258. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

258. पृष्ठ
14 · इब्राहीम
اَلَمْ تَرَ اَنَّ اللّٰهَ خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّۜ اِنْ يَشَاْ يُذْهِبْكُمْ وَيَاْتِ بِخَلْقٍ جَد۪يدٍۙ19
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने आकाशों और धरती को सोद्देश्य पैदा किया? यदि वह चाहे तो तुम सबको ले जाए और एक नवीन सृष्टा जनसमूह ले आए
وَمَا ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ بِعَز۪يزٍ20
और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं है
وَبَرَزُوا لِلّٰهِ جَم۪يعًا فَقَالَ الضُّعَفٰٓؤُ۬ا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ اَنْتُمْ مُغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ اللّٰهِ مِنْ شَيْءٍۜ قَالُوا لَوْ هَدٰينَا اللّٰهُ لَهَدَيْنَاكُمْۜ سَوَٓاءٌ عَلَيْنَٓا اَجَزِعْنَٓا اَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِنْ مَح۪يصٍ۟21
सबके सब अल्लाह के सामने खुलकर आ जाएँगे तो कमज़ोर लोग, उन लोगों से जो बड़े बने हुए थे, कहेंगे, "हम तो तुम्हारे पीछे चलते थे। तो क्या तुम अल्लाह की यातना में से कुछ हमपर टाल सकते हो? वे कहेंगे, "यदि अल्लाह हमें मार्ग दिखाता तो हम तुम्हें भी दिखाते। अब यदि हम व्याकुल हों या धैर्य से काम लें, हमारे लिए बराबर है। हमारे लिए बचने का कोई उपाय नहीं।"
وَقَالَ الشَّيْطَانُ لَمَّا قُضِيَ الْاَمْرُ اِنَّ اللّٰهَ وَعَدَكُمْ وَعْدَ الْحَقِّ وَوَعَدْتُكُمْ فَاَخْلَفْتُكُمْۜ وَمَا كَانَ لِيَ عَلَيْكُمْ مِنْ سُلْطَانٍ اِلَّٓا اَنْ دَعَوْتُكُمْ فَاسْتَجَبْتُمْ ل۪يۚ فَلَا تَلُومُون۪ي وَلُومُٓوا اَنْفُسَكُمْۜ مَٓا اَنَا۬ بِمُصْرِخِكُمْ وَمَٓا اَنْتُمْ بِمُصْرِخِيَّۜ اِنّ۪ي كَفَرْتُ بِمَٓا اَشْرَكْتُمُونِ مِنْ قَبْلُۜ اِنَّ الظَّالِم۪ينَ لَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ22
जब मामले का फ़ैसला हो चुकेगा तब शैतान कहेगा, "अल्लाह ने तो तुमसे सच्चा वादा किया था और मैंने भी तुमसे वादा किया था, फिर मैंने तो तुमसे सत्य के प्रतिकूल कहा था। और मेरा तो तुमपर कोई अधिकार नहीं था, सिवाय इसके कि मैंने मान ली; बल्कि अपने आप ही को मलामत करो, न मैं तुम्हारी फ़रियाद सुन सकता हूँ और न तुम मेरी फ़रियाद सुन सकते हो। पहले जो तुमने सहभागी ठहराया था, मैं उससे विरक्त हूँ।" निश्चय ही अत्याचारियों के लिए दुखदायिनी यातना है
وَاُدْخِلَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَا بِاِذْنِ رَبِّهِمْۜ تَحِيَّتُهُمْ ف۪يهَا سَلَامٌ23
इसके विपरीत जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए वे ऐसे बाग़ों में प्रवेश करेंगे जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। उनमें वे अपने रब की अनुमति से सदैव रहेंगे। वहाँ उनका अभिवादन 'सलाम' से होगा
اَلَمْ تَرَ كَيْفَ ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا كَلِمَةً طَيِّبَةً كَشَجَرَةٍ طَيِّبَةٍ اَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَٓاءِۙ24
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने कैसी मिसाल पेश की? अच्छी उत्तम बात एक अच्छे शुभ वृक्ष के सदृश है, जिसकी जड़ गहरी जमी हुई हो और उसकी शाखाएँ आकाश में पहुँची हुई हों;