263. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
15 · अल-हिज्र
وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَٓاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِر۪ينَۙ16
हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया
وَحَفِظْنَاهَا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ رَج۪يمٍۙ17
और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा -
اِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَاَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُب۪ينٌ18
यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया -
وَالْاَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَاَلْقَيْنَا ف۪يهَا رَوَاسِيَ وَاَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْزُونٍ19
और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई
وَجَعَلْنَا لَكُمْ ف۪يهَا مَعَايِشَ وَمَنْ لَسْتُمْ لَهُ بِرَازِق۪ينَ20
और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो
وَاِنْ مِنْ شَيْءٍ اِلَّا عِنْدَنَا خَزَٓائِنُهُۘ وَمَا نُنَزِّلُهُٓ اِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ21
कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है
وَاَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَاَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَسْقَيْنَاكُمُوهُۚ وَمَٓا اَنْتُمْ لَهُ بِخَازِن۪ينَ22
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
وَاِنَّا لَنَحْنُ نُحْي۪ وَنُم۪يتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ23
हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है
وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِم۪ينَ مِنْكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَاْخِر۪ينَ24
हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है
وَاِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْۜ اِنَّهُ حَك۪يمٌ عَل۪يمٌ۟25
तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍۚ26
हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है,
وَالْجَٓانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ27
और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे
وَاِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلٰٓئِكَةِ اِنّ۪ي خَالِقٌ بَشَرًا مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ28
याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ
فَاِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ ف۪يهِ مِنْ رُوح۪ي فَقَعُوا لَهُ سَاجِد۪ينَ29
तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"
فَسَجَدَ الْمَلٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ اَجْمَعُونَۙ30
अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया,
اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ اَبٰٓى اَنْ يَكُونَ مَعَ السَّاجِد۪ينَ31
सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करनेवालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया