252. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

252. पृष्ठ
13 · अर-रअद
اَفَمَنْ يَعْلَمُ اَنَّمَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ الْحَقُّ كَمَنْ هُوَ اَعْمٰىۜ اِنَّمَا يَتَذَكَّرُ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِۙ19
भला वह व्यक्ति जो जानता है कि जो कुछ तुम पर उतरा है तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, कभी उस जैसा हो सकता है जो अंधा है? परन्तु समझते तो वही है जो बुद्धि और समझ रखते है,
اَلَّذ۪ينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اللّٰهِ وَلَا يَنْقُضُونَ الْم۪يثَاقَۙ20
जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते है औऱ अभिवचन को तोड़ते नहीं,
وَالَّذ۪ينَ يَصِلُونَ مَٓا اَمَرَ اللّٰهُ بِه۪ٓ اَنْ يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُٓوءَ الْحِسَابِۜ21
और जो ऐसे हैं कि अल्लाह नॆ जिसे जोड़ने का आदेश दिया है उसे जोड़ते हैं और अपनॆ रब से डरते रहते हैं और बुरॆ हिसाब का उन्हॆं डर लगा रहता है
وَالَّذ۪ينَ صَبَرُوا ابْتِغَٓاءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاَنْفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً وَيَدْرَؤُ۫نَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عُقْبَى الدَّارِۙ22
और जिन लोगों ने अपने रब की प्रसन्नता की चाह में धैर्य से काम लिया और नमाज़ क़ायम की और जो कुछ हमने उन्हें दिया है, उसमें से खुले और छिपे ख़र्च किया, और भलाई के द्वारा बुराई को दूर करते है। वही लोग है जिनके लिए आख़िरत के घर का अच्छा परिणाम है,
جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا وَمَنْ صَلَحَ مِنْ اٰبَٓائِهِمْ وَاَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ وَالْمَلٰٓئِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِمْ مِنْ كُلِّ بَابٍۚ23
अर्थात सदैव रहने के बाग़ है जिनमें वे प्रवेश करेंगे और उनके बाप-दादा और उनकी पत्नियों और उनकी सन्तानों में से जो नेक होंगे वे भी और हर दरवाज़े से फ़रिश्ते उनके पास पहुँचेंगे
سَلَامٌ عَلَيْكُمْ بِمَا صَبَرْتُمْ فَنِعْمَ عُقْبَى الدَّارِۜ24
(वे कहेंगे) "तुमपर सलाम है उसके बदले में जो तुमने धैर्य से काम लिया।" अतः क्या ही अच्छा परिणाम है आख़िरत के घर का!
وَالَّذ۪ينَ يَنْقُضُونَ عَهْدَ اللّٰهِ مِنْ بَعْدِ م۪يثَاقِه۪ وَيَقْطَعُونَ مَٓا اَمَرَ اللّٰهُ بِه۪ٓ اَنْ يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِۙ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُٓوءُ الدَّارِ25
रहे वे लोग जो अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के पश्चात तोड़ डालते है और अल्लाह ने जिसे जोड़ने का आदेश दिया है, उसे काटते है और धरती में बिगाड़ पैदा करते है। वहीं है जिनके लिए फिटकार है और जिनके लिए आख़िरत का बुरा घर है
اَللّٰهُ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُۜ وَفَرِحُوا بِالْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۜ وَمَا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا فِي الْاٰخِرَةِ اِلَّا مَتَاعٌ۟26
अल्लाह जिसको चाहता है प्रचुर फैली हुई रोज़ी प्रदान करता है औऱ इसी प्रकार नपी-तुली भी। और वे सांसारिक जीवन में मग्न हैं, हालाँकि सांसारिक जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में तो बस अल्प सुख-सामग्री है
وَيَقُولُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْهِ اٰيَةٌ مِنْ رَبِّه۪ۜ قُلْ اِنَّ اللّٰهَ يُضِلُّ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَهْد۪ٓي اِلَيْهِ مَنْ اَنَابَۚ27
जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "उसपर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी?" कहो, "अल्लाह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है। अपनी ओर से वह मार्गदर्शन उसी का करता है जो रुजू होता है।"
اَلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُمْ بِذِكْرِ اللّٰهِۜ اَلَا بِذِكْرِ اللّٰهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُۜ28
ऐसे ही लोग है जो ईमान लाए और जिनके दिलों को अल्लाह के स्मरण से आराम और चैन मिलता है। सुन लो, अल्लाह के स्मरण से ही दिलों को संतोष प्राप्त हुआ करता है