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259. पृष्ठ
14 · इब्राहीम
تُؤْت۪ٓي اُكُلَهَا كُلَّ ح۪ينٍ بِاِذْنِ رَبِّهَاۜ وَيَضْرِبُ اللّٰهُ الْاَمْثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ25
अपने रब की अनुमति से वह हर समय अपना फल दे रहा हो। अल्लाह तो लोगों के लिए मिशालें पेश करता है, ताकि वे जाग्रत हों
وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَب۪يثَةٍ كَشَجَرَةٍ خَب۪يثَةٍۨ اجْتُثَّتْ مِنْ فَوْقِ الْاَرْضِ مَا لَهَا مِنْ قَرَارٍ26
और अशुभ एंव अशुद्ध बात की मिसाल एक अशुभ वृक्ष के सदृश है, जिसे धरती के ऊपर ही से उखाड़ लिया जाए और उसे कुछ भी स्थिरता प्राप्त न हो
يُثَبِّتُ اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِالْقَوْلِ الثَّابِتِ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَفِي الْاٰخِرَةِۚ وَيُضِلُّ اللّٰهُ الظَّالِم۪ينَ وَيَفْعَلُ اللّٰهُ مَا يَشَٓاءُ۟27
ईमान लानेवालों को अल्लाह सुदृढ़ बात के द्वारा सांसारिक जीवन में भी परलोक में भी सुदृढ़ता प्रदान करता है और अत्याचारियों को अल्लाह विचलित कर देता है। और अल्लाह जो चाहता है, करता है
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ينَ بَدَّلُوا نِعْمَتَ اللّٰهِ كُفْرًا وَاَحَلُّوا قَوْمَهُمْ دَارَ الْبَوَارِۙ28
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने अल्लाह की नेमत को कुफ़्र से बदल डाला औऱ अपनी क़ौम को विनाश-गृह में उतार दिया;
جَهَنَّمَۚ يَصْلَوْنَهَاۜ وَبِئْسَ الْقَرَارُ29
जहन्नम में, जिसमें वे झोंके जाएँगे और वह अत्यन्त बुरा ठिकाना है!
وَجَعَلُوا لِلّٰهِ اَنْدَادًا لِيُضِلُّوا عَنْ سَب۪يلِه۪ۜ قُلْ تَمَتَّعُوا فَاِنَّ مَص۪يرَكُمْ اِلَى النَّارِ30
और उन्होंने अल्लाह के प्रतिद्वन्दी बना दिए, ताकि परिणामस्वरूप वे उन्हें उसके मार्ग से भटका दें। कह दो, "थोड़े दिन मज़े ले लो। अन्ततः तुम्हें आग ही की ओर जाना है।"
قُلْ لِعِبَادِيَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا يُق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَيُنْفِقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَ يَوْمٌ لَا بَيْعٌ ف۪يهِ وَلَا خِلَالٌ31
मेरे जो बन्दे ईमान लाए है उनसे कह दो कि वे नमाज़ की पाबन्दी करें और हमने उन्हें जो कुछ दिया है उसमें से छुपे और खुले ख़र्च करें, इससे पहले कि वह दिन आ जाए जिनमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न मैत्री
اَللّٰهُ الَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَاَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَخْرَجَ بِه۪ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَكُمْۚ وَسَخَّرَ لَكُمُ الْفُلْكَ لِتَجْرِيَ فِي الْبَحْرِ بِاَمْرِه۪ۚ وَسَخَّرَ لَكُمُ الْاَنْهَارَۚ32
वह अल्लाह ही है जिसने आकाशों और धरती की सृष्टि की और आकाश से पानी उतारा, फिर वह उसके द्वारा कितने ही पैदावार और फल तुम्हारी आजीविका के रूप में सामने लाया। और नौका को तुम्हारे काम में लगाया, ताकि समुद्र में उसके आदेश से चले और नदियों को भी तुम्हें लाभ पहुँचाने में लगाया
وَسَخَّرَ لَكُمُ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ دَٓائِبَيْنِۚ وَسَخَّرَ لَكُمُ الَّيْلَ وَالنَّهَارَۚ33
और सूर्य और चन्द्रमा को तुम्हारे लिए कार्यरत किया और एक नियत विधान के अधीन निरंतर गतिशील है। और रात औऱ दिन को भी तुम्हें लाभ पहुँचाने में लगा रखा है