257. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
14 · इब्राहीम
قَالَتْ لَهُمْ رُسُلُهُمْ اِنْ نَحْنُ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ يَمُنُّ عَلٰى مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ۜ وَمَا كَانَ لَنَٓا اَنْ نَاْتِيَكُمْ بِسُلْطَانٍ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِۜ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ11
उनके रसूलों ने उनसे कहा, "हम तो वास्तव में बस तुम्हारे ही जैसे मनुष्य है, किन्तु अल्लाह अपने बन्दों में से जिनपर चाहता है एहसान करता है और यह हमारा काम नहीं कि तुम्हारे सामने कोई प्रमाण ले आएँ। यह तो बस अल्लाह के आदेश के पश्चात ही सम्भव है; और अल्लाह ही पर ईमानवालों को भरोसा करना चाहिए
وَمَا لَنَٓا اَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اللّٰهِ وَقَدْ هَدٰينَا سُبُلَنَاۜ وَلَنَصْبِرَنَّ عَلٰى مَٓا اٰذَيْتُمُونَاۜ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُونَ۟12
आख़िर हमें क्या हुआ है कि हम अल्लाह पर भरोसा न करें, जबकि उसने हमें हमारे मार्ग दिखाए है? तुम हमें जो तकलीफ़ पहुँचा रहे हो उसके मुक़ाबले में हम धैर्य से काम लेंगे। भरोसा करनेवालों को तो अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُمْ مِنْ اَرْضِنَٓا اَوْ لَتَعُودُنَّ ف۪ي مِلَّتِنَاۜ فَاَوْحٰٓى اِلَيْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ الظَّالِم۪ينَۙ13
अन्ततः इनकार करनेवालों ने अपने रसूलों से कहा, "हम तुम्हें अपने भू-भाग से निकालकर रहेंगे, या तो तुम्हें हमारे पंथ में लौट आना होगा।" तब उनके रब ने उनकी ओर प्रकाशना की, "हम अत्याचारियों को विनष्ट करके रहेंगे
وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْاَرْضَ مِنْ بَعْدِهِمْۜ ذٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَام۪ي وَخَافَ وَع۪يدِ14
और उनके पश्चात तुम्हें इस धरती में बसाएँगे। यह उसके लिए है, जिसे मेरे समक्ष खड़े होने का भय हो और जो मेरी चेतावनी से डरे।"
وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَن۪يدٍۙ15
उन्होंने फ़ैसला चाहा और प्रत्येक सरकश-दुराग्रही असफल होकर रहा
مِنْ وَرَٓائِه۪ جَهَنَّمُ وَيُسْقٰى مِنْ مَٓاءٍ صَد۪يدٍۙ16
वह जहन्नम से घिरा है और पीने को उसे कचलोहू का पानी दिया जाएगा,
يَتَجَرَّعُهُ وَلَا يَكَادُ يُس۪يغُهُ وَيَاْت۪يهِ الْمَوْتُ مِنْ كُلِّ مَكَانٍ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍۜ وَمِنْ وَرَٓائِه۪ عَذَابٌ غَل۪يظٌ17
जिसे वह कठिनाई से घूँट-घूँट करके पिएगा और ऐसा नहीं लगेगा कि वह आसानी से उसे उतार सकता है, और मृत्यु उसपर हर ओर से चली आती होगी, फिर भी वह मरेगा नहीं। और उसके सामने कठोर यातना होगी
مَثَلُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ اَعْمَالُهُمْ كَرَمَادٍۨ اشْتَدَّتْ بِهِ الرّ۪يحُ ف۪ي يَوْمٍ عَاصِفٍۜ لَا يَقْدِرُونَ مِمَّا كَسَبُوا عَلٰى شَيْءٍۜ ذٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَع۪يدُ18
जिन लोगों ने अपने रब का इनकार किया उनकी मिसाल यह है कि उनके कर्म जैसे राख हों जिसपर आँधी के दिन प्रचंड हवा का झोंका चले। कुछ भी उन्हें अपनी कमाई में से हाथ न आ सकेगा। यही परले दर्जे की तबाही और गुमराही है