256. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
14 · इब्राहीम
وَاِذْ قَالَ مُوسٰى لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ اِذْ اَنْجٰيكُمْ مِنْ اٰلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُٓوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ اَبْنَٓاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَٓاءَكُمْۜ وَف۪ي ذٰلِكُمْ بَلَٓاءٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَظ۪يمٌ۟6
जब मूसा ने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "अल्लाह ही उस कृपादृष्टि को याद करो, जो तुमपर हुई। जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से छुटकारा दिलाया जो तुम्हें बुरी यातना दे रहे थे, तुम्हारे बेटों का वध कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को जीवित रखते थे, किन्तु इसमें तुम्हारे रब की ओर से बड़ी कृपा हुई।"
وَاِذْ تَاَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِنْ شَكَرْتُمْ لَاَز۪يدَنَّكُمْ وَلَئِنْ كَفَرْتُمْ اِنَّ عَذَاب۪ي لَشَد۪يدٌ7
जब तुम्हारे रब ने सचेत कर दिया था कि 'यदि तुम कृतज्ञ हुए तो मैं तुम्हें और अधिक दूँगा, परन्तु यदि तुम अकृतज्ञ सिद्ध हुए तो निश्चय ही मेरी यातना भी अत्यन्त कठोर है।'
وَقَالَ مُوسٰٓى اِنْ تَكْفُرُٓوا اَنْتُمْ وَمَنْ فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًاۙ فَاِنَّ اللّٰهَ لَغَنِيٌّ حَم۪يدٌ8
और मूसा ने भी कहा था, "यदि तुम और वे जो भी धरती में हैं सब के सब अकृतज्ञ हो जाओ तो अल्लाह तो बड़ा निरपेक्ष, प्रशंस्य है।"
اَلَمْ يَاْتِكُمْ نَبَؤُ۬ا الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكُمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَۜۛ وَالَّذ۪ينَ مِنْ بَعْدِهِمْۜۛ لَا يَعْلَمُهُمْ اِلَّا اللّٰهُۜ جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَرَدُّٓوا اَيْدِيَهُمْ ف۪ٓي اَفْوَاهِهِمْ وَقَالُٓوا اِنَّا كَفَرْنَا بِمَٓا اُرْسِلْتُمْ بِه۪ وَاِنَّا لَف۪ي شَكٍّ مِمَّا تَدْعُونَنَٓا اِلَيْهِ مُر۪يبٍ9
क्या तुम्हें उन लोगों की खबर नहीं पहुँची जो तुमसे पहले गुज़रे हैं, नूह की क़ौम और आद और समूद और वे लोग जो उनके पश्चात हुए जिनको अल्लाह के अतिरिक्त कोई नहीं जानता? उनके पास उनके रसूल स्पष्टि प्रमाण लेकर आए थे, किन्तु उन्होंने उनके मुँह पर अपने हाथ रख दिए और कहने लगे, "जो कुछ देकर तुम्हें भेजा गया है, हम उसका इनकार करते है और जिसकी ओर तुम हमें बुला रहे हो, उसके विषय में तो हम अत्यन्त दुविधाजनक संदेह में ग्रस्त है।"
قَالَتْ رُسُلُهُمْ اَفِي اللّٰهِ شَكٌّ فَاطِرِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ يَدْعُوكُمْ لِيَغْفِرَ لَكُمْ مِنْ ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرَكُمْ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۜ قَالُٓوا اِنْ اَنْتُمْ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَاۜ تُر۪يدُونَ اَنْ تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬نَا فَاْتُونَا بِسُلْطَانٍ مُب۪ينٍ10
उनके रसूलों ने कहो, "क्या अल्लाह के विषय में संदेह है, जो आकाशों और धरती का रचयिता है? वह तो तुम्हें इसलिए बुला रहा है, ताकि तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर दे और तुम्हें एक नियत समय तक मुहल्ल दे।" उन्होंने कहा, "तुम तो बस हमारे ही जैसे एक मनुष्य हो, चाहते हो कि हमें उनसे रोक दो जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए है। अच्छा, तो अब हमारे सामने कोई स्पष्ट प्रमाण ले आओ।"