262. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
15 · अल-हिज्र
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓرٰ۠ تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ وَقُرْاٰنٍ مُب۪ينٍ1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं
رُبَمَا يَوَدُّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِم۪ينَ2
ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते!
ذَرْهُمْ يَاْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ الْاَمَلُ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ3
छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा!
وَمَٓا اَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ اِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَعْلُومٌ4
हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है!
مَا تَسْبِقُ مِنْ اُمَّةٍ اَجَلَهَا وَمَا يَسْتَاْخِرُونَ5
किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चित समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है
وَقَالُوا يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ اِنَّكَ لَمَجْنُونٌۜ6
वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो!
لَوْ مَا تَاْت۪ينَا بِالْمَلٰٓئِكَةِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ7
यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?"
مَا نُنَزِّلُ الْمَلٰٓئِكَةَ اِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُٓوا اِذًا مُنْظَر۪ينَ8
फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी
اِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَاِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ9
यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ ف۪ي شِيَعِ الْاَوَّل۪ينَ10
तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है
وَمَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ رَسُولٍ اِلَّا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ11
कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो
كَذٰلِكَ نَسْلُكُهُ ف۪ي قُلُوبِ الْمُجْرِم۪ينَۙ12
इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है
لَا يُؤْمِنُونَ بِه۪ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْاَوَّل۪ينَ13
वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا مِنَ السَّمَٓاءِ فَظَلُّوا ف۪يهِ يَعْرُجُونَۙ14
यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,
لَقَالُٓوا اِنَّمَا سُكِّرَتْ اَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَسْحُورُونَ۟15
फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है!"