देता है और वास्तव में तुम्हारा रब दंड देने में भी बहुत कठोर है
وَيَقُولُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْهِ اٰيَةٌ مِنْ رَبِّه۪ۜ اِنَّمَٓا اَنْتَ مُنْذِرٌ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ۟7
जिन्होंने इनकार किया, वे कहते हैं, "उसपर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं अवतरित हुई?" तुम तो बस एक चेतावनी देनेवाले हो और हर क़ौम के लिए एक मार्गदर्शक हुआ है
اَللّٰهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ اُنْثٰى وَمَا تَغ۪يضُ الْاَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُۜ وَكُلُّ شَيْءٍ عِنْدَهُ بِمِقْدَارٍ8
किसी भी स्त्री-जाति को जो भी गर्भ रहता है अल्लाह उसे जान रहा होता है और उसे भी जो गर्भाशय में कमी-बेशी होती है। और उसके यहाँ हरेक चीज़ का एक निश्चित अन्दाज़ा है
عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْكَب۪يرُ الْمُتَعَالِ9
वह परोक्ष और प्रत्यक्ष का ज्ञाता है, महान है, अत्यन्त उच्च है
سَوَٓاءٌ مِنْكُمْ مَنْ اَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَنْ جَهَرَ بِه۪ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِالَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ10
तुममें से कोई चुपके से बात करे और जो कोई ज़ोर से और जो कोई रात में छिपता हो और जो दिन में चलता-फिरता दीख पड़ता हो उसके लिए सब बराबर है
لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِنْ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِه۪ يَحْفَظُونَهُ مِنْ اَمْرِ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتّٰى يُغَيِّرُوا مَا بِاَنْفُسِهِمْۜ وَاِذَٓا اَرَادَ اللّٰهُ بِقَوْمٍ سُٓوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُۚ وَمَا لَهُمْ مِنْ دُونِه۪ مِنْ وَالٍ11
उसके रक्षक (पहरेदार) उसके अपने आगे और पीछे लगे होते हैं जो अल्लाह के आदेश से उसकी रक्षा करते है। किसी क़ौम के लोगों को जो कुछ प्राप्त होता है अल्लाह उसे बदलता नहीं, जब तक कि वे स्वयं अपने आपको न बदल डालें। और जब अल्लाह किसी क़ौम का अनिष्ट चाहता है तो फिर वह उससे टल नहीं सकता, और उससे हटकर उनका कोई समर्थक और संरक्षक भी नहीं
هُوَ الَّذ۪ي يُر۪يكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنْشِئُ السَّحَابَ الثِّقَالَۚ12
वही है जो भय और आशा के निमित्त तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है और बोझिल बादलों को उठाता है
وَيُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِه۪ وَالْمَلٰٓئِكَةُ مِنْ خ۪يفَتِه۪ۚ وَيُرْسِلُ الصَّوَاعِقَ فَيُص۪يبُ بِهَا مَنْ يَشَٓاءُ وَهُمْ يُجَادِلُونَ فِي اللّٰهِۚ وَهُوَ شَد۪يدُ الْمِحَالِۜ13
बादल की गरज उसका गुणगान करती है और उसके भय से काँपते हुए फ़रिश्ते भी। वही कड़कती बिजलियाँ भेजता है, फिर जिसपर चाहता है उन्हें गिरा देता है, जबकि वे अल्लाह के विषय में झगड़ रहे होते है। निश्चय ही उसकी चाल बड़ी सख़्त है