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261. पृष्ठ
14 · इब्राहीम
مُهْطِع۪ينَ مُقْنِع۪ي رُؤُ۫سِهِمْ لَا يَرْتَدُّ اِلَيْهِمْ طَرْفُهُمْۚ وَاَفْـِٔدَتُهُمْ هَوَٓاءٌۜ43
अपने सिर उठाए भागे चले जा रहे होंगे; उनकी निगाह स्वयं उनकी अपनी ओर भी न फिरेगी और उनके दिल उड़े जा रहे होंगे
وَاَنْذِرِ النَّاسَ يَوْمَ يَاْت۪يهِمُ الْعَذَابُۙ فَيَقُولُ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا رَبَّنَٓا اَخِّرْنَٓا اِلٰٓى اَجَلٍ قَر۪يبٍۙ نُجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ الرُّسُلَۜ اَوَلَمْ تَكُونُٓوا اَقْسَمْتُمْ مِنْ قَبْلُ مَا لَكُمْ مِنْ زَوَالٍۙ44
लोगों को उस दिन से डराओ, जब यातना उन्हें आ लेगी। उस समय अत्याचारी लोग कहेंगे, "हमारे रब! हमें थोड़ी-सी मुहलत दे दे। हम तेरे आमंत्रण को स्वीकार करेंगे और रसूलों का अनुसरण करेंगे।" कहा जाएगा, "क्या तुम इससे पहले क़समें नहीं खाया करते थे कि हमारा तो पतन ही न होगा?"
وَسَكَنْتُمْ ف۪ي مَسَاكِنِ الَّذ۪ينَ ظَلَمُٓوا اَنْفُسَهُمْ وَتَبَيَّنَ لَكُمْ كَيْفَ فَعَلْنَا بِهِمْ وَضَرَبْنَا لَكُمُ الْاَمْثَالَ45
तुम लोगों की बस्तियों में रह-बस चुके थे, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया था और तुमपर अच्छी तरह स्पष्ट हो चुका था कि उनके साथ हमने कैसा मामला किया और हमने तुम्हारे लिए कितनी ही मिशालें बयान की थी।"
وَقَدْ مَكَرُوا مَكْرَهُمْ وَعِنْدَ اللّٰهِ مَكْرُهُمْۜ وَاِنْ كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ الْجِبَالُ46
वे अपनी चाल चल चुक हैं। अल्लाह के पास भी उनके लिए चाल मौजूद थी, यद्यपि उनकी चाल ऐसी ही क्यों न रही हो जिससे पर्वत भी अपने स्थान से टल जाएँ
فَلَا تَحْسَبَنَّ اللّٰهَ مُخْلِفَ وَعْدِه۪ رُسُلَهُۜ اِنَّ اللّٰهَ عَز۪يزٌ ذُو انْتِقَامٍۜ47
अतः यह न समझना कि अल्लाह अपने रसूलों से किए हुए अपने वादे के विरुद्ध जाएगा। अल्लाह तो अपार शक्तिवाला, प्रतिशोधक है
يَوْمَ تُبَدَّلُ الْاَرْضُ غَيْرَ الْاَرْضِ وَالسَّمٰوَاتُ وَبَرَزُوا لِلّٰهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ48
जिस दिन यह धरती दूसरी धरती से बदल दी जाएगी और आकाश भी। और वे सब के सब अल्लाह के सामने खुलकर आ जाएँगे, जो अकेला है, सबपर जिसका आधिपत्य है
وَتَرَى الْمُجْرِم۪ينَ يَوْمَئِذٍ مُقَرَّن۪ينَ فِي الْاَصْفَادِۚ49
और उस दिन तुम अपराधियों को देखोगे कि ज़ंजीरों में जकड़े हुए है
سَرَاب۪يلُهُمْ مِنْ قَطِرَانٍ وَتَغْشٰى وُجُوهَهُمُ النَّارُۙ50
उनके परिधान तारकोल के होंगे और आग उनके चहरों पर छा रही होगी,
لِيَجْزِيَ اللّٰهُ كُلَّ نَفْسٍ مَا كَسَبَتْۜ اِنَّ اللّٰهَ سَر۪يعُ الْحِسَابِ51
ताकि अल्लाह प्रत्येक जीव को उसकी कमाई का बदला दे। निश्चय ही अल्लाह जल्द हिसाब लेनेवाला है
هٰذَا بَلَاغٌ لِلنَّاسِ وَلِيُنْذَرُوا بِه۪ وَلِيَعْلَمُٓوا اَنَّمَا هُوَ اِلٰهٌ وَاحِدٌ وَلِيَذَّكَّرَ اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ52
यह लोगों को सन्देश पहुँचा देना है (ताकि वे इसे ध्यानपूर्वक सुनें) और ताकि उन्हें इसके द्वारा सावधान कर दिया जाए और ताकि वे जान लें कि वही अकेला पूज्य है और ताकि वे सचेत हो जाएँ, तो बुद्धि और समझ रखते है