251. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

251. पृष्ठ
13 · अर-रअद
لَهُ دَعْوَةُ الْحَقِّۜ وَالَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ لَا يَسْتَج۪يبُونَ لَهُمْ بِشَيْءٍ اِلَّا كَبَاسِطِ كَفَّيْهِ اِلَى الْمَٓاءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَالِغِه۪ۜ وَمَا دُعَٓاءُ الْكَافِر۪ينَ اِلَّا ف۪ي ضَلَالٍ14
उसी के लिए सच्ची पुकार है। उससे हटकर जिनको वे पुकारते है, वे उनकी पुकार का कुछ भी उत्तर नहीं देते। बस यह ऐसा ही होता है जैसे कोई अपने दोनों हाथ पानी की ओर इसलिए फैलाए कि वह उसके मुँह में पहुँच जाए, हालाँकि वह उसतक पहुँचनेवाला नहीं। कुफ़्र करनेवालों की पुकार तो बस भटकने ही के लिए होती है
وَلِلّٰهِ يَسْجُدُ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَظِلَالُهُمْ بِالْغُدُوِّ وَالْاٰصَالِ15
आकाशों और धरती में जो भी है स्वेच्छापूर्वक या विवशतापूर्वक अल्लाह ही को सजदा कर रहे है और उनकी परछाइयाँ भी प्रातः और संध्या समय
قُلْ مَنْ رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ قُلِ اللّٰهُۜ قُلْ اَفَاتَّخَذْتُمْ مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَ لَا يَمْلِكُونَ لِاَنْفُسِهِمْ نَفْعًا وَلَا ضَرًّاۜ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الْاَعْمٰى وَالْبَص۪يرُۙ اَمْ هَلْ تَسْتَوِي الظُّلُمَاتُ وَالنُّورُۚ اَمْ جَعَلُوا لِلّٰهِ شُرَكَٓاءَ خَلَقُوا كَخَلْقِه۪ فَتَشَابَهَ الْخَلْقُ عَلَيْهِمْۜ قُلِ اللّٰهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ وَهُوَ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ16
कहो, "आकाशों और धरती का रब कौन है?" कहो, "अल्लाह" कह दो, "फिर क्या तुमने उससे हटकर दूसरों को अपना संरक्षक बना रखा है, जिन्हें स्वयं अपने भी किसी लाभ का न अधिकार प्राप्त है और न किसी हानि का?" कहो, "क्या अंधा और आँखोंवाला दोनों बराबर होते है? या बराबर होते हो अँधरे और प्रकाश? या जिनको अल्लाह का सहभागी ठहराया है, उन्होंने भी कुछ पैदा किया है, जैसा कि उसने पैदा किया है, जिसके कारण सृष्टि का मामला इनके लिए गडुमडु हो गया है?" कहो, "हर चीज़ को पैदा करनेवाला अल्लाह है और वह अकेला है, सब पर प्रभावी!"
اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَسَالَتْ اَوْدِيَةٌ بِقَدَرِهَا فَاحْتَمَلَ السَّيْلُ زَبَدًا رَابِيًاۜ وَمِمَّا يُوقِدُونَ عَلَيْهِ فِي النَّارِ ابْتِغَٓاءَ حِلْيَةٍ اَوْ مَتَاعٍ زَبَدٌ مِثْلُهُۜ كَذٰلِكَ يَضْرِبُ اللّٰهُ الْحَقَّ وَالْبَاطِلَۜ فَاَمَّا الزَّبَدُ فَيَذْهَبُ جُفَٓاءًۚ وَاَمَّا مَا يَنْفَعُ النَّاسَ فَيَمْكُثُ فِي الْاَرْضِۜ كَذٰلِكَ يَضْرِبُ اللّٰهُ الْاَمْثَالَۜ17
उसने आकाश से पानी उतारा तो नदी-नाले अपनी-अपनी समाई के अनुसार बह निकले। फिर पानी के बहाव ने उभरे हुए झाग को उठा लिया और उसमें से भी, जिसे वे ज़ेवर या दूसरे सामान बनाने के लिए आग में तपाते हैं, ऐसा ही झाग उठता है। इस प्रकार अल्लाह सत्य और असत्य की मिसाल बयान करता है। फिर जो झाग है वह तो सूखकर नष्ट हो जाता है और जो कुछ लोगों को लाभ पहुँचानेवाला होता है, वह धरती में ठहर जाता है। इसी प्रकार अल्लाह दृष्टांत प्रस्तुत करता है
لِلَّذ۪ينَ اسْتَجَابُوا لِرَبِّهِمُ الْحُسْنٰىۜ وَالَّذ۪ينَ لَمْ يَسْتَج۪يبُوا لَهُ لَوْ اَنَّ لَهُمْ مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِه۪ۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ سُٓوءُ الْحِسَابِۙ وَمَاْوٰيهُمْ جَهَنَّمُۜ وَبِئْسَ الْمِهَادُ۟18
जिन लोगों ने अपने रब का आमंत्रण स्वीकार कर लिया, उनके लिए अच्छा पुरस्कार है। रहे वे लोग जिन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में हैं, बल्कि उसके साथ उतना और भी हो तो अपनी मुक्ति के लिए वे सब दे डालें। वही हैं, जिनका बुरा हिसाब होगा। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अत्यन्त बुरा विश्राम-स्थल है